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Covid-19: कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन सबसे प्रभावी तरीका, पर अध्ययन की इस रिपोर्ट ने बढ़ा दिया डर

Fri, 30 May 2025 04:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Autoimmune Risk After COVID Vaccination: कोविड वैक्सीन शरीर पर किस तरह से असर डालती है, इसे समझने के लिए इजराइल के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन किया, जिसमें बच्चों की सेहत पर वैक्सीन के प्रभावों का आकलन किया गया है। इसके जो परिणाम सामने आए हैं वो डराने वाले हैं।
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कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन - फोटो : Freepik.com
वैश्विक स्तर पर कोरोना के बढ़ते मामले एक बार फिर से डराने लगे हैं। पिछले एक महीने के दौरान हांगकांग-सिंगापुर, भारत-अमेरिका सभी जगह संक्रमण के मामलों में तेजी से उछाल देखा गया है। अमेरिका से प्राप्त हो रही जानकारियां और भी चिंता बढ़ा रही हैं। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक यहां हर हफ्ते कोरोना से 300 से अधिक लोगों की मौतें हो रही हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार फैल रहे JN.1 और इसमें हुए म्यूटेशन से उत्पन्न सब-वैरिएंट्स (NB.1.8.1 और LF.7) संक्रामक जरूर हैं, पर जानलेवा नहीं हैं। जिन लोगों की इससे मौतें हो रही हैं उनमें से अधिकतर या तो कोमोरबिडिटी (पहले से ही एक-दो क्रॉनिक बीमारियों) के शिकार रहे हैं या फिर कमजोर इम्युनिटी वाले हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना से बचाव के लिए कोविड उपयुक्त व्यवहार का पालन करना जरूरी है, इसके अलावा वैक्सीनेशन अब भी सबसे प्रभावी तरीका है।  हालांकि वैक्सीनेशन को लेकर हाल ही में हुए एक अध्ययन की रिपोर्ट ने लोगों को डरा दिया है।

क्या कहती है ये रिपोर्ट, आइए जानते हैं।
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वैक्सीनेशन और इसके दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com
वैक्सीन ले चुके बच्चों में ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा

कोविड वैक्सीन शरीर पर किस तरह से असर डालती है? इसे समझने के लिए इजराइल के शोधकर्ताओं ने एक अध्ययन किया, जिसमें बच्चों की सेहत पर वैक्सीन के प्रभावों का आकलन किया गया है।

वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि जिन बच्चों और किशोरों ने कम से कम कोविड की एक वैक्सीन ली, उनमें बिना टीकाकरण वाले बच्चों की तुलना में ऑटोइम्यून बीमारी विकसित होने का 23% अधिक जोखिम हो सकता है। इजराइली शोधकर्ताओं ने कहा, ये अध्ययन नई ऑटोइम्यून बीमारियों के उभरने के बारे में बढ़ती चिंताओं को लेकर ध्यान आकृष्ट करता है।
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ऑटोइम्यून बीमारियों के बढ़ते मामले - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

पीडियाट्रिक रुमेटोलॉजी जर्नल में इस अध्ययन के निष्कर्षों को प्रकाशित किया गया है। शोध के दौरान 21 वर्ष की आयु तक के 4.93 लाख रोगियों के मेडिकल डेटा का उपयोग करते हुए कोविड महामारी के पहले और बाद में ऑटोइम्यून बीमारियों की घटनाओं का अध्ययन किया गया।

ऑटोइम्यून बीमारियां, वो स्थिति होती हैं, जिनमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली शरीर की रक्षा करने के बजाय स्वस्थ कोशिकाओं पर ही अटैक करना शुरू कर देती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि ऑटोइम्यून बीमारियों में कई तरह की स्थितियां शामिल हैं, जिनमें टाइप-1 डायबिटीज, रुमेटीइड आर्थराइटिस, सोरायसिस, सीलिएक डिजीज और गुइलेन-बैरे सिंड्रोम जैसे दुर्लभ न्यूरोलॉजिकल विकार हो सकते हैं।     
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वैक्सीन कितनी सुरक्षित? - फोटो : Freepik.com
इन अध्ययनों ने भी बढ़ाई चिंता

इससे पहले मार्च में इसी से संबंधित मॉलिक्यूलर सिस्टम्स बायोलॉजी में प्रकाशित एक अन्य रिपोर्ट में भी कोविड-19 वैक्सीन और इससे ऑटोइम्यून रोगों के बढ़ते मामलों को लेकर अलर्ट किया गया था। 19 जर्मन वैज्ञानिकों द्वारा किए गए अध्ययन में बताया गया कि एमआरएनए (mRNA COVID-19) वैक्सीन कुछ स्थितियों में आनुवंशिक संरचनाओं में दीर्घकालिक बदलाव करने वाली हो सकती हैं जिनके कारण इंफ्लेमेटरी रिस्पॉन्स बढ़ जाता है। ये कैंसर और ऑटोइम्यून विकारों की शुरुआत का कारण बन सकते हैं।

एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों को कोविड-19 वैक्सीन दी गई थी, उनमें मल्टीपल प्रोइंफ्लेमेटरी साइटोकिन्स का स्तर बढ़ा हुआ था, ये वो प्रोटीन है जो प्रतिरक्षा प्रणाली को रेगुलेट करने में मदद करता है। ये साइटोकिन्स क्रॉनिक सूजन, प्रतिरक्षा प्रणली में समस्या और ऑटोइम्यून रोगों का बढ़ाने वाले हो सकते हैं।



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स्रोत और संदर्भ
Investigating the association between SARS-CoV-2 infection, COVID-19 vaccination, and autoimmune diseases in a pediatric population: a comprehensive analysis


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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