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Health Tips: क्या सिर्फ आंखों में देखने से फैलता है कंजक्टिवाइटिस? जानें इस बीमारी से जुड़े चार मिथक और सच्चाई

Wed, 08 Oct 2025 01:32 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • मानसून में आंख आने का जोखिम बढ़ जाता है। इस मौसम अक्सर ऐसा होता है कि लोग आंखों के लाल होने से और उसमें खुजली होने से परेशान रहते हैं।
  • इस बीमारी को कंजक्टिवाइटिस कहते हैं। हमारे समाज में कंजक्टिवाइटिस को लेकर कई मिथक हैं, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।
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कंजक्टिवाइटिस - फोटो : Amar Ujala
Myths About Conjunctivitis: कंजंक्टिवाइटिस एक आम बीमारी है लेकिन अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये गंभीर हो सकती है। कंजंक्टिवाइटिस को बोलचाल के भाषा में 'आंख आना' या 'पिंक आई' भी कहते हैं। वैसे तो ये बीमारी किसी भी मौसम में हो सकता है लेकिन मानसून में इसका खतरा बढ़ जाता है। इस बीमारी में आंखें लाल हो जाती हैं, उनमें सूजन आ जाती है और खुजली व जलन महसूस होती है। यह एक संक्रामक रोग है लेकिन इसके फैलने के तरीके को लेकर समाज में कई तरह के मिथक और भ्रांतियां फैली हुई हैं।

कंजंक्टिवाइटिस को लेकर सबसे आम गलतफहमी यह है कि किसी संक्रमित व्यक्ति की आंखों में देखने मात्र से ही यह बीमारी फैल जाती है। इस डर से लोग अक्सर संक्रमित व्यक्ति से दूरी बना लेते हैं, जबकि यह वैज्ञानिक रूप से गलत है। यह बीमारी आंखों से निकलने वाले स्राव के सीधे संपर्क में आने से फैलती है।

इस तरह के मिथक न केवल गलत जानकारी फैलाते हैं, बल्कि संक्रमित व्यक्ति को सामाजिक अलगाव का शिकार भी बना सकते हैं। इसलिए इस बीमारी से जुड़ी सच्चाई को जानना बहुत जरूरी है ताकि हम खुद को और दूसरों को सुरक्षित रख सकें और बेवजह के डर से बच सकें। आइए इस लेख में हम कंजंक्टिवाइटिस के ऐसे ही चार सबसे बड़े मिथकों के बारे में जानते हैं और साथ ही उनकी सच्चाई के बारे में भी जानेंगे।
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कंजक्टिवाइटिस यानी 'आंख आना' - फोटो : Amar Ujala
किसी की आंखों में देखने से फैलता है
यह सबसे बड़ा और सबसे आम मिथक है। सच्चाई यह है कि कंजंक्टिवाइटिस हवा या आंखों के संपर्क से नहीं फैलता। यह केवल तब फैलता है जब कोई व्यक्ति संक्रमित व्यक्ति की आंखों से निकलने वाले लिक्विड (डिस्चार्ज) के संपर्क में आता है। जैसे कि अगर संक्रमित व्यक्ति ने अपनी आंखों को छुआ हो और फिर किसी सतह (दरवाजे का हैंडल, मेज, या तौलिया) को छुआ हो, और फिर दूसरा व्यक्ति उसी सतह को छूकर अपनी आंखों को छू ले।

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कंजक्टिवाइटिस - फोटो : Adobe Stock
यह सिर्फ बच्चों को होता है
यह एक और गलत धारणा है। सच्चाई यह है कि कंजंक्टिवाइटिस किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। हालांकि बच्चों में यह ज्यादा फैलता है क्योंकि वे अक्सर अपनी आंखों को छूते हैं और साफ-सफाई के प्रति कम जागरूक होते हैं। स्कूल जैसी जगहों पर बच्चे एक-दूसरे के संपर्क में ज्यादा आते हैं, जिससे यह तेजी से फैल सकता है।


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कंजक्टिवाइटिस - फोटो : Adobe Stock Images
गुलाबी आंखें यानी सिर्फ बैक्टीरिया
कंजंक्टिवाइटिस कई कारणों से हो सकता है। सच्चाई यह है कि यह बैक्टीरिया, वायरस, या एलर्जी के कारण भी हो सकता है। वायरल कंजंक्टिवाइटिस सबसे आम है और यह अक्सर जुकाम जैसे लक्षणों के साथ आता है। बैक्टीरियल कंजंक्टिवाइटिस में आंखों से गाढ़ा, पीला लिक्विड निकलता है, जबकि एलर्जी से होने वाले कंजंक्टिवाइटिस में खुजली और पानी ज्यादा आता है।
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कंजक्टिवाइटिस - फोटो : Adobe Stock Images
बिना डॉक्टर की सलाह के दवा लेने से भी ठीक हो सकता है
बहुत से लोग बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से आई ड्रॉप्स खरीद लेते हैं। सच्चाई यह है कि सभी प्रकार के कंजंक्टिवाइटिस का इलाज अलग होता है। बैक्टीरियल इंफेक्शन के लिए एंटीबायोटिक आई ड्रॉप्स की जरूरत होती है, जबकि वायरल के लिए नहीं। गलत दवा का इस्तेमाल करना स्थिति को और खराब कर सकता है। हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही कोई दवा लें और साफ-सफाई का ध्यान रखें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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