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Covid-19 Returns: सर्दी आते ही बढ़ने लगे केस, चीन में लॉकडाउन जैसे हालात, यूरोपीय देशों में एक और लहर की आशंका

Fri, 14 Oct 2022 03:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चीन सहित कई यूरोपीय देशों में बढ़े संक्रमण के मामले - फोटो : PTI
पिछले कुछ महीनों से स्थिर कोरोना संक्रमण के मामलों में एक बार फिर से उछाल देखा जा रहा है। चीन में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। शंघाई में कोविड के मामले तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं, हालात इस कदर बिगड़ रहे हैं कि स्थानीय प्रशासन ने स्कूल, जिम और बार को बंद करने का फैसला किया है। लोगों से कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवयर का सख्ती से पालन करने की अपील की गई है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक शहर में बुधवार को 47 नए संक्रमण के मामले रिकॉर्ड किए गए हैं, यह 13 जुलाई के बाद से सबसे अधिक है। 13 जुलाई को शंघाई में मामलों के बढ़ने के साथ प्रशासन ने एहतियातन कुछ स्थानों को बंद करने का फैसला किया था। 

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए शंघाई के कई स्कूलों ने एक बार फिर से फिजिकल क्लासेज को बंद करने का फैसला किया है। कुछ हिस्सों में सिनेमा, बार और जिम सहित मनोरंजन स्थलों को भी बंद कर दिया है। शंघाई में कोरोना के बढ़ते मामलों ने अन्य देशों को फिर से अलर्ट कर दिया है।

पिछले दो वर्षों की तरह एक बार फिर से अक्तूबर में संक्रमण बढ़ने के साथ फिर से सवाल खड़ा हो गया है कि क्या सर्दी का मौसम आते ही कोरोना के व्यापक रूप लेने का खतरा बढ़ जाता है? आइए  अन्य देशों में कोरोना संक्रमण की स्थिति के बारे में जानते हुए इसके संभावित खतरों के बारे में समझते हैं।
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कोरोना के नए वैरिएंट्स का खतरा - फोटो : Pixabay
चीन में बीएफ.7 और बीए.5.1.7 का प्रकोप

चीन के कई प्रांतों में ओमिक्रॉन के दो अत्यधिक संक्रामक सब-वैरिएंट्स बीएफ.7 और बीए.5.1.7 के मामले देखे जा रहे हैं। अध्ययनों में इन दोनों वैरिएंट्स की संक्रामकता दर काफी अधिक पाई गई है। इन वैरिएंट्स के जोखिम और इससे खतरों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने आने वाले कुछ महीनों, सर्दी के मौसम में चीन में संक्रमण बढ़ने की आशंका जताई है। चूंकि इन दोनों सब-वैरिएंट्स के मामले चीन के ज्यादातर हिस्सों से रिपोर्ट किए जा रहे हैं, ऐसे में शोधकर्ताओं ने लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की अपील की है।

रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) ने एक रिपोर्ट में बताया कि  बीए.5.1.7 ओमिक्रॉन के वैरिएंट बीए.5 का ही प्रकार है। वहीं बीएफ.7 के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका में भी पिछले दिनों 13 प्रतिशत से अधिक मामले दर्ज किए गए थे।
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कई देशों में बढ़ते कोरोना को लेकर अलर्ट - फोटो : पीटीआई
यूरोपीय देशों में भी बढ़ रहे हैं संक्रमण के मामले

चीन के साथ-साथ पिछले कुछ दिनों में यूरोप के भी कई हिस्सों में कोरोना के मामलों में उछाल देखने को मिली है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूरोपियन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ईसीडीसी) ने एक हालिया बयान में यूरोप में संक्रमण की एक और लहर को लेकर आंशका जताते हुए लोगों को सचेत रहने की अपील की है।

डब्ल्यूएचओ के यूरोप में निदेशक हैंस क्लूज और ईसीडीसी के निदेशक एंड्रिया अम्मोन ने एक संयुक्त बयान में कहा, कोरोना को लेकर जिस तरह से पहले डर की स्थिति थी फिलहाल अब वैसी तो नहीं है लेकिन कई हिस्सों में जिस तरह से संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं वह चिंता बढ़ाने वाली है। यह इस बात का भी सूचक है कि कोविड-19 महामारी अभी खत्म नहीं हुई है।"

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बढ़ रहे हैं कोरोना के मामले - फोटो : Pixabay
सर्दी आते ही बढ़ने लगते हैं कोरोना के मामले

पिछले करीब तीन साल से जारी कोरोना महामारी में देखा जाता रहा है कि संक्रमण के मामले सर्दी के मौसम की शुरुआत होते ही बढ़ने लगते हैं, आखिर कोरोना का मौसम से क्या संबंध है? इसे समझने के लिए किए गए अध्ययनों में फिलहाल कुछ खास स्पष्ट नहीं होता है, हालांकि अध्ययनकर्ताओं की एक टीम का कहना है कि तापमान गिरना इस प्रकार के वायरस के बढ़ने के लिए अनुकूल होता है। चीन में अक्तूबर-नवंबर में सर्दी की शुरुआत हो जाती है, एक बार फिर से इस मौसम में संक्रमण के मामलों में उछाल देखा जा रहा है।
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भारत में कोरोना संक्रमण को लेकर खतरा - फोटो : iStock
भारत में कैसे हैं कोरोना के हालात 

भारत में फिलहाल कोरोना की स्थिति की बात करें तो यहां मामला काफी हद तक कंट्रोल में नजर आ रहा है। पिछले 24 घंटे में देश में 2678 लोगों में संक्रमण की पहचान की गई है। डेली पॉजिटिविटी रेट अभी 1.13 फीसदी के करीब बनी हुई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से कई देशों में कोरोना के मामलों में उछाल देखा जा रहा है इसे लेकर लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। पिछले 2 साल से जिस तरह के अक्तूबर के महीने में संक्रमण की दर बढ़ती देखी जाती रही है इस खतरे को समझते हुए सभी लोगों को लगातार सावधानी के उपाय करते रहने चाहिए।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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