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Prostate Cancer: प्रोस्टेट कैंसर के 90% मामलों में समय पर इलाज से बच सकती है जान, ऐसे पहचानें शुरुआती लक्षण

Tue, 07 Oct 2025 10:22 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • डॉक्टर कहते हैं, प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग बढ़ाना इस कैंसर के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए जरूरी है। सभी लोगों को इसके लक्षणों पर भी गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए ताकि बीमारी समय रहते पकड़ में आ जाए। 
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प्रोस्टेट कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe stock photos
प्रोस्टेट कैंसर का खतरा पिछले एक-दो दशकों में तेजी से बढ़ता हुआ देखा गया है। आमतौर पर माना जाता रहा है कि 60 साल से अधिक उम्र वाले लोग इस कैंसर का शिकार होते हैं, हालांकि डेटा बताते हैं कि अब 50 की उम्र वालों में भी प्रोस्टेट की समस्या बढ़ती हुई देखी जा रही है। 

भारत जैसे देश में अब भी प्रोस्टेट कैंसर के बारे में चिंताजनक रूप से जागरूकता कम है, कई पुरुषों को ये पता ही नहीं होता है कि वह प्रोस्टेट की समस्या का शिकार हो गए हैं। जागरूकता की कमी के चलते बीमारी के शुरुआती संकेतों को नजरअंदाज कर देते हैं। 

डॉ कहते हैं, कैंसर के मामलों में सबसे बड़ी चिंता यही रही है कि अधिकतर लोगों में इस समस्या का निदान ही तब हो पाता है जब बीमारी आखिरी के चरणों में पहुंच जाती है, जहां से इलाज करना और जान बचा पाना दोनों मुश्किल हो जाता है। अगर कैंसर का समय रहते निदान हो जाए तो इलाज के माध्यम से 80-90% लोगों की जान बचाई जा सकती है।
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50 की उम्र में प्रोस्टेट कैंसर की समस्या - फोटो : Freepik.com
50 की उम्र वालों में भी देखा जा रहा है खतरा

कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ सुदीप्तो डे कहते हैं, जिस तरह से प्रोस्टेट कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे हैं, ये जरूरी हो गया है कि हम इस बढ़ते खतरे को गंभीरता से लें।

आमतौर पर माना जाता रहा है कि प्रोस्टेट कैंसर सिर्फ बुजुर्गों को होने वाली समस्या है, हालांकि अब इसका जोखिम 50 की उम्र वालों में भी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। जिन लोगों में प्रोस्टेट कैंसर की फैमिली हिस्ट्री रही है ऐसे लोगों में 45 साल की उम्र में भी जोखिम देखे जा सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि उच्च जोखिम वाले लोग 40 साल की उम्र और अन्य लोगों को डॉक्टर की सलाह पर 50 की उम्र तक जांच शुरू करा लेनी चाहिए। 
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प्रोस्टेट कैंसर में क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Freepik.com
प्रोस्टेट कैंसर के लक्षणों को जानिए

डॉक्टर कहते हैं, प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग बढ़ाना इस कैंसर के बढ़ते खतरे को कम करने के लिए जरूरी है। इसके साथ सभी लोगों को इसके लक्षणों पर भी गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए ताकि बीमारी समय रहते पकड़ में आ जाए। 
  • रात में बार-बार पेशाब की इच्छा होना प्रोस्टेट के बढ़ने का शुरुआती संकेत हो सकता है। यह मूत्राशय पर दबाव बढ़ने की वजह से होता है।
  • मूत्र मार्ग में सूजन या कैंसर सेल्स के कारण पेशाब करते समय जलन, जलन के साथ असहजता महसूस हो सकती है।
  • प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने से मूत्र मार्ग संकरा हो जाता है, जिससे पेशाब की धारा कमजोर या रुक-रुककर आती है।
  • यदि मूत्र या वीर्य में खून दिखे तो यह प्रोस्टेट की कोशिकाओं में बदलाव या ट्यूमर का संकेत हो सकता है।
  • कैंसर के फैलने की स्थिति में पीठ, कूल्हों या जांघों में दर्द महसूस होता है, जो धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।
  • प्रोस्टेट पर प्रभाव के कारण नर्वस सिस्टम और रक्त प्रवाह प्रभावित होता है, जिससे यौन क्षमता में कमी आ सकती है।
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कैंसर से बचाव के लिए लें डॉक्टरी सलाह - फोटो : Adobe stock
कैसे करें इस कैंसर से बचाव

डॉक्टर कहते हैं, कम उम्र से ही कुछ बातों पर ध्यान दे लिया जाए तो कैंसर के खतरे को कम किया जा सकता है।

प्रोस्टेट कैंसर से बचाव के उपाय के लिए पीएसए (प्रोस्टेट-स्पेसिफिक एंटीजन) टेस्ट 50 की उम्र के बाद साल में एक बार जरूर कराएं। इसके अलावा दिनचर्या और खान-पान में सुधार करना भी कैंसर से बचाव के लिए आवश्यक है।

संतुलित जैसे फाइबर वाली चीजें, फल, हरी सब्जियां और ओमेगा-3 फैट्स वाली चीजों का सेवन करें। रेड मीट और प्रोसेस्ड फूड से बचें। अध्ययनों में धूम्रपान और शराब को सेहत के लिए बहुत खतरनाक बताया गया है, इन दोनों आदतों से बिल्कुल दूरी बना लें। नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रित रखना, तनाव कम करना भी इस कैंसर के खतरे से बचे रखने में मददगार है। 


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नोट:
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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