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Depression Treatment: जानिए क्या है डिप्रेशन, इसके लक्षण और इलाज

Thu, 16 Mar 2023 11:40 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डिप्रेशन - फोटो : pixabay
डॉ. राजन गांधी
फिजिशियन
अनुभव- 25 साल

Medically Reviewed by Dr. Rajan Gandhi


एक पुरानी कहावत है कि स्वस्थ तन में स्वस्थ मन बसता है। लेकिन क्या आपने इस बात पर गौर किया है कि मन स्वस्थ हो तो तन को भी स्वस्थ रहने में मदद मिलती है। यानी ये दोनों चीजें एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। जबकि अक्सर यह होता है कि मन की सेहत को लेकर या तो हम उदासीन रवैया अपना लेते हैं या फिर इसे शर्मिंदगी बनाकर छुपाने लगते हैं। जिस तरह बुखार आने पर दवाई लेकर समस्या पर काबू पाया जाता है, उसी तरह मन के बीमार होने पर भी इलाज लेना जरूरी है। हम भारतीयों में खासकर मानसिक स्थितियों को लेकर बहुत सारी भ्रांतियां हैं। किसी भी दिमागी स्थिति को हम सीधे पागलपन का खिताब दे देते हैं, अंधविश्वास के चलते झाड़-फूंक करवा लेते हैं लेकिन सायकायट्रिस्ट या काउंसलर के पास जाने से डरते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि दिमागी समस्याओं को हम बीमारी मानते ही नहीं। इन्हें वहम मानकर चलते हैं। डिप्रेशन जैसी स्थितियां जो सही इलाज से बिल्कुल सामान्य हो सकती हैं, वे बिगड़ कर गम्भीर स्तर तक पहुंच जाती हैं। देश के बड़े भाग में आज भी सायकायट्रिस्ट या काउंसलर के पास जाना क्या उनका नाम लेना भी अच्छा नहीं माना जाता। डिप्रेशन की स्थिति में भी ऐसा ही होता है।
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डिप्रेशन - फोटो : पिक्साबे
डिप्रेशन का इलाज चाहिए: 

डिप्रेशन की समस्या नई नहीं है। लेकिन इस समस्या को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है। लोगों को लगता है इसे तूल देने की क्या जरूरत, बस इसकी तरफ से ध्यान हटा दो, ये ठीक हो जायेगा। क्योंकि डिप्रेशन विप्रेशन कुछ नहीं होता। रिसर्च यह साबित कर चुकी हैं कि यदि डिप्रेशन की स्थिति को समझते ही मरीज को इलाज मिल जाये तो आत्महत्या जैसी घटनाओं को बड़े पैमाने पर रोका जा सकता है। लेकिन होता अक्सर इसका उल्टा है। वर्तमान में कुछ प्रतिशत लोग इस समस्या को लेकर जागरूक तो हुए हैं लेकिन वे भी कई सारी भ्रांतियों में जकड़े हुए हैं। इसलिए जरूरी है कि सही जानकारी रखें और असमंजस में न पड़ें। इन कुछ बातों का ध्यान रखें।
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डिप्रेशन - फोटो : Pixabay
डिप्रेशन कल्पना नहीं है:

असल में यह सच्चाई से बचने का बहाना भर है। जबकि सच यह है कि डॉक्टर जब ब्रेन की स्कैनिंग करते हैं तो डिप्रेशन के मरीजों में नर्व्स तक सिग्नल्स जाने वाले ब्रेन के कैमिकल्स असंतुलित दिखाई देते हैं। इसलिए डिप्रेशन को कल्पना मानकर खारिज न करें। 

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डिप्रेशन - फोटो : pexels
जबरन न थोपें कोई एक्टिविटी: 

