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Delhi Air Pollution Survey: प्रदूषण के कारण 80% लोगों की बिगड़ी सेहत, 15% चले गए दिल्ली से बाहर

Fri, 28 Nov 2025 06:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दिल्ली-एनसीआर में 80 फीसदी से अधिक निवासियों को प्रदूषित हवा के कारण खांसी, गंभीर थकान और सांस लेने में जलन सहित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना किया।
  • 68% से अधिक लोगों को मेडिकल हेल्प की जरूरत पड़ी।
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प्रदूषण में सेहत पर प्रभाव - फोटो : Amar Ujala
राजधानी दिल्ली-एनसीआर में बीते एक महीने से जारी वायु प्रदूषण सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाता जा रहा है। हवा में बढ़े सूक्ष्म कण (पीएम 2.5) के स्तर को लेकर विशेषज्ञ सभी लोगों को सावधान कर रहे हैं। पीएम 2.5 के अधिक संपर्क में रहने के कारण सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर होने का खतरा रहता है।

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से पीएम 2.5 के कारण एक साल में 17 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी। साल 2010 की तुलना में 2022 में मौत के मामलों में 38 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई है।

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में कुछ दिनों से वायु की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार जरूर हुआ है पर अब भी ये चिंता का कारण है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने हवा गुणवत्ता में सुधार के संकेत दिखने के बाद राजधानी क्षेत्र में ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान के स्टेज III उपायों को बदला है। कमिटी ने बताया कि पिछले कुछ दिनों से दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) थोड़ा ठीक हुआ है और अब ये 320-330 के बीच बना हुआ है।

हालांकि दिल्ली में बीते कुछ दिनों से जैसे हालात थे, हालिया रिपोर्ट में उसके गंभीर दुष्प्रभाव देखे गए हैं। 
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वायु प्रदूषण की सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Freepik.com
प्रदूषण ने बढ़ाई सेहत की समस्याएं

स्माइटनपल्सएआई सर्वे की रिपोर्ट कहती हैं, दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के कारण 80 फीसदी से अधिक निवासियों ने खांसी, गंभीर थकान और सांस लेने में जलन सहित कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना किया। 68% से अधिक लोगों को मेडिकल हेल्प की जरूरत पड़ी। 

पिछले साल 68.3 प्रतिशत लोगों ने विशेष रूप से प्रदूषण संबंधी बीमारियों के लिए चिकित्सा सहायता मांगी थी, जो एक गंभीर स्वास्थ्य सेवा संकट बन रहा है। 
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वायु प्रदूषण के कारण बिगड़ती सेहत - फोटो : Freepik.com
सर्वे में क्या पता चला?

प्रदूषण के कारण लोगों के सामान्य जन-जीवन पर भी नकारात्मक असर देखा जा रहा है। सर्वे की रिपोर्ट कहती है कि दूषित होती हवा के कारण सर्वे में शामिल करीब 76.4 प्रतिशत लोगों ने बाहर समय बिताना काफी कम कर दिया है, जहरीली धुंध से बचने के लिए लोग घरों-ऑफिस के भीतर ज्यादा समय बिता रहे हैं।  

दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद में 4,000 निवासियों पर किए गए इस सर्वे की रिपोर्ट में यह भी पता चला कि 79.8% लोग या तो दूसरी जगह जाने के बारे में सोच रहे हैं या पहले ही जा चुके है। 15 प्रतिशत लोग दिल्ली से बाहर जाकर बस चुके हैं।

सर्वे करने वाली संस्था स्माइटनपल्सएआई के को-फाउंडर स्वागत सारंगी ने कहा, अध्ययन से पता चलता है कि लंबे समय तक खराब गुणवत्ता वाली हवा में रहने के कारण स्वास्थ्य तो गड़बड़ हो ही रहा है। इसके अलावा इस स्थिति ने स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च को भी बढ़ा दिया है। स्वागत सारंगी कहते हैं, यह अब सिर्फ पर्यावरणीय चिंता की बात नहीं है, बल्कि लाइफस्टाइल और जीवन की गुणवत्ता पर भी इसका नकारात्मक असर हो रहा है।
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प्रदूषण में रहने वालों की सेहत को खतरा - फोटो : adobe stock photos
क्रॉनिक बीमारियों और समय से पहले मौत का भी खतरा

अध्ययनों से पता चलता है कि पीए2.5 जैसे सूक्ष्म कण शरीर में सूजन इंफ्लेमेशन को बढ़ाते हैं जिसके कारण इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कत बढ़ जाती है। इससे ब्लड शुगर को नियंत्रित करना कठिन हो जाता है। प्रदूषण वाली हवा हमारे फेफड़ों पर एक दिन में 10-12 सिगरेट पीने के प्रभाव के बराबर है, जो समय के साथ कई तरह की दिक्कतें बढ़ा सकती है। इतना ही नहीं समय के साथ प्रदूषण के कारण मरने वालों की संख्या में भी वृद्धि देखी जा रही है।



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स्रोत
68 pc sought medical help, 85 pc face rising costs, says survey


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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