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Botulism: क्या ब्रोकली भी हो सकती है जानलेवा? 52 वर्षीय व्यक्ति की मौत के बाद इस देश ने वापस मंगाई सारी खेप

Thu, 14 Aug 2025 07:57 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • दक्षिणी इटली में ब्रोकली सैंडविच खाने के बाद एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ अन्य को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।  इसके बाद देशभर में ब्रोकली को वापस मंगाने का आदेश दिया गया है। आखिर ब्रोकली जानलेवा कैसे हो सकती है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
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ब्रोकली खाने से मौत का मामला! - फोटो : Freepik.com
फिटनेस फ्रीक और डाइट को लेकर अलर्ट रहने वालों के बीच ब्रोकली काफी पसंदीदा सब्जी रही है। ब्रोकली कई प्रकार के पोषक तत्वों जैसे विटामिन्स, खनिजों और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होती है। ये विटामिन सी और के, फोलेट, पोटैशियम और फाइबर का अच्छा स्रोत है। ब्रोकली में ऐसे यौगिक भी पाए जाते हैं जो कुछ प्रकार के कैंसर के जोखिमों को कम करने, शुगर को नियंत्रित करने और आंतों को स्वास्थ रखने में मदद कर सकते हैं। क्या आप सोच सकते हैं कि इतनी फायदेमंद ब्रोकली जानलेवा भी हो सकती है?

जी हां, ऐसा ही हुआ है। दक्षिणी इटली में ब्रोकली सैंडविच चीज खाने के बाद एक व्यक्ति की मौत हो गई और नौ अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 52 वर्षीय संगीतकार लुइगी डि सार्नो गुरुवार को कैलाब्रिया से छुट्टियां मनाकर अपने परिवार के साथ घर लौटते समय गंभीर रूप से बीमार पड़ गए। परिवार एक स्ट्रीट फूड वैन पर रुका था, जहां उन्होंने ब्रोकली सैंडविच खाया था। लुइगी की मौत के लिए विशेषज्ञों ने ब्रोकली को प्रमुख कारण माना है। इसके बाद देश भर में ब्रोकली को वापस मंगाने का आदेश दिया गया है।

पर आखिर ब्रोकली जानलेवा कैसे हो सकती है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
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बोटुलिज्म आउटब्रेक और इसके जानलेवा जोखिम - फोटो : Freepik.com
बोटुलिज्म को माना जा रहा है मौत का कारण

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्वास्थ्य अधिकारियों को संदेह है कि लुइगी ने जो सैंडविच खाया, उसमें इस्तेमाल की गई ब्रोकली दूषित थी। डॉक्टर्स ने माना कि लुइगी की मौत बोटुलिज्म के कारण हुई है, जो क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम बैक्टीरिया के कारण होने वाली समस्या है। 

बोटुलिज्म एक दुर्लभ लेकिन जानलेवा बीमारी है, जो तंत्रिका तंत्र पर अटैक करती है। इससे मांसपेशियों में लकवा और सांस लेने में तकलीफ हो सकती है। गंभीर स्थितियों में इससे मौत का भी जोखिम रहता है। 
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दूषित ब्रोकली से बोटुलिज्म का मामला - फोटो : Freepik.com
कैसे होती है बोटुलिज्म की समस्या?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बोटुलिज्म के तीन सामान्य रूप हैं। 
  • सबसे ज्यादा मामले खाद्य जनित बोटुलिज्म के होते हैं। डिब्बाबंद भोजन या किसी प्रकार के खान-पान की चीजों के क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम बैक्टीरिया से दूषित होने से इसका खतरा बढ़ जाता है। इन चीजों के सेवन से खतरनाक स्तर की विषाक्तता हो सकती है। 
  • यदि ये बैक्टीरिया किसी घाव में चले जाते हैं, तो वे खतरनाक संक्रमण पैदा कर सकते हैं, जिसके कारण गंभीर और जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं।
  • कई बार शिशुओं के आंत पथ में सी.बोटुलिनम बैक्टीरिया बढ़ना शुरू हो जाता है। यह आमतौर पर 2 महीने से 8 महीने के शिशुओं में होता है।

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बोटुलिज्म के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
संक्रमितों में क्या दिक्कतें होती हैं?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि संक्रमित खाद्य पदार्थों के कारण होने वाली बोटुलिज्म की समस्या के लक्षण मध्यम से लेकर गंभीर तक हो सकते हैं। ये इस पर निर्भर करता है कि शरीर में किस स्तर की विषाक्तता है? इस तरह के संक्रमण की स्थिति में आमतौर पर निगलने या बोलने में परेशानी, चेहरे के दोनों तरफ कमजोरी (लकवा), धुंधला या दोहरी दृष्टि, सांस लेने में तकलीफ के साथ पाचन की दिक्कतें जैसे मतली-उल्टी और पेट में ऐंठन हो सकती है।

शिशुओं में होने वाले संक्रमण की स्थिति में कब्ज, मांसपेशियों की कमजोरी, चिड़चिड़ापन, लार टपकने और लकवा की समस्या हो सकती है।
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भोजन को अच्छे से पकाकर ही खाने की सलाह - फोटो : Adobe stock
इससे बचाव के लिए क्या करें? 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, खाद्य पदार्थों के कारण होने वाले संक्रमण से बचने के लिए भोजन को सुरक्षित रूप से तैयार करें और इसका रखरखाव करें। खाद्य पदार्थों को अच्छे से पकाकर ही खाना चाहिए। यदि डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ का डिब्बा फूला हुआ हो या उसमें से दुर्गंध आ रही हो, तो उसे न खाएं। 

घाव के माध्यम से फैलने वाले संक्रमण से बचाव के लिए घावों को साफ रखें। वहीं शिशुओं को बोटुलिज्म से बचाने के लिए एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों को थोड़ी मात्रा में भी शहद देने से बचना चाहिए।


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स्रोत
Italy orders broccoli recall after botulism outbreak causes death


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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