15 से 20 साल की उम्र को आमतौर पर ऐसी उम्र माना जाता है, जब शरीर मजबूत होता है और बीमारियां दूर रहती हैं। लेकिन इस दौरान माता-पिता को बच्चों-किशोरों की सेहत को लेकर सबसे ज्यादा अलर्ट रहने की भी जरूरत होती है। किशोरावस्था में शरीर में तेजी से बदलाव आ रहा होता है। इसी दौरान कई ऐसी बीमारियां सामने आ सकती हैं, जिन्हें अक्सर लोग पढ़ाई का तनाव, कमजोरी या मौसम बदलने की वजह मानकर टाल देते हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक किशोरों में खून की कमी, अस्थमा, डायबिटीज, मोटापा और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी देखी जाती हैं। कुछ बीमारियों के जोखिम की शुरुआत भी इसी उम्र में हो सकती है। इसलिए अगर बच्चे में कुछ समय से दिक्कतें बनी हुई हैं तो उन्हें अनदेखा नहीं करना चाहिए।
इस उम्र के बच्चों में बार-बार थकना, सीढ़ियां चढ़ने पर सांस फूलने, बहुत ज्यादा प्यास लगने, वजन में अचानक बदलाव जैसी शिकायतों पर माता-पिता को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत होती है।
आइए जानते हैं कि किशोरों में कौन-कौन सी बीमारियों का जोखिम ज्यादा देखा जाता रहा है?