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महिलाओं और पुरुषों में होता है अलग-अलग तरह का डायबिटीज, ये होते हैं लक्षण

Mon, 22 Mar 2021 01:12 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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दोनों ही समूह में बार-बार होने वाली समस्याओं में अंतर पाया जाता है - फोटो : Pixabay

बहुत सारे लोगों के मन में सवाल रहता है कि क्या डायबिटीज जेंडर के अनुसार अपना काम करता है? इस सवाल का जवाब है, हाँ। एपिडेमियोलॉजी (महामारी विज्ञान) में यह बात सामने आई है कि दोनों ही समूह में इसके पूर्ण नियंत्रण और बार-बार होने वाली समस्याओं में अंतर पाया जाता है। महिलाओं तथा पुरुषों में एक तरफ सांस्कृतिक, पर्यावरण संबंधी तथा जीवनशैली से जुड़े कारण अंतर की वजह बनते हैं तो वहीं दूसरी तरफ अनुवांशिक तथा हॉर्मोन से जुड़े कारक इसकी वजह बनते हैं। टी2डीएम की समस्या कम उम्र में ही काफी आम हो गयी है। पुरुषों में बॉडी मास इंडेक्स, जबकि महिलाओं में मोटापा खतरे का मुख्य कारण बनता है। अगली स्लाइड्स में आरएनटी मेडिकल कॉलेज एवं हॉस्पिटल, उदयपुर की डॉ मोना डिंगरा से जानिए महिलाओं और पुरुषों में होने वाले डायबिटीज का अंतर।

 
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एक अस्वस्थ लाइफस्टाइल जीती हैं - फोटो : Social media

महिलाओं में सही तरीके से नहीं होता ग्लूकोज का नियंत्रण
कई सारे वैज्ञानिक अध्ययनों में यह बात सामने आयी है कि हर उम्र की महिलाओं में ग्लूकोज का नियंत्रण सही तरीके से नहीं होता, क्योंकि अपने परिवार की देखभाल करते हुए वे अक्सर अपनी सेहत को नजरअंदाज कर देती हैं। वहीं दूसरी तरफ कामकाजी महिलाएँ, सही तरीके से उपचार नहीं करवातीं और एक अस्वस्थ लाइफस्टाइल जीती हैं।

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अतिरिक्त बोझ की तरह महसूस होता है - फोटो : file photo

महिलाओं को लगने लगता है बोझ
डायबिटीज का सामना करने में महिलाएँ ज्यादा परेशान हो जाती हैं। उन्हें अपनी अन्य जिम्मेदारियों, करियर और परिवार के बीच यह एक अतिरिक्त बोझ की तरह महसूस होता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को डायबिटीज की वजह से दिल की बीमारियों का खतरा चार गुना ज्यादा होता है, जो कि पुरुषों में यह सिर्फ दोगुना है।

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गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज से लड़ना और भी कठिन हो जाता है - फोटो : social media

गर्भावस्था के दौरान आती हैं समस्याएं
महिलाओं में साथ ही डायबिटीज से जुड़ी अन्य परेशानियाँ जैसे कि अंधापन, किडनी संबंधी बीमारियाँ और डिप्रेशन का खतरा ज्यादा होता है। गर्भावस्था के दौरान डायबिटीज से लड़ना और भी कठिन हो जाता है, जिससे माँ और बच्चा दोनों प्रभावित होते हैं। टाइप 1 डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं में खानपान से जुड़ी गड़बड़ियां पाई जातीं हैं, जो आमतौर पर पुरुषों में नहीं पाई जातीं।

 

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डॉक्टर के पास जाने से कतराते हैं - फोटो : social media

डॉक्टर के पास नहीं जाते पुरुष
महिलाओं की तुलना में ज्यादातर पुरुषों में बीमारी का पता ही नहीं चल पाता, क्योंकि वे डॉक्टर के पास जाने से कतराते हैं। आमतौर पर वे अपने बीमार होने की बात मानने के लिये तैयार ही नहीं होते। कई सारे वैज्ञानिक अध्ययनों में यह बात सामने आयी है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में डायबिटीज टाइप 1 और टाइप 2 दोनों ही ज्यादा पाए जाते हैं।

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पुरुषों में टेस्टेस्टेरॉन का स्तर भी कम हो जाता है - फोटो : social media

पुरुषों को होता है यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन
डायबिटीज का सीधा असर पुरुषों की सेक्शुअल हेल्थ पर पड़ता है, जो उन्हें नपुंसकता की ओर ले जाता है। पुरुषों में डायबिटीज की समस्या का यही सबसे बड़ा अंतर है और लक्षणों की दृढ़ पहचान होती है। इसके साथ ही पुरुषों में टेस्टेस्टेरॉन का स्तर भी कम हो जाता है, मूत्र प्रतिधारण (पेशाब रोकना) में परेशानी होती है) और यूरीनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन (पेशाब की नली में संक्रमण) जैसी समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है।

 

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महिलाओं और पुरुषों का मनोविज्ञान अलग होता है - फोटो : सोशल मीडिया
इलाज का तरीका हो अलग
चूंकि, महिलाओं और पुरुषों का मनोविज्ञान अलग होता है, इसलिये डायबिटीज से जुड़ी उनकी समस्याओं का चिकित्सकीय तथा गैर-चिकित्सकीय इलाज अलग तरीके से करने की जरूरत होती है। गैर-चिकित्सकीय तरीकों में सही भोजन, नियमित व्यायाम और समस्याओं की सही देखभाल शामिल है।
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