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Brain Stroke Risk: हर साल लाखों लोगों की स्ट्रोक से हो जाती है मौत, क्या केले खाने से दूर होगा खतरा?

Mon, 30 Mar 2026 05:09 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पोटैशियम नर्व सिग्नलिंग, मांसपेशियों के सिकुड़ने और दिल की धड़कन को नियमित बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। यह सोडियम के असर को कम करके ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित करने में भी मदद करता है, जिससे स्ट्रोक का जोखिम कम हो सकता है।
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ब्रेन स्ट्रोक के खतरे को कैसे कम करें? - फोटो : Freepil.com
ब्रेन स्ट्रोक हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बन रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक स्ट्रोक दुनियाभर में मृत्यु और विकलांगता का तीसरा सबसे बड़ा कारण है, साल 2021 में इससे अनुमानित 9.38 करोड़ मामले सामने आए थे। युवाओं में इस समस्या का खतरा तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है।

स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क तक खून पहुंचाने वाली नसें या तो ब्लॉक हो जाती हैं या फट जाती हैं। इन दोनों ही स्थितियों में दिमाग की कोशिकाएं ऑक्सीजन की कमी के कारण डेड होने लग जाती हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर की दिक्कत होती है उनमें स्ट्रोक होने और इससे जान जाने का खतरा अधिक होता है।

हाई ब्लड प्रेशर रक्त वाहिकाओं की दीवारों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे उनमें ब्लॉकेज का खतरा बढ़ जाता है। लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी ब्लड प्रेशर और स्ट्रोक दोनों का जोखिम कारक हो सकती है।

क्या आप जानते हैं कि अगर रोजाना के आहार में केले को शामिल कर लिया जाए तो इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है?
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केला खाने फायदे - फोटो : Freepil.com
केले खाने से कम होता है स्ट्रोक का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्ट्रोक से बचाव के लिए खानपान में सुधार के साथ, नियमित व्यायाम की आदत मददगार हो सकती है। कई शोध बताते हैं कि पोटेशियम से भरपूर आहार जैसे केले ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने और स्ट्रोक के जोखिमों को कम करने में लाभकारी हैं। 
 
  • केला पोटेशियम का अच्छा स्रोत है। पोटेशियम शरीर में सोडियम के प्रभाव को संतुलित करता है, जिससे ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है। 
  • अध्ययनों में पाया गया है कि पर्याप्त पोटेशियम लेने वाले लोगों में स्ट्रोक का जोखिम कम देखा गया। 
  • एक मध्यम आकार के केले में लगभग 350-400 मि.ग्रा. पोटेशियम होता है। 
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स्ट्रोक के खतरे को कैसे कम करें? - फोटो : Freepik.com
पोटेशियम से कम होता है स्ट्रोक का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, दुनियाभर में करोड़ों लोगों में इस जरूरी मिनरल की कमी देखी जा रही है जो दिल के दौरे और स्ट्रोक के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है।

लंदन की टीसाइड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता प्रोफेसर जॉन यंग कहते हैं, पोटेशियम की कमी वास्तव में बहुत आम है और ये काफी खतरनाक भी हो सकती है। पोटेशियम नसों के संकेतों, मांसपेशियों के सिकुड़ने और दिल की धड़कन को नियमित बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। जिन लोगों में पोटेशियम की गंभीर कमी होती है उनमें भ्रम, उदासी जैसे लक्षण अधिक होते हैं।  इसका असर दिल पर भी पड़ सकता है, जिससे दिल की धड़कन के तेज होने, ब्लड प्रेशर बढ़ने और स्ट्रोक का खतरा रहता है।

इन लक्षणों से बचने के लिए, वयस्कों को हर दिन 3,500 मिलीग्राम तक पोटेशियम का सेवन करना चाहिए। रोजाना केले खाना इसमें काफी लाभकारी हो सकता है।

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पोटेशियम वाली चीजें खाने के फायदे - फोटो : Adobe Stock
अध्ययनों में क्या पता चला?

साल 2024 के एक अध्ययन  में पाया गया कि भोजन के जरिए पोटेशियम का लेवल बढ़ाने से दिल की बीमारियों, स्ट्रोक या इनकी वजह से मौत का खतरा 24 प्रतिशत तक कम हो जाता है। वहीं 2016 में हुई स्टडी में पाया गया कि पोटेशियम आपमें स्ट्रोक होने का खतरा 20 प्रतिशत तक कम कर सकती है।

पोटेशियम की रोजाना की जरूरी मात्रा को पूरा करने के लिए आमतौर पर 10 मध्यम आकार के केले खाने होंगे। हालांकि आप केले के साथ पोटेशियम वाली कुछ अन्य चीजों को खाकर इसकी मात्रा को पूरी कर सकते हैं। दो केले से आप लगभग 800-900 मिलीग्राम पोटेशियम प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा पालक, बीन्स, आलू, दही और मछलियों को भी आहार में शामिल किया जा सकता है।

हालांकि केवल केला ही समाधान नहीं है, संतुलित आहार पर ध्यान रखकर आप स्ट्रोक से बच सकते हैं। 
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ब्रेन स्ट्रोक के खतरे से कैसे बचें? - फोटो : Freepik.com
स्ट्रोस से बचाव के लिए और क्या करें?

डॉक्टर कहते हैं, स्ट्रोक से बचाव के लिए सबसे जरूरी है ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखना। इसके लिए नमक का सेवन कम करें, रोज कम से कम 30 मिनट तेज चाल से चलें। धूम्रपान और शराब से बचें, वजन संतुलित रखें और नियमित हेल्थ चेकअप कराएं। डैश डाइट को ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में लाभकारी पाया गया है, स्ट्रोक से बचाव में इससे भी मदद मिल सकती है।




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स्रोत:
Potassium-rich diet and risk of stroke: updated meta-analysis


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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