फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Coronavirus Vaccine Update: इस देश में लोगों को दी गई कोरोना की वैक्सीन, वैज्ञानिकों का दावा- कोई साइड इफेक्ट नहीं

Fri, 31 Jul 2020 05:47 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 10
Coronavirus Vaccine in Britain - फोटो : Pixabay/Insta/Amar Ujala
कोरोना की वैक्सीन तैयार करने के लिए भारत, रूस, ब्रिटेन, चीन, अमेरिका समेत कई देशों के वैज्ञानिक लगे हुए हैं। ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की वैक्सीन इस रेस में आगे चल रही है, जिसका ट्रायल लगभग अंतिम फेज में है। ऑक्सफोर्ड की रिसर्च पर भारत की सीरम इंडिया इंस्टीटयूट वैक्सीन का उत्पादन करेगी। ब्रिटेन में ही एक और वैक्सीन का इंसानों पर ट्रायल किया गया है, जिसके बेहतर परिणाम सामने आ रहे हैं। यहां वॉलेंटियर्स को वैक्सीन की डोज दी गई है और लंदन के इंपीरियल कॉलेज के वैज्ञानिकों का दावा है कि इस वैक्सीन से इंसानी शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी बढ़ रही है। अब 300 लोगों पर यह ट्रायल किया जाना है।
विज्ञापन

2 of 10
Coronavirus Vaccine News - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
  • इंपीरियल कॉलेज लंदन की ओर से ह्यूमन ट्रायल से पहले इस वैक्सीन का जानवरों पर किया गया ट्रॉयल भी सफल रहा है। अब इस वैक्सीन का 300 लोगों पर ट्रॉयल किया जाना है। प्रोफेसर रॉबिन शटोक इस ट्रायल का नेतृत्व कर रहे हैं। इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैज्ञानिकों का कहना है कि वे शुरुआती परीक्षण में एक प्रयोगात्मक कोरोना वायरस वैक्सीन के साथ सैकड़ों लोगों को प्रतिरक्षित कर रहे हैं। 
विज्ञापन

3 of 10
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • इंपीरियल कॉलेज के प्रोफेसर डॉक्टर रॉबिन शटॉक ने न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस को बताया कि उन्होंने और उनके सहयोगी वैज्ञानिकों ने वैक्सीन के ट्रायल की कठिन प्रक्रिया को पूरा कर लिया है और अब जल्द ही यह परीक्षण लगभग 300 लोगों के लिए किया जाएगा। इस ट्रायल में 75 वर्ष से अधिक आयु वाले कुछ लोग भी शामिल होंगे। 

4 of 10
Corona Vaccine Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
  • प्रो. शटॉक ने कहा कि परीक्षण को अच्छी तरह पूरा कर लिया गया है इसके कोई भी साइड इफेक्ट नहीं देखे गए हैं। इंपीरियल कॉलेज में वैक्सीन की इस रिसर्च को लीड कर रहे प्रो. शटॉक को उम्मीद है कि अक्तूबर तक उनके पास इतना सेफ्टी डेटा उपलब्ध हो जाएगा कि वो हजारों लोगों को वैक्सीन की डोज दे सकेंगे। 
विज्ञापन

5 of 10
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • प्रो. रॉबिन के मुताबिक, चूंकि ब्रिटेन में कोविड संक्रमण के मामले कम होते दिख रहे हैं तो अभी यह नहीं कहा जा सकता कि वैक्सीन कितनी काम कर रही है। इस स्थिति में वे और उनके सहयोगी किसी दूसरी जगह वैक्सीन का परीक्षण करने के बारे में भी सोच रहे हैं। उन्होंने कहा, "हम इस महामारी के हॉट स्पॉट वाली जगहों पर ट्रायल की सोच रहे हैं और वहां ट्रायल कर रहे सहयोगियों से बात कर रहे हैं, जिनके पास इस प्रकार के अध्ययन की सुविधाएं हैं।"
विज्ञापन

6 of 10
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
किस तरह काम करती है वैक्सीन
  • इंपीरियल कॉलेज द्वारा तैयार यह वैक्सीन वायरस के आधार पर आनुवंशिक कोड के सिंथेटिक किस्मों का इस्तेमाल करती है। एक बार इसे मांसपेशी में इंजेक्ट करने के बाद शरीर की कोशिकाओं को कोरोना वायरस पर एक स्पाइक प्रोटीन की प्रतियां बनाने के निर्देश मिलते हैं।  इससे प्रतिरक्षा क्षमता पैदा होती है, जिससे भविष्य में शरीर कोविड-19 से लड़ने के लिए तैयार हो जाता है। 
विज्ञापन

7 of 10
कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
  • प्रो. रॉबिन कहते हैं कि अब कोरोना वायरस की कई वैक्सीन देखने को मिल रही हैं और ऐसा लगता है कि इसमें से कुछ तो जरूर असरदार साबित होंगी। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में करीब 20 वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल में हैं। अगर 10 फीसदी सफलता की भी संभावना हो तो हमें पूरा विश्वास है कि इनमें से कम से कम दो तो काम करेंगे। 

8 of 10
कोरोना वैक्सीन (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : social media
  • प्रो. रॉबिन ने कहा कि वैक्सीन की सफलता वास्तव में इस बात पर भी निर्भर करती है कि कोरोना वायरस से सुरक्षा के लिए प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया को कितना मजबूत होना चाहिए। रॉबिन ने कहा, "उन्हें उम्मीद है कि इंपीरियल का टीका बेहतर काम करेगा लेकिन अभी वैज्ञानिक डेटा का इंतजार करना चाहिए।"

9 of 10
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • मालूम हो इसी सप्ताह की शुरुआत में दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन ट्रायल अमेरिका में शुरू हुआ है, जिसमें 30 हजार वॉलेंटियर्स को यूएस नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मॉडर्न इंक द्वारा बनाई गई वैक्सीन की डोज देकर अध्ययन किया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर ब्रिटेन की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और चीन द्वारा कई वैक्सीन तकनीकों पर आधारित ह्यूमन ट्रायल भी चल रहे हैं। 
विज्ञापन

10 of 10
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि कोरोना की वैक्सीन के लिए कई दृष्टिकोण जरूरी हैं, क्योंकि वैक्सीन डेवलपमेंट यानी टीके के विकास के लिए सामान्य सफलता दर लगभग 10 फीसदी है। इस लिहाज से प्रो. रॉबिन की भी बात तर्कपूर्ण लगती है कि यदि 20 वैक्सीन क्लिनिकल ट्रायल फेज में है, तो कम से कम दो तो निश्चित सफल होंगी। मालूम हो कि कुछ वैक्सीन ह्यूमन ट्रायल के अंतिम चरण में चल रही हैं। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें