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Depression Symptoms: फोकस करने में होती है दिक्कत, कहीं आप अवसाद के शिकार तो नहीं?

Sat, 12 Jul 2025 02:45 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अक्सर कुछ लोग अवसाद जैसी समस्या से परेशान रहते हैं, लेकिन वे समझ नहीं पाते हैं। ऐसे में अगर समय रहते शुरुआती लक्षण पर ध्यान नहीं दिया गया, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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अवसाद की समस्या - फोटो : Freepik.com
Depression Symptoms: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, जहां हर तरफ प्रतिस्पर्धा और काम का दबाव है, अवसाद एक ऐसी गंभीर मानसिक स्वास्थ्य स्थिति बनकर उभरा है जो चुपचाप हमारे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों को खोखला कर रही है। यह सिर्फ मन का उदास होना नहीं, बल्कि एक जटिल बीमारी है जो व्यक्ति के सोचने, महसूस करने और काम करने के तरीके को बुरी तरह प्रभावित करती है। तनाव, अकेलापन और काम का दबाव जैसी आधुनिक जीवनशैली की चुनौतियां इस समस्या को और भी गहरा कर रही हैं।

भारत में लाखों लोग इस गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, फिर भी इसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है या सिर्फ "मन की कमजोरी" मान लिया जाता है। फोकस करने में दिक्कत, लगातार उदासी और हर समय थकान महसूस करना जैसे लक्षण अवसाद के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। यह जरूरी है कि हम इन संकेतों को समय रहते पहचानें और गंभीरता से लें। इसलिए आइए इस लेख में हम अवसाद के कुछ प्रमुख लक्षणों और इससे बचाव के प्रभावी उपायों के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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मानसिक तनाव होना - फोटो : Freepik.com
अवसाद के प्रमुख लक्षण
अगर आपको किसी भी काम में ध्यान लगाने में दिक्कत हो रही है, तो यह अवसाद (डिप्रेशन) का एक बड़ा लक्षण हो सकता है। असल में दिमाग में कुछ रसायनों के असंतुलन के कारण हमारी एकाग्रता और सही फैसले लेने की शक्ति कम हो जाती है।

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अवसाद के लक्षण - फोटो : Freepik.com
इसके अलावा, डिप्रेशन में आपको लगातार उदासी, निराशा या खालीपन महसूस हो सकता है। हर वक्त थकान बनी रहती है और जिन चीजों में पहले मजा आता था, उनमें भी रुचि खत्म होने लगती है। नींद भी प्रभावित होती है, या तो नींद नहीं आती (अनिद्रा) या फिर बहुत ज्यादा नींद आती है। खाने की आदतें भी बदल जाती हैं, कुछ लोग कम खाते हैं तो कुछ ज्यादा खाने लगते हैं। कुछ गंभीर मामलों में चिड़चिड़ापन, खुद को दोषी मानना, या आत्महत्या के विचार तक आ सकते हैं। अगर ये लक्षण दो हफ्ते से ज्यादा समय तक बने रहें, तो यह अवसाद का संकेत हो सकता है और ऐसे में आपको तुरंत किसी मनोवेज्ञानिक की मदद लेनी चाहिए।

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अवसाद - फोटो : Freepik.com
अवसाद के कारण
अवसाद के कई कारण हो सकते हैं, जैसे तनाव, पारिवारिक समस्याएं, नौकरी का दबाव, या आर्थिक तंगी। अनुवांशिकता भी एक भूमिका निभाती है; अगर परिवार में किसी को अवसाद रहा हो, तो जोखिम बढ़ता है। हार्मोनल असंतुलन, जैसे थायरॉइड या मेनोपॉज, और विटामिन D की कमी भी इसे ट्रिगर कर सकती है। शराब या ड्रग्स का सेवन भी अवसाद के जोखिम को बढ़ा देता है।
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अवसाद - फोटो : Freepik.com
बचाव और प्रबंधन के उपाय
अवसाद से बचाव के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं। नियमित व्यायाम, जैसे योग, ध्यान, या टहलना, सेरोटोनिन और एंडोर्फिन जैसे मूड बेहतर करने वाले हार्मोन को बढ़ाता है। संतुलित आहार, जिसमें ओमेगा-3, विटामिन B12, और विटामिन D युक्त खाद्य पदार्थ (मछली, नट्स, हरी सब्जियां) शामिल हों, मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है। दोस्तों और परिवार से बातचीत और सामाजिक जुड़ाव तनाव को कम करता है। पर्याप्त नींद (7-8 घंटे) और तनाव प्रबंधन तकनीक, जैसे गहरी सांस लेना, भी मददगार हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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