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अध्ययन में दावा: कोविड वैक्सीन ने रोकी भयावह त्रासदी, महामारी के दौरान बचाई 25 लाख से ज्यादा जिंदगियां

Fri, 01 Aug 2025 07:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हालिया शोध के अनुसार, कोविड वैक्सीन ने कुल 25.3 लाख लोगों की जान बचाई, जिनमें 90% से अधिक वे लोग थे जो 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के थे। अगर यह वैक्सीन न होती तो ओमिक्रॉन के चरम समय में दुनिया को और अधिक भयावह त्रासदी का सामना करना पड़ता।
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कोविड वैक्सीन की प्रभाविकता - फोटो : Freepik.com
साल 2019 के आखिरी के महीनों में पहली बार दुनिया को सार्स-सीओवी-2 वायरस (कोविड-19 रोग) के बारे में पता चला। देखते ही देखते अगले दो साल में ये वायरस पूरी दुनिया में फैल गया। वैज्ञानिकों की टीम ने आनन-फानन में वैक्सीन तैयार की, जिसने वायरस के प्रकोप को रोकने में काफी मदद की। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि महामारी के दौरान कोविड वैक्सीन ने 25 लाख से ज्यादा लोगों की जान बचाई है। 

इटली स्थित कैथोलिक यूनिवर्सिटी ऑफ द सेक्रेड हार्ट के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि हर 5,400 वैक्सीन खुराक पर एक कोविड-संबंधित मौत को टाला गया। ये आंकड़ा सिर्फ वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं है बल्कि वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा में वैक्सीन की अहम भूमिका का प्रमाण भी है।
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वैक्सीनेशन ने बचाई लाखों जिंदगियां - फोटो : Freepik.com
कोविड वैक्सीन ने बचाई लाखों जिंदगियां

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और यूनिवर्सिटा कैथोलिका डेल सैक्रो कुओरे का यह संयुक्त अध्ययन जामा हेल्थ फोरम में प्रकाशित हुआ है। शोध के अनुसार, कोविड वैक्सीन ने कुल 25.3 लाख लोगों की जान बचाई, जिनमें 90% से अधिक वे लोग थे जो 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के थे। अगर यह वैक्सीन न होती तो ओमिक्रॉन के चरम समय में दुनिया को और अधिक भयावह त्रासदी का सामना करना पड़ता।

अध्ययन से पता चलता है कि कोरोना से जिन लोगों की जान बची उनमें से लगभग 82% लोग ऐसे थे जिन्हें  संक्रमित होने से पहले टीका लगाया गया था। 57% मौतें अकेले ओमिक्रॉन काल के दौरान टाली गईं।

कुल मिलाकर, अध्ययन का अनुमान है कि कोविड के टीकों ने दुनियाभर में 1.48 करोड़ जीवन के वर्ष (इयर्स ऑफ लाइफ सेव्ड) बचा लिए। ये हर 900 खुराक पर बचाए गए जीवन के एक वर्ष के बराबर है।
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टीकाकरण के देखे गए अच्छे प्रभाव - फोटो : Freepik.com
कोविड वैक्सीन पर अब तक का सबसे व्यापक अध्ययन

अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ. एंजेलो मारिया पेजुल्लो और डॉ. एंटोनियो क्रिस्टियानो ने कहा, पिछले अध्ययनों में विभिन्न मॉडलों, समय-सीमाओं या क्षेत्रीय डेटा का उपयोग करके टीकों द्वारा बचाई गई जानों का अनुमान लगाने का प्रयास किया गया था। हालांकि, यह अध्ययन अब तक का सबसे व्यापक शोध है। इसमें वैश्विक आंकड़ों का उपयोग किया गया है साथ ही इसमें ओमिक्रॉन वैरिएंट के प्रसार की अवधि को भी शामिल किया गया है। 

विश्लेषण के लिए, शोधकर्ताओं ने वैश्विक जनसंख्या आंकड़ों की जांच की और समझने का प्रयास किया कि कितने लोग कोविड-19 से बीमार हुए (चाहे टीकाकरण से पहले या बाद मे) और ओमिक्रॉन अवधि के दौरान कितने लोग संक्रमित हुए या फिर उनकी मौत हुई।

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

डॉ. पेजुल्लो ने बताया, हमारे आंकड़े पहले के आकलनों से अधिक सटीक हैं, लेकिन यह निर्विवाद रूप से स्पष्ट है कि टीकाकरण ने वैश्विक स्तर पर लाखों जिंदगियां बचाईं। वैक्सीनेशन अब भी इस वायरस के प्रकोप को कम करने और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य जटिलताओं से बचाए रखने में सबसे जरूरी और प्रभावी तरीका है।

नए वैरिएंट्स के जोखिमों को कम करने के लिए कई टीकों के अपडेट भी आ चुके हैं, जिनका कई देशों में 60 साल से अधिक उम्र के लोगों पर इस्तेमाल भी किया जा रहा है। 
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संसद में स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा - फोटो : एक्स/एएनआई
वैक्सीन पर उठते रहे हैं सवाल 

इसके इतर कोविड वैक्सीन के दुष्प्रभावों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। कई रिपोर्ट्स में चिंता जताई गई थी कि संभवत: हार्ट अटैक के बढ़ते मामले वैक्सीनेशन से संबंधित हो सकते हैं। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि वैक्सीनेशन सुरक्षित है और इससे अचानक मौतों के बढ़े मामले का कोई संबंध नहीं है।

लोकसभा में 25 जुलाई को  केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा ने स्पष्ट किया कि कोविड वैक्सीनेशन के कारण वयस्कों में अचानक मृत्यु का जोखिम नहीं बढ़ा है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के हालिया अध्ययन की रिपोर्ट को कोट करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, वैक्सीनेशन और बढ़ते मृत्यु के मामलों के बीच कोई संबंध नहीं पाया गया है।



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स्रोत
Global Estimates of Lives and Life-Years Saved by COVID-19 Vaccination During 2020-2024



अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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