दुनियाभर में तेजी से फैल रहा कोरोना का डेल्टा वैरिएंट, स्वास्थ्य संगठनों के लिए गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के मुताबिक दुनिया के 96 से ज्यादा देशों में डेल्टा वैरिएंट के मामले सामने आ चुके हैं। दक्षिण अफ्रीका और यूनाइटेड किंगडम में इस वैरिएंट के कारण कोरोना के मामले फिर से तेजी से बढ़ने लगे हैं, इसके चलते कई देश दोबारा लॉकडाउन की तरफ बढ़ रहे हैं। डेल्टा वैरिएंट, जो म्यूटेशन के साथ डेल्टा प्लस में बदल गया है, उसे कोरोना के मूल अल्फा वैरिएंट की तुलना में 60 फीसदी अधिक संक्रामक माना जा रहा है। डेल्टा वैरिएंट को लेकर हो रहे तमाम शोध में वैज्ञानिक इसे कोरोना के अन्य वैरिएंट्स से कहीं ज्यादा खतरनाक और संक्रामक मान रहे हैं।
हाल ही में हुए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चेताया है कि इस वैरिएंट से संक्रमितों के अस्पताल में भर्ती होने का जोखिम दोगुना से अधिक हो सकता है। इतना ही नहीं डब्ल्यूएचओ ने अपने हालिया बयान में कहा है कि इस समय पूरी दुनिया 'बेहद खतरनाक दौर' से गुजर रही है, लोगों को इससे बचाव के लिए विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आइए इस लेख में जानते हैं कि वैज्ञानिक किन लोगों में डेल्टा वैरिएंट का खतरा अधिक देख रहे हैं?