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Covid-19: तीन साल में संक्रमण और लक्षणों में आया कितना बदलाव? क्या अब भी बरकरार है खतरा

Tue, 15 Nov 2022 02:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना संक्रमण और इससे बचाव - फोटो : istock
दिसंबर 2019 के आखिरी हफ्तों में पहली बार नोवेल कोरोना वायरस संक्रमण के बारे में दुनिया को पता चला, तब से अब तक यह बड़ा खतरा बना हुआ है। कोरोना महामारी को तीन साल पूरे होने वाले हैं, हालांकि अब तक वैज्ञानिक किसी खास निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पाए हैं कि यह खतरा कब तक जारी रहेगा। पिछले तीन साल में संक्रमण की प्रकृत्ति, कोरोना के वैरिएंट्स और रोग की गंभीरता में कई तरह के बदलाव देखे गए हैं। वैज्ञानिकों ने इस दौरान कई नए वैरिएंट्स का पता लगाया जिनमें से कुछ की प्रकृति काफी खतरनाक जबकि कुछ को अधिक संक्रामकता दर वाला पाया गया। हालिया रिपोर्टस में कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण चीन में हालात बिगड़ने की खबरें हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है, भले ही देश में कोरोना के मामले फिलहाल काफी कंट्रोल में हैं पर इसे हल्के में लेने की गलती नहीं करनी चाहिए। कोरोना संक्रमण और इसके लक्षणों में कई तरह के बदलाव देखे जा रहे हैं, जिनके बारे में जानना काफी आवश्यक है।

आइए जानते हैं कि तीन साल में कोरोनावायरस के संक्रमण और लक्षणों में किस प्रकार के बदलाव आ गए हैं और फिलहाल इनसे बचाव के लिए अब किस तरह की सावधानियां बरतते रहने की आवश्यकता है?
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कोरोना का नए वैरिएंट और खतरा - फोटो : istock
डेल्टा से लेकर ओमिक्रॉन की प्रकृत्ति तक

मार्च-अप्रैल 2021 में देश में आई कोरोना की दूसरी लहर काफी विनाशकारी थी, इससे संक्रमितों में गंभीर लक्षणों और इसके कारण मौत के मामले सबसे अधिक दर्ज किए गए। दूसरी लहर के लिए कोरोना के डेल्टा वैरिएंट को प्रमुख कारण माना जाता है, इसकी प्रकृति काफी संक्रामक और गंभीर लक्षणों वाली थी। संक्रमितों में फेफड़ों से संबंधित समस्याएं, सांस की दिक्कत देखी गई।

हालांकि साल 2022 में आई तीसरी लहर में लक्षणों की गंभीरता कम हो गई। तीसरी लहर के लिए ओमिक्रॉन वैरिएंट को कारण माना गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि ओमिक्रॉन की संक्रामकता दर तो अधिक है पर इसके कारण गंभीर रोगों के विकसित होने का जोखिम कम पाया गया।
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कोरोना संक्रमण के लक्षण - फोटो : istock
लक्षणों में देखे जा रहे हैं बदलाव

कोरोनावायरस में लगातार हो रहे म्यूटेशन के साथ इसकी प्रकृति में बदलाव देखा गया। डेल्टा से संक्रमण के दौरान जहां बुखार, सर्दी-जुकाम के साथ सांस की दिक्कतें अधिक दर्ज की गईं वहीं ओमिक्रॉन के जारी संक्रमण में ज्यादातर लोग एसिम्टोमैटिक या फिर हल्के लक्षणों वाले पाए जा रहे हैं।

इस साल की शुरुआत में, ब्रिटेन में 17,500 रोगियों पर किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि अब संक्रमितों में स्वाद और गंध न आने जैसी समस्या नहीं देखी जा रही है, जोकि दूसरी लहर के दौरान प्रमुख लक्षणों में से एक था। ओमिक्रॉन वैरिएंट के कारण जारी संक्रमण में लोगों में सांस की तकलीफें भी कम ही हो रही है।

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कोरोना के लक्षणों में आए बदलाव - फोटो : istock
मौजूदा लक्षण हल्के स्तर के

ओमिक्रॉन और इसके अन्य सब-वैरिएंट्स के कारण होने वाले संक्रमण के बारे में किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि फिलहाल संक्रमण की स्थिति में लोगों को गले में खराश, नाक बहने, नाक बंद होने, लगातार खांसी और सिरदर्द जैसे हल्के लक्षणों का ही अनुभव हो रहा है। अध्ययन में पाया गया कि पहले के लक्षणों जैसे लगातार खांसी, गंध की कमी, बुखार और सांस की तकलीफ जैसी दिक्कतें अब कम देखी जा रही हैं।

ओमिक्रॉन से संक्रमित अधिकतर लोग बिना लक्षणों वाले भी पाए जा रहे हैं जो आसानी से ठीक हो जा रहे हैं। गंभीर लक्षणों का जोखिम सिर्फ उन्हीं लोगों में अधिक है जो पहले से ही कोमोरबिडिटी के शिकार हैं या जिनका टीकाकरण नहीं हुआ है।
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कोरोना संक्रमण से बचाव के उपाय करते रहना जरूरी - फोटो : iStock
संक्रमण का खतरा अब भी जारी

किंग्स कॉलेज लंदन, हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा हाल ही में किए गए अध्ययन में पाया गया है कि भले ही कोरोना के नए वैरिएंट्स ज्यादा गंभीर नहीं हैं फिर भी सभी लोगों को इससे बचाव करते रहना जरूरी है। कई देशों में म्यूटेटड वैरिएंट्स के कारण स्थिति बिगड़ती देखी गई है। अधिक संक्रामकता के साथ वैरिएंट्स के म्यूटेट होने का खतरा भी बढ़ जाता है, ऐसे में संक्रमण के प्रसार को कम करने के लिए कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन हमेशा करते रहें।

कोरोना महामारी अभी भी जारी है ऐसे में इसके खतरे से बचाव करते रहना आवश्यक है। 



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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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