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Alert: डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया का बढ़ा खतरा, जानिए इन बीमारियों के लक्षण और इनसे बचाव के तरीके

Thu, 25 Aug 2022 04:49 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियां - फोटो : iStock
देश में मानसून काल समाप्ति की ओर है, कुछ ही दिनों में शरद ऋतु की शुरुआत हो जाएगी। पोस्ट मानसून का यह समय यानी कि अगस्त के मध्य से लेकर अक्टूबर के महीने में देश में हर साल मच्छर जनित कई तरह की गंभीर बीमारियों का कहर देखने को मिलता रहा है। इन महीनों में मच्छरों के कारण होने वाले डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया बुखार के चलते अस्पतालों में भारी भीड़ देखने को मिलती है। हर साल मच्छर जनित इन बीमारियों के कारण हजारों लोगों की मौत हो जाती है। हालिया रिपोर्टस बताते हैं कि अस्पतालों में फिर से डेंगू के मरीज आने शुरू हो गए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों से विशेष बचाव करते रहने की अपील कर रहे हैं।

डॉक्टर्स कहते हैं,  मच्छरों के काटने से होने वाली बीमारियां जानलेवा हो सकती हैं, ऐसे में सभी लोगों के लिए इस मौसम में बचाव के लिए उपाय करते रहना आवश्यक है।

डेंगू जैसी बीमारियों में तेजी से ब्लड प्लेटलेट्स काउंट कम होने लगते हैं जिसके कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम हो सकता है। इस तरह के खतरे से बचे रहने के लिए मच्छरों से बचाव करना आवश्यक है। आइए इन तीनों बीमारियों के बारे में विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि इनसे बचाव के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?
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डेंगू बुखार के बढ़ते मामले - फोटो : iStock
डेंगू के लक्षण और गंभीरता

डेंगू बुखार एडीज मच्छरों के काटने से होता है। डेंगू के मच्छर ज्यादातर दिन के समय में काटते हैं। संक्रमित मच्छर के काटने से लक्षण नजर आने (इनक्यूबेशन पीरियड) में 5-7 दिन लग सकते हैं। जिन लोगों में डेंगू संक्रमण का निदान होता है ऐसे लोगों को तेज बुखार (105º F तक) के साथ मांसपेशियों और जोड़ों में तेज दर्द, गंभीर सिरदर्द, छाती, पीठ या पेट पर लाल चकत्ते होने और मतली-उल्टी और दस्त की दिक्कत हो सकती है।

डेंगू की गंभीर स्थितियों में ब्लड प्लेटलेट्स तेजी से कम होने लगता है जिसमें त्वरित उपचार की आवश्यकता होती है। 
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चिकनगुनिया के कारण तेज बुखार की समस्या - फोटो : istock
चिकनगुनिया बुखार के बारे में जानिए

चिकनगुनिया भी डेंगू की ही तरह मच्छरों के काटने के कारण होने वाली गंभीर समस्या है। संक्रमित मादा एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से इंसानों में इसका खतरा होता है।  इस बीमारी की पुष्टि केवल रक्त परीक्षण करके की ही जा सकती है, वर्तमान में इसके लिए कोई टीका उपलब्ध नहीं है। यदि आपमें इससे संबंधित लक्षण 3-4 दिनों तक बने रहते हैं तो किसी विशेषज्ञ से सलाह लेकर परीक्षण अवश्य करा लेना चाहिए।

चिकनगुनिया का इनक्यूबेशन पीरियड 2-6 दिनों का होता है। इस संक्रमण में रोगी को तेज बुखार (104 डिग्री फारेनहाइट तक) के साथ अंगों पर वायरल चकत्ते, जोड़ों में तेजदर्द, सिरदर्द, भूख न लगने जैसी दिक्कत बनी रहती है। कुछ लोगों को चिकनगुनिया से ठीक होने के कई महीनों बाद तक भी जोड़ों के दर्द की समस्या बनी रह सकती है।

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मलेरिया से बचाव के लिए क्या करें? - फोटो : iStock
मलेरिया बुखार से बचाव

मलेरिया एक गंभीर और घातक बीमारी है, जो संक्रमित एनोफिलीज मच्छर के काटने से होती है। जिन लोगों को मलेरिया होता है, उन्हें आमतौर पर तेज बुखार, कंपकंपी या ठंड लगने और फ्लू जैसी बीमारी के लक्षण महसूस होते रह सकते हैं। एक बार जब कोई व्यक्ति मलेरिया से संक्रमित हो जाता है, तो इसके परजीवी लिवर में और फिर लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) में बढ़ना शुरू कर देते हैं जिसके कारण गंभीर दिक्कतों का जोखिम हो सकता है।

मलेरिया की समय पर पहचान और इलाज की आवश्यकता होती है, वरना लक्षणों के गंभीर रूप लेने का खतरा हो सकता है। सामान्यतौर पर 21 दिनों तक इस बीमारी का उपचार चलता है।
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मच्छरों के काटने से बचाव करना जरूरी - फोटो : Istock
मच्छर जनित इन बीमारियों से कैसे बचें?

डेंगू और चिकनगुनिया एडीज मच्छरों द्वारा फैलते हैं, ये मच्छर दिन में सक्रिय होते हैं जबकि एनोफिलीज मच्छर रात में अधिक काटते  हैं। इसका मतलब है कि मच्छरों से बचाव करके इन बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है। इसके लिए कुछ बातों का ध्यान रखना विशेष आवश्यक हो जाता है। 
  • पूरी बाजू की शर्ट और पैंट पहनें, जिससे मच्छरों से बचाव किया जा सके। 
  • जिन स्थानों पर डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया बुखार का संक्रमण है उन स्थानों पर जाने से बचें।
  • मच्छरों से बचाव के लिए दवाइयों या स्प्रे को प्रयोग में लाते रहें। 
  • रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करना सबसे सुरक्षित माना जाता है।
  • यदि आपको 3-4 दिनों से तेज बुखार की दिक्कत है तो डॉक्टर की सलाह पर खून की जांच जरूर करा लें, जिससे स्थिति का समय रहते सही निदान किया जा सके। 


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नोट:
यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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