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Coronavirus Vaccine: क्या कोरोना वायरस से बचा सकता है बीसीजी का टीका? यहां वैज्ञानिकों ने शुरू किया टेस्ट

Wed, 14 Oct 2020 02:44 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay/Social media
ब्रिटेन में वैज्ञानिकों ने एक टेस्ट शुरू किया है जिसमें देखा जा रहा है कि क्या बीसीजी वैक्सीन की मदद से कोरोना संक्रमितों की जान बचाई जा सकती है। यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर में चल रहे वैक्सीन के ट्रायल में करीब 1000 लोग हिस्सा लेने वाले हैं। यह वैक्सीन 1921 में विकसित की गई थी। इसे टीबी की रोकथाम के लिए तैयार किया गया था, लेकिन ऐसे प्रमाण मिले हैं कि यह दूसरी संक्रामक बीमारियों से बचाव में भी कारगर साबित हो सकती है। लाखों लोगों ने बचपन में भले ही ये टीका लिया हो, लेकिन फिर भी उन्हें इसे लेने की जरूरत पड़ेगी। इस वैक्सीन को इस तरह बनाया गया है कि ये शरीर के इम्यून सिस्टम या प्रतिरोधी क्षमता को एक खास संक्रमण से बचाव के लिए तैयार करता है। लेकिन इसका इम्यून सिस्टम पर इतना व्यापक प्रभाव पड़ता है कि उसे देखकर लगता है कि यह दूसरी संक्रामक बीमारियों से भी हमारे शरीर को बचा सकता है। कोरोना वायरस के संक्रमण के मामले में भी यह प्रभावी साबित हो सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
बीसीजी का असर 

इससे पहले हुए क्लीनिकल ट्रायल में यह पता चला कि बीसीजी का टीका पश्चिम अफ्रीका के देश गिनी बिसाउ में नवजातों में मृत्यु दर को 38 फीसदी तक कम करने में कामयाब रहा है। मृत्यु दर में यह कमी बीसीजी टीके की वजह से निमोनिया और सेप्सीस के मामले कम होने की वजह से आई। दक्षिण अफ्रीका में इस टीके से जुड़े अध्ययन से पता चला कि इसके असर की वजह से नाक, गले और फेफड़े के संक्रमण में 73 फीसदी की कमी आई। नीदरलैंड में बीसीजी की वजह से येलो फीवर वायरस के शरीर में कम होने के प्रमाण मिले हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर मेडिकल स्कूल के प्रोफेसर जॉन कैंपबेल ने बताया, 'वैश्विक पैमाने पर यह काफी अहम हो सकता है। भले ही हम यह मान कर चलें कि यह कोविड के खिलाफ उस तरह से कारगर नहीं साबित होगा, लेकिन यह जब तक कोविड की वैक्सीन नहीं तैयार हो जाती या फिर उसका कोई इलाज नहीं खोज लिया जाता, तब तक के लिए यह राहत देने वाला साबित हो सकता है।' 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बीसीजी को लेकर ब्रिटेन में चल रहा ट्रायल एक अंतरराष्ट्रीय अध्ययन का हिस्सा है। ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, स्पेन और ब्राजील जैसे देशों में भी 10,000 लोगों पर ये ट्रायल चल रहा है। ट्रायल के दौरान स्वास्थ्यकर्मियों और देखभाल में लगे उन लोगों को विशेष तौर पर ध्यान में रखा गया है, जिन्हें कोरोना वायरस का संक्रमण होने की आशंका सबसे अधिक है। इसलिए अगर ये वैक्सीन प्रभावी होता है तो शोधकर्ताओं को इसके असर के बारे में फौरन पता चल पाएगा। एक्सेटर के डॉ. सैम हिल्टन ट्रायल में हिस्सा ले रहे हैं, क्योंकि उन्हें कोरोना होने की आशंका किसी और की तुलना में अधिक है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना के असर को कम करेगा 

उन्होंने कहा, 'बीसीजी कोरोना के दौरान आपको ज्यादा बीमार नहीं पड़ने देगा, इसकी प्रबल संभावना दिखती है। इसलिए मैं इसे खुद के लिए एक बचाव के तौर पर देखता हूं। इस वजह से इस बात की संभावना बढ़ गई है कि मैं इस जाड़े में भी काम पर जा सकूंगा।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख डॉक्टर टेड्रोस एडनॉम ग्रेबियेसस ने लैंसेट में एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने लिखा है कि बीसीजी वैक्सीन में वो क्षमता है कि वो 'बीमारी की वैक्सीन नहीं खोजे जाने तक उसके असर को कम करने वाले उपाय के तौर पर भरपाई कर सके। कोविड-19 और भविष्य में आने वाली दूसरी महामारियों से मुकाबला करने को लेकर यह कारगर होगा।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
हालांकि बीसीजी लंबे वक्त के लिए कोई समाधान नहीं देती है। ब्रिटेन में 2005 के बाद से बीसीजी के टीके का प्रयोग नियमित तौर पर नहीं हुआ है। इसकी वजह यह है कि वहां टीबी के मामले बहुत कम हैं। इसके अलावा यह वैक्सीन इम्यून सिस्टम को एंटीबॉडी और श्वेत रक्त कोशिका विकसित करने के लिए नहीं तैयार करता है जबकि ये दोनों ही कोरोना वायरस से मुकाबला करने में कारगर साबित होते हैं। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना में दूसरी वैक्सीन का इस्तेमाल 

लेकिन अभी भी मुख्य उद्देश्य विशेष तौर पर सिर्फ कोरोना से सीधे तौर पर निपटने वाली वैक्सीन की तलाश करना ही है। ऐसी दस वैक्सीन क्लीनिकल रिसर्च के अंतिम चरण में हैं। इसमें से एक वैक्सीन यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड ने तैयार की है। ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप के प्रोफेसर एंड्रयू पोलार्ड ने बताया, 'ज्यादातर वैक्सीन इस तरह से तैयार की जाती हैं कि वो जिस रोगाणु के लिए तैयार की गई हैं, उसके खिलाफ इम्यून सिस्टम को मजबूत करें, लेकिन एक बेहतर इम्यून सिस्टम तैयार करने के लिए उस विशेष रोगाणु के अलावा दूसरे रोगाणुओं से मुकाबला करने की भी क्षमता विकसित करनी होती है ताकि भविष्य में भी वो कारगर रहे।' 

वो कहते हैं, 'समस्या यह है कि आज मैं यह नहीं बता सकता कि आप दूसरे वैक्सीन का इस्तेमाल कोरोना से बचने के लिए कैसे कर सकते हैं या नहीं, क्योंकि इसे लेकर हमारे पास कोई प्रमाण नहीं है।' 
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