प्रतीकात्मक तस्वीर
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प्रतिरक्षा प्रणाली बहुत जटिल होती है, इसमें कई कोशिकाएं एक दूसरे के साथ मिलकर काम करते हैं। अगर इस सिस्टम में कहीं पर कुछ काम नहीं कर रहा, तो इसका असर पूरे सिस्टम के लड़ने की प्रक्रिया पर पड़ता है। अगर आपको कोई कीटाणु या विषाणु संक्रमित करता है, तो रोग प्रतिरक्षा प्रणाली की पहली लेयर उस पर हमला करना शुरू करती है। सांस की बीमारी के लिए ये काम फेफड़े, श्वास की नली या नाक की मदद से किया जा सकता है। व्हाइट ब्लड सेल या मैक्रोफेजेस, विषाणु पर हमला करते हैं और उन्हें नष्ट कर देते हैं। जब मैक्रोफेजेस इन्हें तोड़ देते हैं, उसके बाद वो इन्हें दूसरे इम्यून सेल को देते हैं, जिन्हें टी-सेल कहते हैं। ये प्रतिरक्षा प्रणाली की 'याददाश्त' की तरह काम करते हैं।
टी-सेल खुद विषाणु को नहीं देख सकते, लेकिन ये उसे पहचान कर याद रखने का काम करते हैं ताकि अगली बार वही विषाणु हमला करे तो वो शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को सचेत कर सकें। ये अगले लेयर को सक्रिय करते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाते हैं।