निपाह का शरीर पर क्या असर होता है?
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7. निपाह वायरस की मृत्यु दर काफी अधिक मानी जाती है, जो लगभग 40 से 70 प्रतिशत तक हो सकती है। ग्रामीण और कम संसाधन वाले इलाकों, जहां समय पर रोग की पहचान और इलाज नहीं हो पाती है वहां पर खतरा और बढ़ जाता है।
8. फिलहाल निपाह वायरस का कोई विशेष विशेष इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। मरीज का इलाज लक्षणों के आधार पर किया जाता है, जिसमें बुखार नियंत्रित करना, सांस की मदद और आईसीयू सपोर्ट शामिल है। गंभीर मामलों में वेंटिलेटर की जरूरत पड़ सकती है। समय पर पहचान और सही देखभाल से मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ सकती है।
9. निपाह वायरस से बचाव ही सबसे कारगर तरीका है। खुले में रखे फल खाने से बचें और अच्छी तरह धोकर ही फल का सेवन करें। जिन इलाकों में निपाह के मामले सामने आए हों, वहां लोगों को खास सावधानी बरतनी चाहिए। चमगादड़ों के रहने के स्थान या बीमार जानवरों से दूरी बनाए रखें।
10. निपाह का संक्रमण किसी को भी हो सकता है, हालांकि जिनकी इम्युनिटी कमजोर होती है उनमें रोग का खतरा अधिक हो सकता है। अगर किसी व्यक्ति में तेज बुखार, सिरदर्द, उल्टी, सांस की तकलीफ या मानसिक भ्रम जैसे लक्षण दिखें और वह निपाह प्रभावित क्षेत्र में रहा हो, तो तुरंत उससे दूरी बनाए रखें और उसे डॉक्टर के पास भेजें।
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