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Electrolyte Imbalance: गर्मी के मौसम में बढ़ जाती है यह गंभीर समस्या, ऐसे लक्षणों को लेकर बरतें विशेष सावधानी

Sun, 22 May 2022 06:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन - फोटो : Pixabay
गर्मी के इस मौसम में सेहत से संबंधित कई तरह की चुनौतियां बढ़ जाती हैं। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन, ऐसी ही एक समस्या है जिससे अक्सर लोग परेशान देखे जाते हैं। शरीर में पानी की मात्रा बहुत अधिक या कम होने के कारण इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन हो सकता है, इस मौसम में डिहाइड्रेशन या पानी की कमी के कारण यह समस्या सबसे अधिक देखी जाती है।

इलेक्ट्रोलाइट एक प्रकार के खनिज होते हैं जिनकी शरीर को काम करते रहने के लिए निरंतर आवश्यकता होती है। शरीर में पानी के संतुलन को बनाए रखने, कोशिकाओं में पोषक तत्वों को पहुंचाने, अपशिष्ट उत्पादों को बाहर निकालने, तंत्रिकाओं को सिग्नल भेजने में मदद करने, मांसपेशियों को आराम देने और मस्तिष्क तथा हृदय की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाए रखने में इनकी विशेष भूमिका होती है।

सोडियम,पोटैशियम,कैल्शियम,मैग्नीशियम,फास्फेट,क्लोराइड जैसे तत्व इलेक्ट्रोलाइट्स को व्यवस्थित रखने में सहायक माने जाते हैं। इन पोषक तत्वों में होने वाले असंतुलन की स्थिति में शरीर में कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं। सभी लोगों को इनके लक्षणों पर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है।
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गर्मियों की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : iStock
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन क्यों होता है?

मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन तब हो सकता है जब व्यक्ति के शरीर में पानी का मात्रा बहुत कम हो जाती है। इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन या पानी की कमी के कई कारण हो सकते हैं। उल्टी-दस्त होना, पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ न लेना, बहुत ज़्यादा पसीना आना, मूत्रवर्धक दवाओं का सेवन, किडनी या लिवर की बीमारी वाले लोगों में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन  होने का खतरा अधिक होता है। गर्मी के इस मौसम में सभी लोगों को इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के लक्षणों को लेकर विशेष ध्यान देते रहना चाहिए।
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इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के संकेत - फोटो : Pixabay
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के लक्षण

हल्के स्तर के इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की स्थिति में वैसे तो ज्यादा लक्षण नहीं दिखाई देते हैं, हालांकि समस्या बढ़ने पर इसके कुछ संकेत नजर आ सकते हैं। कुछ स्थितियों में रक्त परीक्षण के बिना इस समस्या का पता भी नहीं चल पाता है। समस्या बढ़ने के साथ इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण दिल की धड़कन में अनियमितता, थकान-सुस्ती, जी मिचलाना-उल्टी, दस्त या कब्ज और पेट में ऐंठन की समस्या हो सकती है। ऐसे लक्षण अगर बने रहते हैं तो इस बारे में किसी विशेषज्ञ से सलाह जरूर ले लें। 

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पानी पीते रहना बहुत जरूरी - फोटो : Getty Images
इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन को कैसे ठीक किया जाता है?

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का पता चलने पर डॉक्टर आपकी स्थिति की गंभीरता के आधार पर इलाज की प्रक्रिया को प्रयोग में लाते हैं। सामान्यतौर पर, शरीर में खनिजों की कमी को दूर करने के लिए इंट्रावेनस फ्लूइड और लक्षणों को कम करने के लिए कुछ और दवाइयों को प्रयोग में लाया जा सकता है। हल्के स्तर की समस्या, कुछ सामान्य से उपचार के साथ ठीक की जा सकती है। 
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तरल पदार्थों का करते रहें सेवन - फोटो : istock
इलेक्ट्रोलाइट की कमी से बचने के तरीके

इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन की समस्या से बचे रहने के लिए या फिर यदि आपको हल्के स्तर के लक्षण हैं तो पानी और तरल पदार्थों की मात्रा को बढ़ाना सबसे सहज तरीक है। हालांकि तरल पदार्थों में स्पोर्ट्स ड्रिंक्स या कोल्ड ड्रिक्स के सेवन से बचना चाहिए। इसके लिए ओआरएस या चीनी-नमक पानी के घोल का दिन में कई बार सेवन करना आपके लिए विशेष फायदेमंद हो सकता है। कुछ स्थितियों में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण गंभीर और जानलेवा समस्या भी हो सकती है। ऐसे में तुरंत किसी डॉक्टर से सलाह लेना आवश्यक हो जाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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