भारतीय आबादी में जिन क्रॉनिक बीमारियों के मामले सबसे तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं, उनमें डायबिटीज प्रमुख है। हाई ब्लड शुगर वाली ये समस्या यहां जिस गति से लोगों को अपना शिकार बनाती जा रही है, इसे देखते हुए भारत को 'डायबिटीज कैपिटल' कहा जाने लगा है। डायबिटीज सिर्फ खून में ग्लूकोज बढ़ने की समस्या नहीं है। धीरे-धीरे ये स्थिति आपकी आंखों, किडनी, लिवर, पाचन तंत्र और रोग प्रतिरोधक क्षमता सभी को नुकसान पहुंचाने लगती है।
आंकड़े बताते हैं कि भारत में डायबिटीज एक बड़ी महामारी बनती जा रही है।
- विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में एक अनुमान के मुताबिक 18 साल से ज्यादा उम्र के 77 मिलियन (7.7 करोड़) लोग टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित हैं।
- लगभग 2.5 करोड़ लोग प्रीडायबिटिक हैं जिन्हें भविष्य में डायबिटीज होने का ज्यादा खतरा है।
- 50% से ज्यादा लोगों को अपनी डायबिटिक स्थिति के बारे में पता नहीं है, जिससे अगर इसका जल्दी पता लगाकर इलाज न किया जाए तो स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं।
- डायबिटीज वाले वयस्कों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा दो से तीन गुना ज्यादा होता है।
डायबिटीज की बीमारी न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ा रही है, साथ ही इसके कारण आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है।