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बड़ी राहत: कोरोना के खिलाफ प्रभावी इस दवा के इस्तेमाल को मिली मंजूरी, संक्रमितों की जान बचाने में है कारगर

Sat, 08 May 2021 06:46 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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कोरोना के नए दवा को मंजूरी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
देश में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। फरवरी से भारत में आई वायरस की दूसरी लहर में संक्रमितों के साथ मौत के आंकड़े में भी बढ़ोतरी देखी गई  है। डॉक्टर तमाम प्रयासों के माध्यम से लोगों की जान बचाने की कोशिश कर रहे हैं। हालिया दिनों में संक्रमण के गंभीर रोगियों के लिए देश में रेमेडिसविर और फेवीफ्लू जैसी दवाइयों की मांग तेजी से बढ़ी है। हालांकि दवाइयों की उपलब्धता इतनी कम है कि लोगों के लिए इसका मिल पाना भी कठिन हो रहा है।
इस बीच शनिवार को कोरोना संक्रमितों के लिए एक बेहद राहत वाली खबर आई है। ड्रग्स कंट्रोलर ने रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा बनाई कोरोना की एक दवा को आपात इस्तेमाल के लिए मंजूरी दे दी है। परीक्षणों में विशेषज्ञों को इस दवा के प्रयोग के सफल परिणाम देखने को मिले हैं। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।


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2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) दवा के आपात इस्तेमाल को मंजूरी - फोटो : Pixabay
देश में रेमेडिसविर और फेवीफ्लू जैसी दवाइयों की भारी किल्लत के बीच डीआरडीओ द्वारा तैयार की गई इस दवा को विशेषज्ञ वरदान के रूप में देख रहे हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंसेज (इनमास) और डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज, हैदराबाद ने मिलकर 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) नामक इस कोरोना-रोधी दवा को तैयार किया है। ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीजीसीआई) ने इस दवा के इमरजेंसी इस्तेमाल को मंजूरी दे दी है।
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कोरोना संक्रमितों में काफी फायदेमंद मानी जा रही है दवा - फोटो : iStock
परीक्षणों में दिखे बेहतर परिणाम
दवा के तीसरे चरण के परीक्षणों में वैज्ञानिकों ने पाया कि इसका इस्तेमाल अस्पताल में भर्ती मरीजों की सेहत में तेजी से सुधार करने में काफी कारगर हो सकता है। इसके अलावा यह गंभीर मरीजों की मेडिकल ऑक्सीजन पर निर्भरता को भी कम करने में भी सहायक है। महामारी के खिलाफ तैयारियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर डीआरडीओ ने अप्रैल 2020 में इस दवा को विकसित करने की पहल शुरू की थी।

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दवा को विशेषज्ञों ने पाया काफी असरदार - फोटो : Pixabay
वायरस को बढ़ने से रोकती है दवा
इनमास ने हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (सीसीएमबी) की मदद से यह प्रयोग शुरू किया था। विशेषज्ञों ने पाया कि यह दवा सार्स-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ प्रभावी ढंग से काम करने के साथ वायरस को शरीर में बढ़ने से रोकने में काफी मददगार साबित हो सकती है। 
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फेज 3 के ट्रायल में दिखे बेहतर परिणाम - फोटो : Pixabay
सफल रहे हैं सभी चरण के परीक्षण
मई से लेकर अक्टूबर 2020 के बीच दवा के दूसरे चरण के परीक्षणों में वैज्ञानिकों ने इसे कोविड-19 रोगियों के लिए सुरक्षित पाया था। इतना ही नहीं मरीजों की रिकवरी में भी इसके प्रभावी परिणाम देखने को मिले थे। दवा के पहले और दूसरे चरण के सफल परीक्षणों के आधार पर डीसीजीआई ने नवंबर 2020 में इसके तीसरे चरण के नैदानिक परीक्षणों की मंजूरी दी थी। देश के 27 अस्पतालों में 220 रोगियों पर दिसंबर 2020 से लेकर मार्च 2021 के बीच दवा के तीसरे चरण के परीक्षणों को संपन्न किया गया। विशेषज्ञों को दवा के इस्तेमाल के सफलतम परिणाम देखने को मिले हैं। 
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कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच इस दवा को माना जा रहा है वरदान - फोटो : iStock
विशेषज्ञ मान रहे हैं वरदान
स्वास्थ्य अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि यह दवा पाउडर के रूप में उपलब्ध होगी जिसे पानी में घोलकर इस्तेमाल किया जा सकेगा। शरीर में पहुंचते ही यह दवा संक्रमित कोशिकाओं में जमा होकर वायरस को शरीर में बढ़ने से रोकने में मदद करेगी। यही गुण इस दवा को खास बनाती है। देश में कोरोना मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या और ऑक्सीजन की कमी के कारण हो रही मौतों के बीच इस दवा को विशेषज्ञ वरदान के रूप में देख रहे हैं। 

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स्रोत और संदर्भ: 
DCGI approves anti-COVID drug developed by DRDO for emergency use
https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1717007

अस्वीकरण नोट:  यह लेख  रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (डीआरडीओ)  द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के  आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। अध्ययन में बताई गई किसी भी दवा या उपचार के लिए अमर उजाला दावा नहीं करता है, आपके लिए डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
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