फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Health Tips: अधिक वर्कलोड के कारण शरीर में हो सकती हैं ये स्वास्थ्य समस्याएं, जानिए क्या कहते हैं शोध

Sun, 31 Aug 2025 08:12 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में दफ्तर में काम करने वाले लोगों को अक्सर अधिक वर्कलोड का सामना करना पड़ता है। कुछ लोग तो इस वर्कलोड को झेल जाते हैं लेकिन कुछ लोगों के सेहत पर इसका नकारात्मक असर होता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
वर्कलोड से परेशान (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Freepik
Workload and Mental Stress: आजकल के प्रतिस्पर्धी माहौल में, नौकरी में अत्यधिक वर्कलोड एक आम बात हो गई है। लंबे समय तक काम करना और लगातार दबाव में रहना न केवल हमें मानसिक रूप से थकाता है, बल्कि हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर भी इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है। कई शोधों में इस बात की पुष्टि हुई है कि ज्यादा काम का बोझ सीधे तौर पर हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। यह केवल मानसिक तनाव और थकान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शरीर के अंदरूनी कार्यों पर भी बुरा असर डालता है, जिससे गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

यह समझना जरूरी है कि अत्यधिक वर्कलोड का असर हमारे शरीर के हर हिस्से पर पड़ता है। यह हमारे दिल, पाचन तंत्र, और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकता है। आइए इस लेख में हम जानते हैं कि ज्यादा काम का बोझ हमारे शरीर को कैसे प्रभावित कर सकता है?
विज्ञापन

2 of 5
थकान - फोटो : Freepik
मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर
अत्यधिक वर्कलोड से सबसे ज्यादा नुकसान हमारे मानसिक स्वास्थ्य को होता है। लगातार काम के दबाव में रहने से तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ जाता है। लोग चिड़चिड़ापन, निराशा और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस कर सकते हैं। यह समस्या अक्सर नींद की कमी के साथ मिलकर स्थिति को और भी खराब कर देती है।

ये भी पढ़ें- Health Risk: छोटी-छोटी बीमारियों में खुद से ही ले लेते हैं दवा? डॉक्टरों की ये चेतावनी खोल देगी आपकी आंखें
विज्ञापन

3 of 5
हृदय रोग, हार्ट अटैक - फोटो : adobe stock photos
हृदय रोग का बढ़ता जोखिम
एक शोध के अनुसार ज्यादा वर्कलोड सीधे तौर पर उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों से जुड़ा है। जब आप तनाव में होते हैं, तो आपका शरीर तनाव हार्मोन, जैसे कि कोर्टिसोल, छोड़ता है, जो रक्तचाप को बढ़ा सकता है। यह हार्मोनल असंतुलन लंबे समय में हृदय को नुकसान पहुंचाता है और दिल के दौरे का खतरा बढ़ा देता है।

ये भी पढ़ें- Calcium: कैल्शियम सिर्फ हड्डियों के लिए ही नहीं मांसपेशियों के लिए भी जरूरी, इसकी कमी बढ़ा देगी समस्या
 

4 of 5
वेट लॉस - फोटो : Freepik.com
मोटापा और पाचन संबंधी समस्याएं
अत्यधिक वर्कलोड के कारण लोग अक्सर अनहेल्दी खानपान की आदतें अपना लेते हैं। वे जल्दी-जल्दी खाते हैं, जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड का सेवन ज्यादा करते हैं। तनाव के कारण शरीर में फैट भी जमा होने लगता है, जिससे मोटापा बढ़ता है। इसके अलावा मानसिक तनाव की वजह से पाचन तंत्र भी प्रभावित होता है, जिससे अपच, गैस और कब्ज जैसी समस्याएं भी देखने को मिलती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
इम्युनिटी - फोटो : Adobe stock photos
शारीरिक दर्द और कमजोर इम्यून सिस्टम
लंबे समय तक एक ही जगह बैठकर काम करने से पीठ, गर्दन और कंधों में दर्द हो सकता है। इसके अलावा अत्यधिक तनाव हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर देता है। जब इम्यून सिस्टम कमजोर होता है, तो हम आसानी से वायरल संक्रमण और अन्य बीमारियों का शिकार हो सकते हैं।

बचाव के उपाय
अत्यधिक वर्कलोड से बचने के लिए, काम और आराम के बीच संतुलन बनाना बहुत जरूरी है। नियमित ब्रेक लें, हल्का-फुल्का व्यायाम करें और संतुलित आहार अपनाएं। जरूरत पड़ने पर अपनी भावनाओं को व्यक्त करें और मदद मांगें।

स्रोत और संदर्भ
Stressing about heart health
Stress management

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें