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Thyroid: महिलाओं में इन लापरवाहियों की वजह से बढ़ जाता है थायरॉइड का खतरा, बरतें ये सावधानियां

Sun, 31 Aug 2025 08:48 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महिलाओं में थायरॉइड की समस्या अधिक देखने को मिलती है, इसके पीछे कई कारण हैं। इन्हीं में से एक कारण कुछ लापरवाहियां भी हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं कि किन लापरवाहियों की वजह से महिलाओं में थायरॉइड  का जोखिम बढ़ जाता है।
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थाइरॉइड की समस्या - फोटो : Freepik.com
Symptoms and Prevention of Thyroid: थायरॉइड ग्रंथि हमारे शरीर में गर्दन के निचले हिस्से में स्थित एक छोटी तितली के आकार की ग्रंथि है। यह हमारे शरीर के मेटाबॉलिज्म, ऊर्जा और हार्मोन को नियंत्रित करने के लिए महत्वपूर्ण हार्मोन बनाती है। महिलाओं में मासिक धर्म, गर्भावस्था और रजोनिवृत्ति के दौरान हार्मोनल उतार-चढ़ाव अधिक होते हैं, जिससे उनमें थायरॉइड की समस्या, जैसे हाइपोथायरायडिज्म और हाइपरथायरायडिज्म, अधिक देखने को मिलती है।

अक्सर महिलाएं अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देती हैं, जिससे यह समस्या धीरे-धीरे गंभीर रूप ले लेती है। यही वजह है कि उन्हें कुछ विशेष सावधानियां बरतने की जरूरत होती है। ऐसे में अक्सर कुछ महिलाएं ऐसी लापरवाही कर देती हैं जिससे उनमें थायरायड का जोखिम बढ़ जाता है। आइए इस लेख में जानते हैं महिलाओं को किस तरह की लापरवाहियों से बचना चाहिए।
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थायराइड - फोटो : Freepik.com
आयोडीन की कमी
महिलाओं में थायरॉइड का सबसे बड़ा कारण पोषण की कमी है। डाइट में आयोडीन, सेलेनियम, और जिंक जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्वों की कमी से थायरॉइड ग्रंथि ठीक से काम नहीं कर पाती। ये तत्व थायरॉइड हार्मोन के उत्पादन के लिए बहुत जरूरी हैं। इसलिए अपनी डाइट में आयोडीन युक्त नमक, मछली, अंडे, और नट्स को शामिल करना चाहिए।

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तनाव, स्ट्रेस - फोटो : Freepik.com
तनाव और हार्मोनल असंतुलन
लगातार रहने वाला तनाव महिलाओं में हार्मोनल संतुलन को बिगाड़ सकता है, जिससे थायरॉइड पर सीधा असर पड़ता है। तनाव के कारण कॉर्टिसोल नामक हार्मोन बढ़ जाता है, जो थायरॉइड के कार्य को बाधित कर सकता है। योग, ध्यान और पर्याप्त नींद तनाव को कम करने में मदद करते हैं।

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सेडेंटरी लाइफस्टाइल - फोटो : Freepik
शारीरिक निष्क्रियता
आजकल की जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि की कमी भी थायरॉइड समस्याओं का एक बड़ा कारण है। नियमित व्यायाम, जैसे तेज चलना, जॉगिंग और योग, न केवल शरीर के मेटाबॉलिज्म को बेहतर बनाता है, बल्कि यह हार्मोनल संतुलन को भी बनाए रखता है, जिससे थायरॉइड की कार्यक्षमता में सुधार होता है।
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बच्चों में थायरॉइड की समस्या - फोटो : Freepik.com
थायरॉइड के शुरुआती लक्षणों की अनदेखी
कई महिलाएं थायरॉइड के शुरुआती लक्षणों (जैसे थकान, वजन बढ़ना, या मूड में बदलाव) को नजरअंदाज कर देती हैं। अगर परिवार में थायरॉइड की समस्या का इतिहास है, तो नियमित जांच करवाना बेहद जरूरी है। थायरॉइड फंक्शन टेस्ट एक सरल रक्त परीक्षण है जो इस समस्या का पता लगाने में मदद करता है। शुरुआती पहचान से इसका इलाज बहुत आसान हो जाता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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