सर्दियों में कोरोना का खतरा
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दिसंबर में संक्रमण के बढ़ते मामले
सबसे पहले साल 2019 के आखिर में चीन में सार्स-सीओवी-2 वायरस से संक्रमण के पहला मामला सामने आया। कोरोना बिल्कुल नया था, जिसके कारण फरवरी-मार्च तक वैश्विक स्तर पर संक्रमण के मामले काफी तेजी से बढ़े। इसके बाद 2020 के दिसंबर तक वायरस में उत्परिवर्तन हुआ, जिसके बाद बीटा, गामा और डेल्टा वैरिएंट के कारण फिर से संक्रमण की रफ्तार में वृद्धि रिपोर्ट की गई। डेल्टा वैरिएंट को अब तक का सबसे संक्रामक और घातक माना जा रहा है, जिसके कारण दुनियाभर में मौत के मामले सबसे ज्यादा बढे़।
एक साल बाद, दिसंबर 2021 में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट देखा गया, जिसकी प्रकृति ज्यादा गंभीर रोगकारक नहीं थी, लिहाजा प्रतिबंधों में ढील दी जाने लगी। 2022 के दिसंबर में ओमिक्रॉन में भी म्यूटेशन हुआ और बीए.2 और बीए.5 जैसे सब-वैरिएंट का उदय देखा गया। साल 2023 के दिसंबर में भी यही क्रम जारी है, अब नया सब-वैरिएंट JN.1 सामने आया है।