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Dengue In Delhi: डेंगू ने छह साल का तोड़ा रिकॉर्ड, इस बार गंभीर रोग का खतरा भी अधिक, बरतें सावधानी

Thu, 31 Aug 2023 07:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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राजधानी दिल्ली में डेंगू - फोटो : istock
पिछले कई वर्षों की तरह इस साल भी अगस्त-सितंबर के महीने में राजधानी दिल्ली में डेंगू के मामले तेजी से बढ़ते हुए देखे जा रहे हैं। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अस्पतालों में डेंगू मरीजों की संख्या बढ़ रही है, हालांकि ज्यादातर लोग आसानी से ठीक होकर घर लौट रहे हैं। गंभीर रोग का खतरा सिर्फ उन्हीं में देखा जा रहा है जो या तो कोमोरबिडिटी के शिकार हैं या फिर जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है।

इस बार दिल्ली में डेंगू के आंकड़े डराने वाले हैं। अगस्त के महीने के आखिर तक यहां डेंगू ने पिछले छह साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

इस साल 1 जनवरी से अगस्त 2023 के बीच रिपोर्ट किए गए 348 डेंगू मामलों की तुलना में, साल 2022 में इसी अवधि में 174 मामले, 2021 में 55 मामले, 2020 में 35 मामले, 2019 में 47 मामले और 2018 में 64 मामले दर्ज किए गए थे। अधिकारियों की तरफ से डेंगू को लेकर कोई हालिया रिपोर्ट जारी नहीं की गई है, लेकिन जिस प्रकार से अस्पतालों में भीड़ बढ़ रही है, वह चिंता बढ़ाने वाली है।
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डेंगू का घातक DEN-2 स्ट्रेन - फोटो : istock
डेंगू के संक्रामक स्ट्रेन का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान में दिल्ली में डेंगू का अत्यधिक संक्रामक और घातक DEN-2 स्ट्रेन देखा जा रहा है। डेन-2 स्ट्रेन से जुड़े लक्षण काफी हद तक डेंगू के अन्य सभी प्रकारों से मिलते-जुलते हैं, हालांकि इसके कारण गंभीर रोग विकसित होने का खतरा और रक्तस्रावी बुखार का जोखिम अधिक देखा जा रहा है।

यदि समय पर इसका निदान और इलाज न किया जाए तो मरीजों को शॉक लगने और रक्तस्राव के कारण होने वाली जटिलताओं का खतरा अधिक हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों डेंगू से बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहने की आवश्यकता है।
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डेंगू बुखार के मामले - फोटो : istock
DEN-2 स्ट्रेन बढ़ा सकता है जोखिम

डॉक्टर कहते हैं, डेंगू के मामले आमतौर पर सामान्य उपचार के जरिए आसानी से ठीक किए जा सकते हैं। हालांकि DEN-2 स्ट्रेन की प्रकृति के कारण वायरस के शरीर में प्रवेश करने के बाद यह तेजी से ब्लड प्लेटलेट काउंट को कम करने लगती है, जिसके कारण स्वास्थ्य जटिलताओं के बढ़ने का जोखिम रहता है। इसके कारण शॉक लगने और रक्तस्राव को जोखिम भी बढ़ जाता है जिसे डेंगू के गंभीर लक्षणों में से एक माना जाता है। 

गौरतलब है कि डेंगू एक मच्छर जनित वायरल संक्रमण है। यह वायरस मादा एडीसेजिप्टी मच्छरों के काटने से फैलता है, ये मच्छर दिन के समय में अधिक सक्रिय रहते हैं। डेंगू वायरस के चार सीरोटाइप (DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4) हैं। टाइप 2, जिसे DENV-2 के नाम से भी जाना जाता है, जो वर्तमान में दिल्ली तेजी से बढ़ रहा है, इसे सबसे गंभीर प्रकार वाला माना जाता है। 
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मच्छरों से करें बचाव - फोटो : Pixabay
डेंगू से बचाव के लिए करें प्रयास

डॉक्टर कहते हैं, डेंगू के जोखिमों को कम करने के लिए सबसे जरूरी है कि आप मच्छरों को काटने से बचाव के लिए प्रयास करें। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, घर के आसपास साफ-सफाई रखें और पानी एकत्रित न होने दें। साफ-स्थिर पानी में मच्छर पनपते हैं, इसलिए पानी को बदलते रहें। रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। इसके अलावा अगर 2-3 दिनों तक बुखार की समस्या है तो डॉक्टर से मिलकर इसकी जांच कराएं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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