फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

चमगादड़ से कुत्ते में और कुत्ते से इंसानों में पहुंचा कोरोना, कनाडाई वैज्ञानिक के रिसर्च का दावा कितना सही?

Thu, 16 Apr 2020 08:26 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
कोरोना वायरस को लेकर लगातार शोध हो रहे हैं - फोटो : PTI
कोरोना वायरस इंसानों में पहली बार कहां से और कैसे आया, इसको लेकर बहुत सारे शोध हो चुके हैं। कई शोधों में चमगादड़ या पैंगोलिन से इंसानों में संक्रमण फैलने की बात कही गई तो वहीं कुछ शोधों में कहा गया कि चमगादड़ से किसी अन्य जानवर में और फिर उस जानवर से यह वायरस इंसानों में पहुंचा। इस बीच एक और शोध सामने आया है, जिसमें कहा गया है कि कोरोना वायरस कुत्तों से इंसानों में आया। यह दावा करने वाले कनाडा के वैज्ञानिक का कहना है कि कोरोना वायरस चमगादड़ से कुत्ते में और फिर कुत्ते से इंसानों में आया। हालांकि कई वैज्ञानिकों ने कनाडाई वैज्ञानिक के इस दावे को खारिज भी किया है। आइए, जानते हैं इस बारे में विस्तार से: 
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
लाइव साइंस की रिपोर्ट के अनुसार, कनाडा की ओटावा यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जुहुआ जिया ने यह यह शोध किया है। कनाडाई वैज्ञानिक ने अपने हालिया रिसर्च में कहा है कि कोरोना वायरस चमगादड़ से कुत्ते में और कुत्ते से इंसानों में पहुंचा होगा। उनका कहना है कि आवारा कुत्ते, चमगादड़ को भी खाते हैं, जोकि कोरोना महामारी के फैलने की वजह हो सकती है। हालांकि इस दावे से असहमत एक विशेषज्ञ ने लाइव साइंस को बताया है कि इस स्टडी में बहुत सारी कमजोरियां हैं, जोकि डेटा स्टडी के निष्कर्ष का समर्थन नहीं करती हैं।
विज्ञापन

3 of 5
प्रो. जिया की यह रिसर्च मॉलिक्यूलर बायोलॉजी एंड इवोल्यूशन जर्नल में 14 अप्रैल को प्रकाशित हुई है। अबतक 1250 से ज्यादा कोरोनावायरस के जीनोम की स्टडी कर चुके प्रो. जिया के मुतबिक सांप और पैंगोलिन में मिले वायरस के स्ट्रेन के कारण असल कड़ी टूट गई है, जिसमें चमगादड़ से इंसानों में वायरस के पहुंचने की कड़ी का पता लगाना था। प्रो. जिया का कहना है कि कोरोना वायरस चमगादड़ के जरिए कुत्तों की आंत में पहुंचा और फिर कुत्तों से इंसानों में इसका संक्रमण फैला।

4 of 5
शोध के मुताबिक, इंसानों के शरीर में जिंक फिंगर एंटीवायरल प्रोटीन यानी जैप होता है, जो कि कोरोना वायरस के जेनेटिक कोड साइट सीपीजी (CpG) को देखता है और उसपर हमला करता है। इसके बाद कोरोना वायरस शरीर में कमजोर कोशिकाओं को खोजता है। प्रो. जिया का तर्क है कि चूंकि कुत्तों में यह जैप कमजोर होता है, इसलिए कोरोना वायरस उसकी आंतों में आसानी से अपना घर बना लेता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
शोध - फोटो : फाइल फोटो
हालांकि, इस शोध में किए गए दावे को खारिज करने वाले वैज्ञानिकों का कहना है कि घरों में पेट पालने वाले या फिर कुत्तों की देखभाल करने वाले लोगों को इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है। मालूम हो कि पिछले महीने विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस संबंध में बयान जारी कर कहा था कि अब तक पालतू जानवरों से कोरोना संक्रमण के प्रमाण नहीं मिले हैं। सैन फ्रांसिस्को स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर लिउनी पेनिंग्स और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक प्रो. जेम्स वुड ने भी इस रिसर्च की आलोचना की है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें