डिमेंशिया रोग का खतरा
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बढ़ जाता है डिमेंशिया रोग का खतरा
वायु प्रदूषण किस तरह से हमारे दिमाग पर असर डालता है। इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों की टीम ने 51 से अधिक अध्ययनों की समीक्षा की।
- इसमें 2.9 करोड़ से ज्यादा लोगों के डेटा का इस्तेमाल किया गया। ये लोग कम से कम एक साल तक हवा में मौजूद प्रदूषकों के संपर्क में रहे थे।
- टीम ने पाया कि लंबे समय तक प्रदूषकों के संपर्क में रहने के कारण लोगों के दिमाग में ऐसे बदलाव देखे गए जो डिमेंशिया के खतरे को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।
अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन में पाया गया कि पीएम 2.5 का संपर्क किसी व्यक्ति में डिमेंशिया के जोखिमों को 17% बढ़ा सकता है। गाड़ियों के धुएं, पावर प्लांट और लकड़ी जलाने या और चिमनियों से होने वाला प्रदूषण हवा को गंभीर रूप से दूषित करता है। जिन शहरों में वायु गुणवत्ता लगातार खराब बनी रहती है, वहां लोगों में अल्जाइमर रोग-डिमेंशिया होने का खतरा अधिक देखा जाता है।
वायु प्रदूषण न्यूरोइन्फ्लेमेशन, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस, खून की नसों और दिमाग की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर डिमेंशिया का कारण बनता है। पीएम 2.5 जैसे बारीक कण फेफड़ों या नाक के जरिए दिमाग में जा सकते है, जिससे मस्तिष्क की कोशिकाओं में क्षति होने का जोखिम बढ़ जाता है।
लंबे समय तक प्रदूषकों के संपर्क में रहने वाले बच्चों में भविष्य में अल्जाइमर रोग होने का जोखिम, अन्य बच्चों की तुलना में अधिक देखा जाता रहा है।