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Heart Problem: स्टेंटिंग में हो रहा लाखों खर्च, जानिए क्या है ये प्रक्रिया जो इमरजेंसी से बचा सकती है आपकी जान

Mon, 30 Mar 2026 05:08 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आधुनिक चिकित्सा में एंजियोप्लास्टी और स्टेंट प्लेसमेंट एक प्रभावी तरीका है जिससे धमनियों में ब्लॉकेज को खोला जा सकता है और कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। आइए जानते हैं कि ये प्रक्रिया क्या होती है, जिसे जान बचाने वाला माना जाता है। 
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हार्ट अटैक और स्टेंटिंग की प्रक्रिया - फोटो : Adobe Stock
हृदय रोग, हार्ट अटैक के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। दिल की बीमारियां वैश्विक स्तर पर मौत का प्रमुख कारण हैं, जिसे लेकर सभी लोगों को निरंतर सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2022 में दिल से संबंधित बीमारियों के कारण अनुमानित 1.98 करोड़ लोगों की मौतें हुईं और अनुमान है कि साल 2050 तक ये आंकड़ा और भी बढ़ सकता है। इन मौतों में से लगभग 85% का कारण हार्ट के कारण होते हैं, जो दुनिया भर में होने वाली कुल मौतों का लगभग एक-तिहाई हिस्सा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से लोगों की लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी देखी जा रही है, इसने दिल की बीमारियों का खतरा और भी बढ़ा दिया है। हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल के कारण हार्ट अटैक का जोखिम कम उम्र के लोगों में भी बढ़ता देखा जा रहा है। 

हार्ट अटैक की स्थिति में आपने एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग के बारे में खूब सुना होगा। स्टेंट की प्रकिया में लोगों का लाखों खर्च होता है। पर ये प्रक्रिया होती क्या है और इससे क्या लाभ होता है? आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : Adobe Stock Photos
 स्टेंटिंग पर हो रहा लाखों खर्च

स्टेंट की प्रक्रिया को समझने से पहले इसपर होने वाले खर्च से संबंधित खबर जान लेना जरूरी है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्र सरकार ने स्टेंट जैसे मेडिकल उपकरणों की कीमतें तो तय कर दी हैं लेकिन मरीजों को उससे कहीं अधिक खर्च करना पड़ रहा है। संसदीय समिति की एक रिपोर्ट में इसको लेकर खुलासा हुआ है कि एक स्टेंट की कीमत पर करीब 38 हजार रुपए है, लेकिन इलाज का बिल 1-2 लाख रुपए तक आता है।
 
  • राज्यसभा में पेश याचिका समिति की रिपोर्ट में बताया गया कि स्टेंट्स 85%, घुटने के इम्प्लांट 70% तक सस्ते हो चुके हैं। पर मरीज अब भी लाखों खर्च करने पर मजबूर हैं। 
  • इसकी वजह ये है स्टेटिंग प्रक्रिया के दौरान कि बिल में डॉक्टर की फीस, आईसीयू, इलाज और जांच पर खर्च पर कोई लगाम नहीं है।
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हार्ट अटैक के बाद सर्जरी - फोटो : Freepik.com
स्टेंटिंग क्यों जरूरी होती है?

जब किसी व्यक्ति को हार्ट अटैक आता है या जांच के दौरान धमनी में ब्लॉकेज दिखते हैं तो डॉक्टर एंजियोप्लास्टी और स्टेंटिंग कराने की सलाह देते हैं। रक्त संचार को सुचारू करके दिल के ऊतकों को डैमेज से बचाने में इससे मदद मिलती है। इतना ही नहीं समय पर स्टेंटिंग से मृत्यु के खतरे को कम किया जा सकता है।


एंजियोप्लास्टी और स्टेंट एक ही हैं क्या?

हृदय तक रक्त का संचार करने वाली धमनियों में ब्लॉकेज होने के कारण हार्ट अटैक होता है। इसी ब्लॉकेज को खोलने और दोबारा से रक्त के संचार को शुरू करने के लिए एंजियोप्लास्टी और स्टेंट किया जाता है।
 
  • जब कोरोनरी धमनियों में ब्लॉकेज होता है, तो डॉक्टर एक छोटी ट्यूब को दिल तक पहुंचाते हैं। खून का प्रवाह बढ़ाने के लिए ब्लॉकेज की जगह पर एक छोटा सा गुब्बारा फुलाया जाता है, इस प्रक्रिया को एंजियोप्लास्टी कहते हैं।
  • स्टेंट एक बहुत छोटी, धातु की जालीदार ट्यूब होती है जो ब्लॉकेज वाले स्थान पर लगा दी जाती है। ये धमनी में फिर से रुकावट बनने से रोकते हैं। एंजियोप्लास्टी के बाद स्टेंटिंग की सलाह दी जाती है।
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हार्ट अटैक से बचे रहने के लिए कंट्रोल रखें बीपी - फोटो : Adobe Stock
स्टेंटिंग के बाद रखें सेहत का ख्याल

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्टेंटिंग की मदद से दोबारा हार्ट अटैक खतरे को कम करने और जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। हालांकि इसके बाद मरीजों को दिल को स्वस्थ बनाए रखने के लिए लाइफस्टाइल- खानपान में सुधार के साथ नियमित रूप से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रखने वाली दवाएं लेते रहने की जरूरत होती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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