व्यस्तता कई बार डिप्रेशन के मामले में मददगार साबित हो सकती है। खासकर किसी रचनात्मक कार्य में व्यस्तता। लेकिन जरूरत से अधिक व्यस्तता भी मुश्किल खड़ी कर सकती है। किसी सामाजिक कार्य या कला की किसी गतिविधि से जुड़ जाना डिप्रेशन के शुरुआती या माइल्ड केसेस में सहायक हो सकती है लेकिन क्रॉनिक डिप्रेशन में हो सकता है कि डॉक्टर कुछ समय व्यस्त न रहने की सलाह भी दें। कई बार खुद को बहुत काम मे झोंक लेना भी क्लीनिकल डिप्रेशन का लक्षण हो सकता है। ऐसे में मरीज के और अधिक अकेले और हताश हो जाने की आशंका भी बढ़ सकती है। विशेषकर डिप्रेशन से ग्रसित पुरुषों में यह एक आम लक्षण है क्योंकि वे अपनी तकलीफ आसानी से कह और बांट भी नहीं पाते। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डिप्रेशन किसी को भी हो सकता है:

लोग आमतौर पर एक धारणा बनाकर चलते हैं कि डिप्रेशन तो उसी को होगा जो किसी दुख से गुजरा हो लेकिन ऐसा नहीं है। कई बार सारे साधन और खुशियां होते हुए भी व्यक्ति किसी भावनात्मक उथल-पुथल से गुजर सकता है। हम आये दिन अखबारों में किसी सेलिब्रिटी या अमीर व्यक्ति के बारे में पढ़ते हैं कि उन्होंने डिप्रेशन की वजह से जान दे दी। डिप्रेशन ऐसी स्थिति है जो किसी भी उम्र या वर्ग के महिला-पुरुष किसी में भी हो सकती है। यहां तक कि बच्चों में भी। यही नहीं यह कई बार अनुवांशिक भी हो सकता है। 
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depression - फोटो : social media
अलग हो सकते हैं डिप्रेशन के लक्षण:

डिप्रेशन के लक्षण भी सब में समान हों जरूरी नहीं। केवल दुखी दिखना, रोना, हताश दिखना ही लक्षण नहीं हैं। चिड़चिड़ाहट, गुस्सा, खीज, एकाग्रता का न होना, बहुत ज्यादा खाने लगना या खाना बंद कर देना, अकेले रहना पसंद करना या बेवजह उत्साह दिखाना या एकदम चुप्पी साध लेना भी डिप्रेशन का लक्षण हो सकता है। हो सकता है कि जो व्यक्ति आपको ऊपर से बिल्कुल सामान्य लग रहा हो वह अंदर से बहुत उथल-पुथल से गुजर रहा हो। 
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डिप्रेशन - फोटो : iStock
सहयोग करें, साथ दें: 

डिप्रेशन से बाहर आने के लिए मरीज का इलाज तो जरूरी है ही। यह भी जरूरी है कि उसे अपने आस पास स्वस्थ और सकारात्मक माहौल मिले। मरीज की स्थिति को समझने वाले दोस्तों, परिचितों या परिवार के साथ समय गुजारना, बातचीत करना, नियमित एक्सरसाइज और पोषक खान-पान जारी रखना, काउंसिलिंग सेशंस को नियमित रखना और पूरा इलाज लेना, साथ ही खुद पर विश्वास जगाना, इस समस्या से बाहर आने में चमत्कारी साबित हो सकते हैं। इसलिए जब भी किसी व्यक्ति में कोई लक्षण दिखे तो उसकी ओर मदद का हाथ बढ़ाएं, क्या पता आप एक अनमोल जीवन बचाने में योगदान दे सकें।

नोट: डॉ. राजन गांधी अत्याधिक योग्य और अनुभवी जनरल फिजिशियन हैं। इन्होंने कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से अपना एमबीबीएस पूरा किया है। इसके बाद इन्होंने सीएच में  डिप्लोमा पूरा किया। फिलहाल यह आईसीएचएच से वह उजाला सिग्नस कुलवंती अस्पताल में मेडिकल डायरेक्टर और सीनियर कंसल्टेंट फिजिशियन के तौर पर काम कर रहे हैं। यह आईएमए (इंडियन मेडिकल एसोसिएशन) के आजीवन सदस्य भी हैं। डॉ. राजन गांधी को इस क्षेत्र में 25 साल का अनुभव है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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