बच्चों का दब्बू होना, लोगों से बातचीत करने में हिचकना, अधिक शर्माना या फिर अपनी बातें ठीक तरीके से व्यक्त न कर पाना, उनमें आगे चलकर गंभीर मनोरोगों के जोखिम को बढ़ा सकता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने इससे संबंधित बड़ा दावा किया है। टेक्सास यूनिवर्सिटी में किए गए इस इमेजिंग शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि बच्चों के स्वभाव से जुड़े शुरुआती जोखिम कारक भविष्य में उनमें कई प्रकार के गंभीर मानसिक स्वास्थ्य विकारों के खतरे को बढ़ा सकते हैं। इससे पहले के भी अध्ययनों में कहा जाता रहा है कि जीवन के शुरुआती समय के व्यवहार और स्थिति का भविष्य में व्यक्तित्व पर सीधा असर होता है।
शोधकर्ताओं की टीम ने इस अध्ययन में पाया कि जो लोग बचपन में अधिक हिचकते हैं, पुरस्कृत होने पर भी आमतौर पर प्रतिक्रिया नहीं देते हैं उनमें वयस्कावस्था और जीवन के आगे के चरणों में तनाव-चिंता विकार और डिप्रेशन होने का खतरा अधिक पाया गया है।
अध्ययन में पाया गया है कि बचपन के व्यवहार का मस्तिष्क के विभिन्न तंत्रों पर असर होता है, जिसके कारण ऐसे लोगों में मनोरोग विकारों का जोखिम अन्य की तुलना में अधिक हो सकता है। आइए इस अध्ययन के बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।