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जरूरी बात: क्या वैक्सीनेशन के कारण हो सकते हैं 'लॉन्ग-टर्म' साइड-इफेक्ट्स? यहां जानिए सबकुछ विस्तार से

Thu, 22 Jul 2021 11:24 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोविड वैक्सीन के क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं? - फोटो : pixabay
Medically Reviewed by-
डॉ विक्रमजीत सिंह
(डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन)
आकाश हेल्थकेयर, दिल्ली


दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के एक बार फिर से बढ़ते हुए खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों से जल्द से जल्द वैक्सीनेशन कराने की अपील कर रहे हैं। ताजा आंकड़ों की मानें तो अब तक देश के सिर्फ चार फीसदी लोगों को कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज मिल पाई हैं, जबकि अध्ययनों में कहा जा रहा है कि कोरोना के नए वैरिएंट्स से मुकाबले के लिए वैक्सीन की दूसरी डोज से बनी एंटीबॉडीज ही प्रभावी मानी जा सकती हैं। सरकार भले ही लोगों वैक्सीनेशन के लिए लगातार प्ररित कर रही हो लेकिन अब भी लोगों के मन में वैक्सीनेशन से होने वाले साइड-इफेक्ट्स का डर व्याप्त है। कुछ लोगों को डर है कि वैक्सीन लगवाने के बाद शरीर में ऐसे साइड-इफेक्ट्स हो सकते हैं, जिनका असर दीर्घकालिक हो सकता है। पर क्या वास्तव में ऐसा है? क्या वास्तव में वैक्सीनेशन के कारण शरीर में किसी दीर्घकालिक साइड-इफेक्ट का खतरा हो सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, शरीर के बाहरी एंटीजन के संपर्क में आने के कारण होने वाली प्रतिक्रियाओं को साइड-इफेक्ट्स के रूप में जाना जाता है। किसी भी एंटीजन के खिलाफ शरीर की प्रतिक्रिया जैसी होती है, उससे होने वाले साइड-इफेक्ट्स भी उसी तरह के दिखते हैं। सामान्य तौर पर लोगों को बुखार, कमजोरी और हाथों में दर्द की समस्या हो रही है, पर क्या वैक्सीनेशन के कोई दीर्घकालिक साइड-इफेक्ट्स भी हो सकते हैं? आइए इस बारे में आगे की स्लाइडों में जानते हैं।
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वैक्सीनेशन के बाद ब्लड क्लाटिंग के मामले आए थे सामने (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
वैक्सीनेशन के बाद लोगों में हुईं कई गंभीर दिक्कतें
पिछले दिनों कई रिपोर्ट में वैक्सीनेशन के कारण लोगों में कुछ प्रकार की समस्याओं के बारे में बताया गया है, यही कारण है कि लोगों के मन में वैक्सीनेशन के दीर्घकालिक साइड-इफेक्ट्स
जैसे सवाल उठ रहे हैं। रिपोर्ट में बताया गया कि वैक्सीनेशन लगने के बाद कुछ लोगों ने मायोकार्डिटिस, हृदय में सूजन, रक्त के थक्के बनने और तंत्रिका संबंधी जटिलताओं का अनुभव किया है। इस बारे में डॉक्टरों का कहना है कि ऐसे मामले बेहद कम हैं, लोगों को इससे डरने की आवश्यकता नहीं है। कोविड-19 वैक्सीन न केवल उपयोग के लिए सुरक्षित हैं साथ ही यह गंभीर संक्रमण के जोखिमों को कम करने में भी मदद करती है। सभी लोगों को टीकाकरण अवश्य कराना चाहिए।
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कोरोना टीके के कारण होने वाले साइड-इफेक्ट्स - फोटो : पीटीआई
क्या वैक्सीन के कारण दीर्घकालिक समस्याओं का खतरा हो सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पिछले दिनों कुछ रिपोर्ट सामने आई हैं जिसमें वैक्सीन लगने के बाद लोगों में गुलियन-बैरे सिंड्रोम, रक्त के थक्कों के निर्माण मायोकार्डिटिस या एनाफिलेक्सिस
जैसी समस्याओं का अनुभव किया है, पर ध्यान देने वाली बात यह है कि इस तरह के दुष्प्रभाव भी टीकाकरण के बाद एक हफ्ते तक ही देखे गए हैं, इनके लंबे समय तक असर डालने के साक्ष्य नहीं हैं। वैसे भी इस तरह के साइड-इफेक्ट्स के मामले काफी दुलर्भ हैं, सभी लोगों को इनसे खतरा नहीं है। अब तक के किसी भी अध्ययन में ऐसा कोई प्रमाण सामने नहीं आया है कि वैक्सीनेशन के कारण होने वाले साइड-इफेक्ट्स का प्रभाव लंबे समय तक रह सकता है।

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वैक्सीनेशन के दुष्प्रभाव (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
कई मानकों पर खरे उतरे हैं टीके
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोविड की वैक्सीनों को लोगों के लिए उपलब्ध कराने से पहले तमाम अध्ययनों और नैदानिक परीक्षण के सुरक्षा मानकों से गुजरा गया है, इनमें वैक्सीन के कारण ऐसे किसी भी दीर्घकालिक साइड-इफेक्ट का मामला सामने नहीं आया है। इस आधार पर कहा जा सकता है कि वैक्सीन से कोई खतरा नहीं है, लोगों को बेझिझक टीकाकरण कराना चाहिए। हां, वैक्सीनेशन न कराने वाले लोगों को कोरोना की संभावित तीसरी लहर से खतरा जरूर हो सकता है।
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जरूरी है टीकाकरण - फोटो : पीटीआई
वैक्सीन से मिल सकती है कोरोना से जीवनभर की सुरक्षा
हाल ही में हुए अध्ययन में बताया गया है कि भारत में प्रयोग में लाई जा रही ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन लगवाने वाले लोगों को जीवनभर के लिए कोरोना के गंभीर संक्रमण से सुरक्षा मिल सकती है। इस अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन शरीर में लंबे समय तक भी महत्वपूर्ण टी-कोशिकाओं की स्वाभाविक रूप से निर्माण को प्रेरित कर देती है। अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि संभवत: इस तरह से टी-कोशिकाओं का निर्माण पूरी उम्र भर होता रह सकता है, इस आधार पर कोविशील्ड और जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन को लाइफलांग सपोर्ट वाली वैक्सीन माना जा रहा है।


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नोट: यह लेख डॉ विक्रमजीत सिंह (डिपार्टमेंट ऑफ इंटरनेल मेडिसिन, आकाश हेल्थकेयर दिल्ली)  के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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