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Health Tips: 30 की उम्र के बाद हर महिला को जरूर कराने चाहिए ये 5 मेडिकल टेस्ट, भविष्य रहेगा सुरक्षित

Sun, 28 Sep 2025 01:10 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

30 की उम्र के बाद हर महिला को अपनी सेहत पर ध्यान देना चाहिए। करियर और परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को नजरअंदाज न करें। इसलिए आइए लेख में जानते हैं महिलाओं को कौन से मेडिकल जांच जरूर कराना चाहिए।
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ब्लड टेस्ट - फोटो : Freepik.com
Important Medical Test For Women: हर महिला के लिए 30 की उम्र का दशक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव होता है। इस दौरान वे करियर, परिवार और अन्य कई जिम्मेदारियों को एक साथ निभा रही होती हैं, लेकिन इस भागदौड़ में अक्सर वे अपनी ही सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं को वे थकान या तनाव मानकर टाल देती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 30 की उम्र के बाद शरीर में कई हार्मोनल और अन्य बदलाव शुरू हो जाते हैं, जो भविष्य में गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा सकते हैं।

इसलिए, इस उम्र से 'प्रिवेंटिव हेल्थकेयर' यानी बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य जांच को अपनाना बेहद जरूरी है। समय पर मेडिकल टेस्ट कराने से किसी भी गंभीर बीमारी को शुरुआती चरण में ही पकड़ा जा सकता है, जिससे इलाज आसान और सफल हो जाता है। आइए इस लेख में उन्हीं 5 जरूरी मेडिकल टेस्ट्स के बारे में जानते हैं जो 30 की उम्र के बाद हर महिला को नियमित रूप से कराने चाहिए।
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सर्वाइकल कैंसर - फोटो : Freepik.com
पैप स्मीयर और एचपीवी टेस्ट
यह 30 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए सबसे महत्वपूर्ण टेस्ट में से एक है। पैप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) की जांच के लिए किया जाता है। यह उन कोशिकाओं में हो रहे बदलावों का पता लगाता है जो भविष्य में कैंसर बन सकती हैं।
इसके साथ ही एचपीवी (ह्यूमन पैपिलोमावायरस) टेस्ट भी किया जाता है, क्योंकि यही वायरस सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण होता है। विशेषज्ञों के अनुसार हर महिला को 30 के बाद 3 से 5 साल में यह टेस्ट जरूर करा लेना चाहिए।

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खून की जांच - फोटो : Freepik.com
कम्प्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) और थायराइड फंक्शन टेस्ट (टीएसएच)
कम्प्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) एक सामान्य खून की जांच है जो आपके समग्र स्वास्थ्य के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देती है। इससे एनीमिया (खून की कमी) का पता चलता है, जो भारतीय महिलाओं में बहुत आम है और थकान व कमजोरी का मुख्य कारण हो सकता है।

इसके अलावा यह टेस्ट संक्रमण और अन्य रक्त संबंधी विकारों का भी पता लगा सकता है। इसी के साथ, थायराइड फंक्शन टेस्ट (टीएसएच) कराना भी बेहद जरूरी है। 30 के बाद महिलाओं में थायराइड (विशेषकर हाइपोथायरायडिज्म) की समस्या आम हो जाती है, जिससे वजन बढ़ना, बाल झड़ना और अनियमित पीरियड्स जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं।

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कोलेस्ट्रॉल की जांच - फोटो : Adobe Stock
लिपिड प्रोफाइल
आजकल की जीवनशैली के कारण कम उम्र में ही कोलेस्ट्रॉल की समस्या बढ़ रही है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट खून में कोलेस्ट्रॉल के स्तर (अच्छे और बुरे कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स को मापता है। यह टेस्ट हृदय रोग के जोखिम का आकलन करने के लिए महत्वपूर्ण है। 30 की उम्र से ही नियमित जांच कराने से आप समय रहते अपनी जीवनशैली और खान-पान में जरूरी बदलाव कर सकती हैं।
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डायबिटीज की जांच - फोटो : Freepik.com
ब्लड शुगर टेस्ट
भारत में डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसलिए 30 की उम्र के बाद फास्टिंग ब्लड शुगर और HbA1c टेस्ट कराना बहुत जरूरी है। यह टेस्ट न केवल डायबिटीज का पता लगाता है, बल्कि प्री-डायबिटीज (डायबिटीज से पहले की स्थिति) की भी जांच करता है। समय पर प्री-डायबिटीज का पता चलने पर इसे सही डाइट और व्यायाम से पूरी तरह ठीक किया जा सकता है।
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विटामिन बी-12 टेस्ट - फोटो : Adobe Stock
विटामिन डी और बी12 टेस्ट
अधिकांश भारतीय महिलाओं में विटामिन डी और विटामिन बी12 की कमी पाई जाती है। विटामिन डी हड्डियों की मजबूती के लिए कैल्शियम के अवशोषण में मदद करता है, जबकि विटामिन बी12 नर्वस सिस्टम और ऊर्जा के स्तर के लिए महत्वपूर्ण है।

इनकी कमी से हड्डियों में दर्द, अत्यधिक थकान और मूड स्विंग्स हो सकते हैं। एक साधारण ब्लड टेस्ट से इनकी कमी का पता लगाकर सप्लीमेंट्स के जरिए इसे आसानी से दूर किया जा सकता है। इन जांचों को अपनी वार्षिक स्वास्थ्य दिनचर्या का हिस्सा बनाना आपके स्वस्थ भविष्य के लिए एक बेहतरीन निवेश हो सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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