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Health Tips: ओवरथिंकिंग रोकने के लिए डॉक्टर ने सुझाए ये तरीके, अपना लिए तो बढ़ जाएगी आपकी प्रोडक्टिविटी

Sun, 21 Dec 2025 02:44 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

How To Stop Overthinking: ओवरथिंकिंग इंसान को अंदर से खोखला करने लगती है, इतना ही नहीं इसका नकारात्मक असर उनके जीवन और स्वास्थ्य पर भी दिखने लगता है। इससे उनके मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके शारीरिक स्वास्थ्य पर असर दिखने लगता है। आइए इस लेख में इसी के बारे में डॉक्टर से जानते हैं।
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ओवरथिंकिंग - फोटो : Amar Ujala
Overthinking Problem Solution: किसी भी चीज के बारे में सोचना बहुत अच्छी बात है। मगर बहुत देर तक एक ही बात को अलग-अलग तरीके से सोचना, और इतना सोचना कि आपके दिमाग पर उसका गलत असर होने लगे आप परेशान होने लगें और ऐसा लगभग हर छोटी बातों पर आपका दिमाग ऐसे सोचने लगें, तो इसे ओवरथिंकिंग कहते हैं।

क्या आप भी दिन-रात एक ही बात को बार-बार सोचकर परेशान रहते हैं? ओवरथिंकिंग यानी जरूरत से ज्यादा सोचना एक ऐसी मानसिक स्थिति है जो इंसान को अंदर ही अंदर खोखला कर देती है। यह न केवल आपके दिमाग का तनाव बढ़ाती है, बल्कि आपको मानसिक और शारीरिक रूप से भी कमजोर कर देती है। जब दिमाग विचारों के जाल में उलझ जाता है, तो हमारी निर्णय लेने की क्षमता और कार्यक्षमता बुरी तरह प्रभावित होती है। 

लगातार चिंता करने से नींद की कमी, घबराहट और चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं पैदा होने लगती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते इस पर नियंत्रण न पाया जाए, तो यह गंभीर अवसाद का रूप ले सकती है। ओवरथिंकिंग को तुरंत बंद करने और दिमाग को शांत रखने के कुछ बेहद सरल और वैज्ञानिक तरीके सोशल मीडिया पर डॉक्टर शालिनी सिंह सोलंकी ने साझा किए हैं, जिसके बारे में आपको भी जानना चाहिए।


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ओवरथिंकिंग - फोटो : Freepik
जर्नलिंग करें
डॉक्टर शालिनी के अनुसार, ओवरथिंकिंग रोकने का सबसे पहला और कारगर तरीका है जर्नलिंग। जब भी दिमाग में विचारों का सैलाब आए, तो उन्हें एक कागज पर लिखना शुरू कर दें। ऐसा करने से दिमाग में चल रही उथल-पुथल व्यवस्थित होने लगती है। डॉक्टर के मुताबिक, जैसे ही आप अपने डर या चिंताओं को लिख लेते हैं, आपका दिमाग लगभग 50% तक शांत हो जाता है।

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ओवरथिंकिंग - फोटो : Adobe Stock
3-मिनट का नियम और बॉक्स ब्रीदिंग
अगर आप किसी समस्या का समाधान 3 मिनट के भीतर नहीं निकाल पा रहे हैं, तो उसके बारे में सोचना तुरंत बंद कर दें। इसके साथ ही, मानसिक शांति के लिए हर एक-दो घंटे में 'बॉक्स ब्रीदिंग' (4-4-4-4 तकनीक) का अभ्यास करें। इसमें 4 सेकंड तक सांस लेना, 4 सेकंड रोकना, 4 सेकंड छोड़ना और 4 सेकंड खाली रहना शामिल है। यह तकनीक नर्वस सिस्टम को तुरंत रिलैक्स करती है।

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ओवरथिंकिंग - फोटो : Freepik
डिजिटल डिटॉक्स और डोपामीन कंट्रोल
लगातार फोन की घंटियां और नोटिफिकेशन्स दिमाग को कभी शांत नहीं होने देते। डॉक्टर सोलंकी सलाह देती हैं कि अपने फोन के नोटिफिकेशन्स बंद कर दें। इससे आपके दिमाग को बार-बार 'डोपामीन हिट' नहीं मिलेगा, जिससे एकाग्रता बढ़ेगी। जब दिमाग बाहरी उत्तेजनाओं से मुक्त होता है, तो वह स्वाभाविक रूप से शांत रहना सीख जाता है और बेवजह की सोच कम हो जाती है।
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ओवरथिंकिंग - फोटो : Freepik
विचारों को 'नाम' दें
अंतिम और अनोखा तरीका है विचारों को लेबल करना। डॉक्टर शालिनी बताती हैं कि जब भी कोई भी विचार आए, तो उसे एक नाम दें। इससे आपके दिमाग में अपने आप क्लैरिटी आएगी कि यह सिर्फ एक डर है" या "यह एक शंका है"। ऐसा करने से उस विचार की पकड़ आपके दिमाग पर कमजोर हो जाती है। इन पांचों नियमों का पालन करके आप अपनी ओवरथिंकिंग को 80% तक कम कर सकते हैं और एक खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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