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Lancet Study: इस रोग के कारण 2021 में कई गुना बढ़ गए मौत के मामले, लाइफ एक्सपेक्टेंसी में भी आई कमी

Fri, 05 Apr 2024 12:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मौत के मामले - फोटो : iStock
क्रोनिक बीमारियों के कारण दुनियाभर में हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में इसको लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया, साल 2021 में कोविड-19 वैश्विक स्तर पर मौत का दूसरा प्रमुख कारण रहा है। प्रति एक लाख आबादी पर 94 मौतें हुईं और जीवन प्रत्याशा में 1.6 साल की कमी आई। वहीं सबसे ज्यादा मौतें इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक के कारण रिपोर्ट की गईं।

विशेषज्ञों ने कहा, कोरोना महामारी ने संपूर्ण स्वास्थ्य पर कई प्रकार से नकारात्मक असर डाला है और 2021 में इसके सबसे खतरनाक स्ट्रेन डेल्टा का असर दुनियाभर में देखा गया। 

शोधकर्ताओं ने कहा,  तीन दशकों से अधिक समय से लोगों की जीवन प्रत्याशा और मृत्युदर में काफी सुधार देखा जा रहा था, हालांकि कोविड-19 के कारण इसमें एक बार फिर से बड़ा परिवर्तन आ गया। लोगों की लाइफ एक्सपेक्टेंसी में कोरोना के कारण एक बार फिर से कमी देखी गई। लाइफ एक्सपेक्टेंसी की मतलब निश्चित आयु में व्यक्ति के जीने की अवधि से अतिरिक्त वर्षों की औसत संख्या है। 
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कोरोना के कारण मौत के मामले - फोटो : iStock
इतिहास की सबसे निर्णायक वैश्विक स्वास्थ्य घटना

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, कोरोना महामारी हाल के इतिहास की सबसे निर्णायक वैश्विक स्वास्थ्य घटनाओं में से एक के रूप में उभरी है। ये गंभीर स्वास्थ्य जोखिम रहा है जिसका असर लगभग हर उम्र के व्यक्तियों की सेहत पर देखा गया। 

इससे पहले के वर्षों में दुनियाभर में सबसे ज्यादा मौतें इस्केमिक हृदय रोग और स्ट्रोक के कारण होती रही थीं। रक्त वाहिकाओं के थक्के जमने या सिकुड़ने के कारण रक्त के प्रवाह में कमी आ जाने की समस्या हृदय रोग और स्ट्रोक का कारण बनती है।
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कोरोना और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : istock
कोरोना के कारण बढ़ा मौतों का आंकड़ा

अध्ययन की रिपोर्ट में कहा गया, साल 2019 की तुलना में 2020 में दुनियाभर में मौत के मामलों में 10.8 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। वहीं 2020 की तुलना में ये वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत थी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, कोरोना महामारी के कारण बड़ी संख्या में लोग अस्पतालों में भर्ती हुए, कई लोगों में गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं देखी गईं। इसके अलावा इस दौरान कोरोना से बचाव के लिए कोई खास वैक्सीन या उपचार विधि उपलब्ध नहीं थी, यही कारण रहा है साल 2021 में मौत के मामले पिछले कुछ वर्षों की तुलना में ज्यादा रिपोर्ट किए गए। 

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आईसीयू और गंभीर रोगों के मामले - फोटो : istock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवोल्यूशन में प्रमुख अनुसंधान वैज्ञानिक और अध्ययन के लेखक डॉ. लियान ओंग कहते हैं, हमारा ये अध्ययन विश्व के स्वास्थ्य की एक तस्वीर प्रस्तुत करता है। एक ओर, हम डायरिया और स्ट्रोक से होने वाली मौतों को रोकने में कई देशों की उल्लेखनीय उपलब्धियां देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर हम देखते हैं कि कोविड-19 महामारी ने हमें कितना पीछे धकेल दिया है। 

लेखकों ने पाया कि जिन क्षेत्रों में कोविड-19 महामारी का सबसे ज्यादा असर देखा गया उनमें लैटिन अमेरिका और कैरेबियन के साथ उप-सहारा अफ्रीका के देश थे जिनकी लाइफ एक्सपेक्टेंसी में ज्यादा कमी आई है। 
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हृदय रोगों से मौत के मामले - फोटो : istock
इन बीमारियों से मौत के मामलों में सुधार

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा- इन सबके बीच अध्ययन में पता चलता है कि आंतों की बीमारियों से होने वाली मौतों में काफी सुधार भी आया है। इन सुधारों के चलते 1990 से 2021 के बीच दुनिया भर में जीवन प्रत्याशा में 1.1 वर्ष की वृद्धि हुई। इसके अलावा लोवर रेस्पोरेटरी इंफेक्शन से होने वाली मौतों में भी कमी दर्ज की गई है। 

स्ट्रोक, नवजात संबंधी विकार, इस्केमिक हृदय रोग और कैंसर सहित अन्य कारणों से होने वाली मौतों को रोकने में भी तुलनात्मक स्तर पर सुधार हुआ है। हालांकि तीन दशकों में हुए सुधार एक बार फिर से कोरोना महामारी के कारण काफी प्रभावित हुए हैं।



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स्रोत और संदर्भ
Global burden of 288 causes of death and life expectancy decomposition in 204 countries and territories and 811 subnational locations, 1990–2021

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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