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Covid-19: महीनों से शांत कोरोना अचानक कैसे बढ़ने लगा? जीन वैज्ञानिक ने सरल भाषा में समझाया इसका पूरा गुणा-गणित

Fri, 30 May 2025 04:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Covid-19 News: साल 2024 के शुरुआती महीनों के बाद से वायरस एक शांत रूप में पहुंच गया था। कुछ-कुछ हिस्सों में छोटी-छोटी लहरें जरूर आईं पर इसका ज्यादा असर नहीं देखा गया। कोरोना अब एक बार फिर से बढ़ रहा है, न सिर्फ बढ़ रहा है बल्कि अमेरिका जैसे कई स्थानों पर मौत के मामले भी बढ़े हैं।
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कोरोनावायरस के बढ़ते मामले - फोटो : Freepik.com
साल 2019 के आखिरी के हफ्तों में पहली बार पूरी दुनिया को नोवेल कोरोनावायरस (कोविड-19) के बारे में पता चला। कोरोना नया नहीं था, पहले भी इसके मामले रिपोर्ट किए जा चुके थे, पर सार्स-सीओवी-2 (मुख्य वायरस) का ये रूप पहली बार लोगों के सामने आया था। अगले दो साल में वायरस में खूब तबाही मचाई, लाखों लोगों की मौतें हुई। हालांकि समय के साथ सभी ने इससे बचाव के तरीके सीख लिए और कोरोना भी फ्लू वायरस जैसा है लोगों के लिए आम हो गया।

साल 2024 के शुरुआती महीनों के बाद से वायरस एक शांत रूप में पहुंच गया था। कुछ-कुछ हिस्सों में छोटी-छोटी लहरें जरूर आईं पर इसका ज्यादा असर नहीं देखा गया। पर कोरोना अब एक बार फिर से बढ़ रहा है, न सिर्फ बढ़ रहा है बल्कि अमेरिका जैसे कई स्थानों पर मौत के मामल में भी बढ़ोतरी हुई है।


ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स 

जो वायरस इन दिनों बढ़ रहा है (ओमिक्रॉन का JN.1 वैरिएंट और इसमें हुए म्यूटेशन से उत्पन्न सब-वैरिएंट्स NB.1.8.1 और LF.7) इसे वैज्ञानिकों ने अति संक्रामक पाया है। इतना ही नहीं  NB.1.8.1 के कारण होने वाले जोखिमों को देखते हुए हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इसे वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग के रूप में वर्गीकृत कर दिया, अब तक इसे वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट के रूप में रखा गया था। 

क्या ये वायरस वास्तव में बहुत खतरनाक है? महीनों से शांत कोरोना के मामले अचानक कैसे बढ़ने लगे? क्या महामारी फिर से लौट रही है, अगर आपके मन में भी ये सवाल हैं तो इस आर्टिकल में आपके सारे जवाब मिलेंगे।


(ये भी पढ़िए- कोरोना होने का खतरा किसे सबसे ज्यादा? ये पांच उपाय आपको देंगे सुरक्षा)
 
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कोरोना संक्रमण और खतरा - फोटो : Amarujala.com
जीन साइंटिस्ट ने वायरस के बारे में समझाया

कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच इन सभी सवालों का जवाब ढूंढने के लिए अमर उजाला ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में जीन साइंटिस्ट प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे से बातचीत की। प्रोफेसर चौबे ने सरल भाषा में कोरोना के गुणा-गणित को समझाया। आप भी जानिए।

प्रोफेसर चौबे बताते हैं, पिछले दो-तीन साल से ओमिक्रॉन सबसे प्रमुख वैरिएंट है। इन दिनों जो मामले बढ़ रहे हैं वो ओमिक्रॉन के सब-वैरिएंट्स के ही हैं। ओमिक्रॉन का सबसे प्रभावी सब-वैरिएट JN.1 है जो आज के समय में 50 फीसदी से अधिक मामलों के लिए जिम्मेदार है। बाकी इनमें हुए म्यूटेशंस से उत्पन्न हुए हैं।
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कोरोनावायरस में म्यूटेशन - फोटो : Adobe stock photos
म्यूटेशन के साथ वायरस में होता रहता है बदलाव

