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राहत: डेल्टा वेरिएंट को लेकर वैज्ञानिकों ने दी यह सुकूनभरी जानकारी, यहां जानिए सबकुछ विस्तार से

Sat, 26 Jun 2021 12:22 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना का नया वैरिएंट (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण की गंभीरता के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ डेल्टा वेरिएंट को मुख्य कारक के रूप में देख रहे हैं। वही डेल्टा वेरिएंट जो अब भारत ही नहीं, दुनियाभर के लिए बड़ी मुसीबत बन के उभर रहा है। डेल्टा वेरिएंट और इसके म्यूटेटेड 'डेल्टा प्लस वेरिएंट' को लेकर लोगों में खासा डर का माहौल देखा जा रहा है, कई रिपोर्टस में यह तक कहा जा रहा है कि डेल्टा प्लस वेरिएंट कोरोना की तीसरी लहर का कारण बन सकता है। हालांकि लगातार इस वेरिएंट को लेकर डर पैदा करने वाली जानकारियों के बीच कुछ विशेषज्ञों की बातें सुकून देने वाली हैं। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वेरिएंट के बारे में जिस तरह से लोगों को डराया जा रहा है, वह सही नहीं है। 
वैज्ञानिकों का कहना है कि डेल्टा स्ट्रेन के बारे में खबरों को सनसनीखेज तरीके से प्रसारित नहीं किया जाना चाहिए। डेल्टा स्ट्रेन काफी अधिक संक्रामक जरूर है लेकिन यह मूल वायरस की तरह ही फैलता है, इन विषयों के बारे में समझने की जरूरत है। डर के माहौल में इससे मुकाबला कर पाना लोगों के लिए आसान नहीं होगा। आइए जानते हैं दुनियाभर के तमाम वैज्ञानिक डेल्टा वेरिएंट के बारे में क्या बता रहे हैं?
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कोरोना का नया वेरिएंट डेल्टा प्लस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
क्या डेल्टा वेरिएंट भी एयरबोर्न है?
यूनिवर्सिटी ऑफ मेलबर्न के स्कूल ऑफ पॉपुलेशन एंड ग्लोबल हेल्थ के प्रमुख प्रोफेसर नैन्सी बैक्सटर कहती हैं, 'फ्लीटिंग कॉन्टैक्ट' एक सटीक डिस्क्रिप्टर है जो वायरस के एयरबोर्न प्रकृति को रेखांकित करता है। प्रोफेसर नैन्सी कहती हैं कि संक्रमित व्यक्ति के छींक या खांसी के माध्यम से वायरस हवा में जा सकता है, ऐसे में आसपास से गुजरने वाले किसी व्यक्ति के सांस लेने के माध्यम से यह उसके शरीर में प्रवेश कर जाता है। कोरोना के मूल रूप और डेल्टा वेरिएंट दोनों ही मामलों में ऐसा हो सकता है। ऐसे में डेल्टा वेरिएंट के बहुत अधिक एयरबोर्न होने की सूचनाओं से लोगों को डराना बंद किया जाना चाहिए।
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डेल्टा प्लस वेरिएंट को लेकर फैली है तमाम सूचनाएं (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
बहुत अलग नहीं है डेल्टा वेरिएंट
यूनिवर्सिटी ऑफ न्यू साउथ वेल्स के किर्बी इंस्टीट्यूट में जैव सुरक्षा अनुसंधान कार्यक्रम के प्रमुख प्रो. रैना मैकिनटायर कहते हैं, घर के भीतर भले ही एक समय में ज्यादा लोग न हों तो भी एयरबोर्न ट्रांसमिशन की संभावना रहती है। घर में यदि अच्छी वेंटिलेशन की व्यवस्था नहीं है और कोई व्यक्ति संक्रमित है तो वायरस कई घंटों तक कमरे में मौजूद रह सकता है। डेल्टा प्लस वेरिएंट के साथ भी वैसा ही है जैसे कोरोना के दूसरे वेरिएंट्स के साथ, इसलिए इससे घबराने से ज्यादा बचाव पर ध्यान देना चाहिए।

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बचाव ही एकमात्र उपाय (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
कितना संक्रामक है वायरस का नया रूप?
ला ट्रोब यूनिवर्सिटी में सहयोगी प्रोफेसर हसन वैली कहते हैं डेल्टा वेरिएंट भले ही अधिक संक्रामक माना जा रहा है पर इस वेरिएंट का प्रसार भी वैसे ही होता है जैसे इसके मूल रूप का होता आया है। यूके के आंकड़ों के अनुसार, अल्फा वेरिएंट की तुलना में घरेलू संपर्कों से डेल्टा वेरिएंट की संक्रामकता 60 फीसदी के करीब की है। वहीं अल्फा वेरिएंट के आंकड़े बताते हैं कि यह मूल कोरोना वायरस की तुलना में 43 से 90 तक अधिक संक्रामक हो सकता है। ऐसे में डेल्टा वेरिएंट की संक्रामकता को लेकर भी बहुत ज्यादा डरने की आवश्यकता नहीं है। 
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कोरोना वायरस के नए वेरिएंट्स को लेकर जानकारी आवश्यक (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
कैसे बच सकते हैं वायरस के इस रूप से?
ऑस्ट्रेलियन नेशनल यूनिवर्सिटी के एक वरिष्ठ शोधकर्ता डॉ मेरु शील कहते हैं, डेल्टा वेरिएंट से बचाव के लिए भी वही उपाय पर्याप्त हैं, जिन्हें अब तक प्रयोग में लाया जाता रहा है। इसको लेकर दुनियाभर में 'डरावनी कथा' बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। बेशक कोरोना के नए वेरिएंट्स सामने आ रहे हैं, इसमें से कुछ अधिक संक्रामक हो सकते हैं, कुछ कम। इसको लेकर समाज में डरावना नैरेटिव सेट करने से ज्यादा जनता को उनकी भूमिका निभाने के बारे में बताना जरूरी है। कोविड-19 से बचाव के उपायों को करने में कोई ढील न करें, मास्क पहनें, हाथों की साफ-सफाई का ध्यान रखें और लोगों से उचित दूरी बनाकर रखें। इन्हीं उपायों से कोरोना के इस नए रूप को भी हराया जा सकता है। इस लड़ाई में वैक्सीनेशन की भी महत्वपूर्ण भूमिका है, सभी लोगों को टीकाकरण जरूर कराना चाहिए।

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नोट: यह लेख दुनियाभर के तमाम वैज्ञानिकों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। कई अंतरराष्ट्रीय समाचार एजंसियों से इन बयानों को एकत्रित किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें तथा किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के न करें।
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