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Sweet Cravings: हर समय मीठा खाने का मन करता है? कहीं शरीर में ये गड़बड़ी तो नहीं

Thu, 13 Aug 2026 06:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जब हम मीठी चीज खाते हैं तो शरीर को जल्दी उपलब्ध होने वाली ऊर्जा मिलती है। मीठा स्वाद दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को भी सक्रिय करता है, जिससे व्यक्ति को थोड़ी देर के लिए अच्छा महसूस हो सकता है। 
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मीठे की क्रेविंग - फोटो : Freepik.com
क्या आप भी मीठा खाने के शौकीन हैं? खाना खाने के कुछ देर बाद ही आपको मीठा खाने की तलब होने लगती है? अगर हां तो सावधान हो जाइए, ये एक आदत आपकी सेहत के लिए कई तरह की मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है। अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञ ज्यादा चीनी, मीठे पेय का सेवन कम से कम करने की सलाह देते हैं। इससे डायबिटीज, मोटापा, फैटी लिवर से लेकर कैंसर जैसी बीमारी होने का खतरा हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मीठा स्वाद हमारी जुबान को जितना खुश करता है, उतना ही ये आदत शरीर के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है। बार-बार मीठा खाने की आदत ऐसा चक्र भी बना देती है जिसमें दिमाग का रिवार्ड सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है। 

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, मीठे की क्रेविंग कई कारणों से हो सकती है। लंबे समय तक खाना न खाना, भोजन में पर्याप्त ऊर्जा या पोषण की कमी, तनाव, नींद की कमी भी मीठा खाने की आदत बढ़ाने वाली हो सकती है। क्या आप भी इस क्रेविंग से परेशान हैं?
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ज्यादा मीठा खाने से बचें - फोटो : Freepik.com
मीठी चीजें खाने की इच्छा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कभी-कभार मीठी चीजें खाने का मन करना सामान्य है, लेकिन अगर मीठे की इच्छा लगातार और इतनी तेज है कि आप उसे नियंत्रित नहीं कर पा रहे हैं या इसके कारण वजन और खानपान पर असर पड़ रहा है, तो इसके पीछे के कारण को समझना जरूरी है। 
 
  • ज्यादा मीठा खाने की इच्छा होने के साथ अगर बहुत ज्यादा प्यास लगने, बार-बार पेशाब आना, वजन कम होना और अत्यधिक थकान की समस्या बनी रहती है तो डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड ग्लूकोज की जांच कराना जरूरी है। कई बार प्रीडायबिटीज या फिर डायबिटीज की स्थिति में ये दिक्कत देखने को मिल सकती है।

नींद की कमी भी हो सकती है वजह

जब आप लंबे समय तक भोजन नहीं करते तो शरीर को तेज ऊर्जा देने वाले खाद्य पदार्थों की इच्छा हो सकती है। इसी वजह से लंबे गैप के बाद कई लोगों को मीठी चीजें खाने की ज्यादा इच्छा हो सकती है। मीठा पेय या चीनी वाली चीजें शरीर को ऊर्जा देती हैं, लेकिन इससे कुल कैलोरी भी बढ़ सकती है। इसके अलावा नींद की कमी, तनाव जैसी स्थितियों में भी आपकी मीठे की तलब बढ़ सकती है।
 
  • अगर आपको ज्यादा मीठे की क्रेविंग होती है, तो नींद के पैटर्न पर भी ध्यान देना चाहिए। 
  • अध्ययनों में नींद की कमी और हाई-कैलोरी खाद्य पदार्थों की तलब से संबंधित पाया गया है।
  • नींद की कमी के दौरान थकान और ऊर्जा की कमी महसूस होने पर शरीर जल्दी मिलने वाली ऊर्जा वाले खाद्य पदार्थों की तेज डिमांड करता है।
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स्ट्रेस में मीठा खाने का जोखिम - फोटो : Freepik.com
तनाव में मीठा खाने का मन क्यों करता है?

कई लोगों के लिए मीठी चीजें सिर्फ पसंद नहीं होती हैं,  मूड को ठीक करने वाली भी हो सकती हैं।
 
  • ऑफिस का तनाव, काम का दबाव, उदासी, अकेलापन या थकान जैसी स्थितियों में मीठा खाना कुछ समय के लिए आराम देने वाला अनुभव हो सकता है। 
  • हालांकि इससे हर तनावपूर्ण स्थिति के बाद मिठाई खाना एक पैटर्न बना सकता है। जो लंबे समय में डायबिटीज और मोटापा जैसी समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है। 
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मीठा खाने की इच्छा कैसे कम करें? - फोटो : Adobe stock photos
मीठे की क्रेविंग कैसे कम करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मीठे की क्रेविंग कम करने के लिए चीनी वाली चीजें से खुद को दूर रखना चाहिए। अगर आप लंबे समय तक भूखे रहते हैं  तो दिन के किसी समय तेज भूख और मीठे की इच्छा बढ़ सकती है। इसलिए नियमित और संतुलित भोजन करना जरूरी है।
 
  • भोजन में पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ, साबुत अनाज, सब्जियां और फल शामिल करें। 
  • विशेषज्ञ कहते हैं, चीनी वाली चीजें आपकी कुल दैनिक कैलोरी का 10 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। इस बात का ध्यान रखे।
  • मीठा खाने की इच्छा होने आप फल खा सकते हैं। इनमें प्राकृतिक शुगर के साथ फाइबर और दूसरे पोषक तत्व भी मिलते हैं।
  • अगर आपकी क्रेविंग ज्यादा हो रही है तो इस बारे में डॉक्टर से मिलना और जांच कराना भी जरूरी है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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