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Duchenne Muscular Dystrophy: मांसपेशियों की यह दुर्लभ बीमारी हो सकती है जानलेवा, जल्द मिलेगा इसका प्रभावी इलाज

Sun, 08 Jan 2023 02:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मस्कुलर डिस्ट्रॉफी की समस्या - फोटो : istock
ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (डीएमडी) जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली दुर्लभ बीमारियों में से एक है। मांसपेशियों की कमजोरी का कारण बनने वाली इस समस्या के शिकार लोगों के लिए जीवन के सामान्य कामकाज काफी कठिन हो जाते हैं। वैसे तो इसके मामले पुरुषों में अधिक देखे जाते रहे हैं, पर कुछ केस में महिलाएं भी इससे प्रभावित हो सकती हैं। यह समस्या मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के सबसे आम और घातक प्रकारों में से एक है, जो मुख्यरूप से डायस्ट्रोफिन नामक प्रोटीन में कमी के कारण होती है। यह प्रोटीन मांसपेशियों की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने और इनके विकास में मदद करता है।

अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि डीएमडी की समस्या के लिए आनुवांशिकता एक प्रमुख कारक है। यानी कि जिन लोगों के परिवार में पहले से ही किसी को यह विकार रह चुका है उनमें इसके विकसित होने का खतरा हो सकता है। सामान्यतौर पर इसके लक्षण 2-4 साल की आयु में दिखने शुरू हो जाते हैं। इसका अब तक कोई इलाज नहीं है।

एक अनुमान के मुताबिक लंबे समय तक चलने वाले इसके सहायक उपचार के लिए प्रतिवर्ष का खर्च  2-3 करोड़ रुपये तक होता है। हालांकि अब देश के वैज्ञानिक इस गंभीर समस्या के विशिष्ट इलाज के लिए शोध कर रहे हैं। 
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दुर्लभ बीमारी के उपचार के लिए किया जा रहा है शोध (सांकेतिक) - फोटो : Pixels
भारत वैज्ञानिक इलाज के लिए कर रहे हैं शोध

आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिक, एम्स जोधपुर और डिस्ट्रोफी एनीहिलेशन रिसर्च ट्रस्ट (डीएआरटी) बेंगलुरु के सहयोग से इस दुर्लभ बीमारी के उपचार के लिए शोध कर रहे हैं। शोध पर काम कर रहे वैज्ञानिक सुरजीत घोष बताते हैं, वर्तमान में डीएमडी का कोई विशिष्ट उपचार नहीं है। इसके लिए सहायक उपचार विधियों को प्रयोग में लाया जाता है।

हम इसके लिए बेहतर और सस्ता उपचार विधि तैयार करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य न सिर्फ रोगियों की जीवन गुणवत्ता को बढ़ाना है साथ ही आनुवांशिकता के जोखिम को कम करते हुए इससे बचाव पर भी ध्यान देना है।
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मांसपेशियों की कमजोरी की समस्या - फोटो : istock
ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के बारे में जानिए

ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के मामले काफी दुर्लभ हैं। 3,600 जीवित पैदा हुए शिशुओं में लगभग 1 को यह दिक्कत विकसित होती है। यह गंभीर वंशानुगत मायोपैथी (कंकाल की मांसपेशियों के विकार) का सबसे आम प्रकार है। इस स्थिति में कंकाल और हृदय की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं जो समय के साथ और कमजोर होती जाती हैं।

वैज्ञानिकों ने इसे जानलेवा बीमारी के तौर पर वर्गीकृत किया है। ज्यादातर रोगी फेफड़े या हृदय की जानलेवा समस्याओं के शिकार हो जाते हैं।

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ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के कारण चलने में होती है परेशानी - फोटो : iStock
ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी में होती है ऐसी दिक्कतें

यह बीमारी मुख्यरूप से मांसपेशियों की कमजोरी और मांसपेशियों की मात्रा में कमी की समस्या है, जिसके लक्षण बचपन में ही दिख जाते हैं। इस समस्या में कुछ हिस्सों में मांसपेशियां कम जबकि काल्फ जैसे हिस्सों में मांसपेशियों के आकार में वृद्धि देखी जाती है। इस तरह की समस्याओं के कारण कई प्रकार की दिक्कतें हो सकती हैं। 
  • सीढ़ियां चढ़ने में कठिनाई।
  • सामान्यरूप से भी चलने में कठिनाई जो समय के साथ और भी बदतर हो जाती है।
  • बार-बार गिरना।
  • हृदय-फेफड़ों की समस्या।
  • कुछ लोगों के लिए उठना तक भी कठिन हो जाता है।
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ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी का उपचार - फोटो : Pixabay
ड्यूकेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से बचाव और इलाज
 
चूंकि इस बीमारी के अधिकतर मामले आनुवांशिक होते हैं, ऐसे में इन्हें रोकना कठिन होता है। पारिवारिक इतिहास के बिना भी लगभग एक तिहाई लोगों को यह समस्या हो सकती है। बीमारी के निदान के बाद आवश्यकतानुसार दवाइयों और सर्जरी के माध्यम से लक्षणों को सुधारने की कोशिश की जाती है। फिजियोथेरपी और व्यायाम के माध्यम से जीवन की गुणवत्ता को कुछ हद तक सुधारा जा सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि जल्द ही भारत में इसके लिए प्रभावी और सस्ते इलाज उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।



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स्रोत और संदर्भ 
Duchenne Muscular Dystrophy (DMD)
 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें
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