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Coronavirus Vaccine: चीन की कोरोना वैक्सीन पर खुशखबरी, 28 दिन के भीतर एंटीबॉडीज विकसित करने का किया दावा

Wed, 18 Nov 2020 01:28 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus vaccine updates - फोटो : Pixabay/Amarujala
अमेरिकी कंपनी मॉडर्ना ने हाल ही में अपनी वैक्सीन के 95 फीसदी तक कामयाब होने का दावा किया था और अब चीन ने भी वैक्सीन को लेकर एक खुशखबरी दी है। उसने दावा किया है कि उसकी वैक्सीन 'कोरोना वैक' शुरुआती चरण के ट्रायल में सुरक्षित पाई गई है और उसने 18 से 59 साल के स्वस्थ व्यक्तियों में कोरोना के खिलाफ प्रभावी एंटीबॉडीज विकसित की है। इससे संबंधित अध्ययन रिपोर्ट को 'लैंसेट इंफेक्शियस डिसीज' नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। अध्ययन में कहा गया है कि यह वैक्सीन पहले टीकाकरण के 28 दिन के भीतर लोगों में एंटीबॉडीज प्रतिक्रिया पैदा कर सकती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अध्ययन के सह लेखक फेंगकई झू कहते हैं, 'हमारा अध्ययन बताता है कि कोरोना वैक के दो डोज 14 दिन के अंतराल पर दिए जाने पर यह टीकाकारण के चार हफ्ते के अंदर सबसे ज्यादा एंटीबॉडीज प्रतिक्रिया पैदा करने में सक्षम है।'
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
फेंगकई झू के मुताबिक, 'जब कोरोना वायरस का खतरा कम हो जाएगा, तब एक महीने के अंतर पर वैक्सीन की दो खुराक देना दीर्घकालिक प्रतिरोधी तंत्र विकसित करने के लिए पर्याप्त रहेगा।' आपको बता दें कि 'कोरोना वैक' का फिलहाल तीसरे यानी अंतिम चरण का ट्रायल चल रहा है।  

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दरअसल, कोरोनावैक चीनी बायोफार्मास्युटिकल कंपनी सिनोवैक द्वारा विकसित एक संभावित कोविड-19 वैक्सीन उम्मीदवार है। ब्राजील में करीब 10 हजार लोगों पर इसका ट्रायल चल रहा है, लेकिन हाल ही में एक व्यक्ति की मौत के बाद इसके ट्रायल को रोक दिया गया है। हालांकि यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका है कि उस व्यक्ति की मौत वैक्सीन के कारण हुई है या किसी अन्य वजह से। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
आपको बता दें कि चीन फिलहाल चार-चार वैक्सीन पर काम कर रहा है, जो तीसरे यानी अंतिम चरण के क्लीनिकल ट्रायल में हैं। इसमें सिनोवैक बायोटेक तो शामिल है ही, इसके अलावा चीन की पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी (पीएलए) मेडिकल रिसर्च यूनिट ने भी निजी कंपनी कैनसिनो के साथ मिलकर एक वैक्सीन तैयार की है। खास बात ये है कि इस वैक्सीन का इस्तेमाल चीन में आम लोगों पर भी हो रहा है।
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