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Dengue in Delhi: बच्चों में डेंगू के गंभीर मामलों का खतरा अधिक, माता-पिता ऐसे लक्षणों की समय रहते करें पहचान

Thu, 20 Jul 2023 01:48 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बच्चों में डेंगू का खतरा - फोटो : iStock
मानसून के इस मौसम में राजधानी दिल्ली सहित देश के कई राज्यों से मच्छरजनित डेंगू के मामले बढ़ने की खबर है। पिछले महीने की तुलना में दिल्ली-एनसीआर में डेंगू के मरीज बढ़े हैं। इस साल अब तक दिल्ली में करीब 165 लोगों में रोग की पुष्टि हो चुकी है। डॉक्टर कहते हैं, भारी बारिश के बाद जिस तरह की बाढ़ की स्थिति देखी जा रही है, इससे आशंका है कि आने वाले दिनों में मरीजों की संख्या में और बढ़ोतरी आ सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों के डेंगू से बचाव के लिए उपाय करते रहने की सलाह देते हैं। बच्चों में यह गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों का कारण बन सकता है।

इसी सप्ताह दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सौरभ भारद्वाज ने बताया कि राजधानी में बच्चों में डेंगू बुखार के मामले अधिक देखे जा रहे हैं। उन्होंने बच्चों को वेक्टर जनित बीमारियों से बचाने के लिए अधिकारियों को निर्देश भी दिए हैं।

दिल्ली स्वास्थ्य विभाग ने एक बयान में कहा कि मानसून की जल्द शुरुआत और बाढ़ जैसी स्थिति के कारण इस साल डेंगू जैसी वेक्टर जनित बीमारियों के मामलों में वृद्धि होने की आशंका है, जिसको लेकर सभी लोगों को सतर्कता बरतने की जरूरत है।
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बच्चों में डेंगू के हो सकते हैं गंभीर रोग - फोटो : iStock
बच्चों में हो सकता है गंभीर रोग का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन बच्चों में डेंगू की पुष्टि की जाती है उनमें गंभीर रोग विकसित होने का जोखिम अधिक हो सकता है। बच्चों में डेंगू के लक्षण भी वयस्कों की तुलना में थोड़े अलग होते हैं। बच्चों में उल्टी और पेटीसिया (त्वचा के नीचे रक्तस्राव) की समस्या अधिक होती है जबकि वयस्कों में मतली और आंखों के पीछे दर्द जैसे लक्षण अधिक आम हैं। समय रहते इन लक्षणों को पहचानना और इसका उपचार किया जाना बहुत आवश्यक हो जाता है।
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बच्चों में डेंगू के लक्षणों को जानिए - फोटो : iStock
बच्चों में किस तरह के देखे जाते हैं लक्षण?

डॉक्टर बताते हैं, बच्चों में प्लेटलेट्स कम होने का खतरा भी अधिक देखा जाता रहा है, यही कारण है कि उनमें गंभीर डेंगू रोग विकसित होने का जोखिम भी अधिक हो सकता है। अगर समय पर ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण शॉक लगने और आंतरिक रक्तस्राव की समस्या हो सकती है जो गंभीर मानी जाती है। इसलिए बच्चों में लक्षणों को समय पर पहचानना और इसका इलाज महत्वपूर्ण है।

गंभीर डेंगू की स्थिति में तेज बुखार के साथ पेट में तेज दर्द, मसूड़ों या नाक से खून आने, उल्टी या मल में खून आने, बेचैनी-सुस्ती या चिड़चिड़ापन की समस्या देखी जाती है। इसमें तुरंत जांच और आवश्यक उपचार जरूरी हो जाता है।

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डेंगू से बच्चों को रखें सुरक्षित - फोटो : Pixabay
बच्चों की कैसे करें देखभाल

अगर बच्चे में डेंगू की पुष्टि होती है तो घबराएं नहीं, अधिकांश संक्रमण हल्के होते हैं जो सामान्य उपचार द्वारा आसानी से ठीक किए जा सकते हैं। घर पर रोगी को पर्याप्त आराम करना चाहिए, ओआरएस और नारियल पानी सहित तरल पदार्थ देते रहें। बुखार और दर्द के लिए पेरासिटामोल का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

यदि बच्चे को रक्तस्राव की समस्या है या फिर प्लेटलेट्स कम हो रहे हैं तो अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत हो सकती है।
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डेंगू से बचाव के लिए करें उपाय - फोटो : Istock
मच्छरों के काटने से बचाव

डेंगू से बचाव के लिए जरूरी है कि वे सभी उपाय किए जाएं जो आपको मच्छरों के काटने से सुरक्षित रख सकते हैं। घर के आसपास पानी जमा न होने दें। मच्छरों को भगाने वाली दवाओं का छिड़काव करें। स्कूल भेजते समय बच्चों को पूरी आस्तीन के कपड़े पहनाएं और गंदगी वाली जगहों पर खेलने जाने से रोकें। रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। ये उपाय मच्छरजनित बीमारियों से बचाने में उपयोगी हो सकते हैं।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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