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Covid 19: कोरोना के खिलाफ वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, डेल्टा-ओमिक्रॉन वेरिएंट का प्रभाव हो सकता है कम

Wed, 15 Jun 2022 04:35 PM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस पर अध्ययन - फोटो : सोशल मीडिया
लगभग दो साल से भारत समेत दुनिया के तमाम देशों में कोरोना वायरस के कई वेरिएंट्स के आने के कारण लोगों में संक्रमण का खतरा बरकरार है। संक्रमण से बचाव के लिए इम्यूनिटी बढ़ाने की एक्सपर्ट सलाह देते हैं। वहीं संक्रमण के इलाज के लिए कोरोना वैक्सीन भी बनाई गईं। भारत में बड़ी संख्या में टीकाकरण होने के बाद भी लगातार कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में संक्रमण का आंकड़ा एक बार फिर बढ़ने लगा है। वैक्सीन के दोनों डोज ले चुके लोगों को बूस्टर डोज लगाने की सलाह दी जा रही है। माना जा रहा है कि वैक्सीन के दो डोज की तुलना में तीन खुराक ज्यादा असरदार है। इसी कड़ी में मेडिकल अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारत बायोटेक के वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया कि डेल्टा और ओमिक्रॉन वेरिएंट के असर को कम किया जा सकता है। चलिए जानते हैं आईसीएमआर और भारत बायोटेक की कोवैक्सिन बूस्टर डोज पर अध्ययन रिपोर्ट।
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कोवैक्सीन डोज का असर - फोटो : सोशल मीडिया
कोवैक्सिन का बूस्टर डोज प्रभावी

भारतीय मेडिकल अनुसंधान परिषद (ICMR) और भारत बायोटेक ने हाल ही में एक अध्ययन किया, जिसमें पाया गया कि कोरोना के खिलाफ कोवैक्सिन का बूस्टर डोज काफी सुरक्षात्मक है। कोवेक्सिन बूस्टर डोज कोविड-19 के डेल्टा वेरिएंट, ओमीक्रान वेरिएंट बीए.1.1 और बीए.2 वैरिएंट के खिलाफ अधिक प्रभावी हो सकता है। भारत बायोटेक की कोवैक्सिन के सुरक्षात्मक और प्रभावकारी गुण का अध्ययन सीरिया के हम्सटर मॉडल के अंतर्गत किया गया। जिसमें मानव संबंधी रोगों का अध्ययन पशुओं पर हुआ है। हालांकि अभी इस अध्ययन की समीक्षा की जा रही हैं।
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फेफड़े की बीमारी होगी कम - फोटो : अमर उजाला
फेफड़े की बीमारी कम करने में मददगार

अध्ययन में कहा गया कि जिन लोगों ने दो की जगह तीन डोज लगवाए हैं उनकी एंटीबॉडी डेल्टा वेरिएंट के खिलाफ सुरक्षा के लिहाज से बेहतर है। वहीं कोवैक्सिन का बूस्टर डोज लगाने वालों में फेफड़े से संबंधित बीमारियां कम दिखीं। अनुसंधान के मुताबिक, वायरस का निरीक्षण करने पर पाया गया कि इसका एंटीबॉडी रिस्पाॅन्स, क्लीनिकल ऑब्सेर्वशन्स, वायरल लोड रिडक्शन और फेफड़ों की बीमारी के गंभीर को कम कर सकता है।

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आईसीएमआर - फोटो : social media
आईसीएमआर और भारत बायोटेक की स्टडी रिपोर्ट

आईसीएमआर और भारत बायोटेक ने अध्ययन के आधार पर कहा कि ‘डेल्टा वैरिएंट के खिलाफ जब वैक्सीन की दूसरी और तीसरी खुराक के बीच तुलना की गई तो बूस्टर डोज के फायदे मिले। टीकाकरण की तीन खुराक लेने वालों के फेफड़ों की बीमारी की गंभीरता कम देखी गई। 
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वैक्सीन के डोज लेने वालों में कम संक्रमण मिला। - फोटो : social mediA
कोवैक्सीन बूस्टर डोज कोविड वैरिएंट पर असरदार

दूसरे अध्ययन में ओमिक्रॉन के बीए 1 और बीए 2 वेरिएंट पर तीन खुराकों के असर का भी अध्ययन किया गया। पता चला कि प्लेसेबो समूहों की तुलना में वैक्सीन के डोज लेने वालों में वायरस शेडिंग, फेफड़ों में कम संक्रमण मिला। इस अध्ययन से साबित होता है कि कोवैक्सिन बूस्टर डोज इम्यूनिटी को बढ़ाता है और डेल्टा व ओमिक्रॉन वेरिएंट की गंभीरता को भी कम करता है।
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अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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