प्रोफेसर चौबे कहते हैं, संक्रमण होस्ट और पैथोजन के तौर पर बढ़ते हैं, कोरोनावायरस पैथोजन है और हम होस्ट। वायरस हमारी इम्युनिटी के खिलाफ कुछ ऐसे म्यूटेशन करता है जिससे कि ये होस्ट की इम्युनिटी को चकमा देकर उसे संक्रमित कर पाएं और खुद बढ़ सकें। किसी भी वायरस में म्यूटेशन होते रहना सामान्य प्रक्रिया है, इस दौरान कुछ ऐसे म्यूटेशन भी हो सकते हैं जो हमारी इम्युनिटी के एक लेवल को फेल कर दें। 

उदाहरण के लिए किसी के पास 2 यूनिट एंटीबॉडी (संक्रमण से सुरक्षित रखने वाली) है। कुछ समय बाद वायरस खुद में कुछ ऐसे म्यूटेशन कर सकता है जो इन एंटीबॉडी को बायपास करके शरीर को संक्रमित कर सकते हैं।

हमें ये समझने की जरूरत है कि कोरोना कहीं गया नहीं था, ये हमारे आसपास हमेशा रहता है। कभी इससे 3-4 लोग संक्रमित होते हैं कभी 30-40 हजार। अच्छी बात ये है कि पहले देखे गए डेल्टा, गामा जैसे वैरिएंट्स की तुलना में ओमिक्रॉन स्थिर वैरिएंट है और ज्यादा खतरनाक नहीं है।    

2019-2020 में पहली बार देखे गए वायरस में अबतक 130-140 म्यूटेशन हो चुके हैं। अच्छी बात ये है कि अगर आपके पास अच्छी एंटीबॉडी हैं तो आप इससे सुरक्षित हैं।  

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कमजोर इम्युनिटी वालों में संक्रमण का खतरा - फोटो : Adobe stock photos
लो एंटीबॉडीज-हाई इंफेक्शन का खतरा

चूंकि समय के साथ एंटीबॉडीज भी कम होती जाती हैं, ऐसे में जिन लोगों में इसका स्तर कम हो जाता है वो संक्रमण का शिकार हो जाते हैं.। एंटीबॉडीज कम होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे बीमारी, दवाओं का सेवन और शरीर की स्थित आदि। जिन लोगों में एंटीबॉडीज कम हो जाती हैं वो संक्रमित हो सकते हैं।
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कोरोना के बढ़ते मामलों का कारण - फोटो : Freepik.com
प्रोफेसर चौबे बताते हैं, आज के समय में बड़ी आबादी संक्रमित होकर ठीक हो चुकी है और बहुत सारे लोग वैक्सीनेट हो चुके हैं। जिनका वैक्सीनेशन नहीं हुआ है उनमें संक्रमण होने या गंभीर रोग का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा बीमारियों या अन्य कारणों से जिनकी इम्युनिटी कमजोर हो गई है, उनमें भी नए वैरिएंट्स से संक्रमण और इसके गंभीर रूप लेने का खतरा हो सकता है। बाकी लोगों के लिए ये  वायरस ज्यादा चिंताजनक नहीं है।

संक्रमण बढ़ने के कारणों का सार ये है कि-
  1. वायरस में म्यूटेशन होता रहता है, जिससे नए और इम्युनिटी को चकमा देने वाले वैरिएंट्स आ रहे हैं।  
  2. कम होती एंटीबॉडी के कारण संक्रममण और गंभीर रोग हो सकता है। 
  3. और तीसरा जिन लोगों की बीमारी-दवाओं या अन्य कारणों से इम्युनिटी कमजोर हो गई है वो भी संक्रमित हो सकते हैं।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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