Sedentary Lifestyle And Cancer: हमारे समाज में एक पुरानी कहावत बहुत प्रचलित थी 'ऐसी नौकरी करो जिसमें बैठे-बैठे खाने को मिले।' पिछली पीढ़ियों के लिए यह आराम और सफलता का प्रतीक हुआ करता था। जीवन का लक्ष्य होता था कि इंसान इतना पैसा कमाए कि उसे मेहनत-मजदूरी न करनी पड़े और वह बैठकर आराम से जीवन बिताए।
मगर आज के आधुनिक युग में, स्वास्थ्य विज्ञान की नजर से देखें तो यह कहावत एक खतरनाक सच में बदल चुकी है। जिस 'बैठकर खाने' वाली जीवनशैली को कभी सफलता माना जाता था, आज वही 'सेडेंटरी लाइफस्टाइल' यानी गतिहीन जीवनशैली, न केवल आम बीमारियों बल्कि कैंसर जैसे जानलेवा रोग का भी मुख्य कारण बन रही है।