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Covid 19 Vaccine Update: सुई, ओरल ड्रॉप या इनहेलर... किस रूप में कारगर होगी वैक्सीन?

Fri, 26 Jun 2020 03:04 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Corona Vaccine Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर के वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन बनाने में लगे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, ब्रिटेन, अमेरिका, चीन, फ्रांस और अन्य देशों की कुल 13 वैक्सीन इस रेस में आगे चल रही हैं। ब्रिटेन में ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी वाली वैक्सीन ट्रायल के अंतिम फेज में है, जबकि वहीं लंदन के इंपीरियल कॉलेज में तैयार की गई वैक्सीन भी इंसानों पर ट्रायल की प्रक्रिया में है। वैक्सीन एक बार तैयार हो जाने के बाद दूसरी चुनौती यह है कि सबसे ज्यादा असरदार होने के लिए इसे किस रूप में लाया जाए। बीसीजी की तरह इंजेक्शन के रूप में, पोलियो की तरह ओरल ड्रॉप के रूप में या फिर किसी और रूप में?
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Corona Vaccine Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
  • ब्रिटेन के ही शोधकर्ताओं ने कोरोना की बन रही वैक्सीनों को लेकर यह दावा किया है कि यह इन्हेलर के रूप में या फिर नाक के स्प्रे के रूप में ज्यादा प्रभावी हो सकता है। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और इंपीरियल कॉलेज लंदन, दोनों जगह के वैज्ञानिकों का यही मानना है कि इस सांस संबंधी संक्रमण से लोगों को बचाने के लिए सीधे फेफड़े में दवा डालना सबसे अच्छा तरीका हो सकता है। 
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Coronavirus Vaccine Update - फोटो : Pixabay/Insta/Amar Ujala
  • ब्रिटेन के ये दोनों ही संस्थान फिलहाल अपने-अपने कोविड-19 वैक्सीन का परीक्षण कर रहे हैं। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी द्वारा बनाई जा रही वैक्सीन फिलहाल इस रेस में आगे चल रही है। वर्तमान में तीसरे चरण के परीक्षणों में आगे बढ़ने के बाद ब्रिटेन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में 10 हजार से ज्यादा लोगों पर इसका परीक्षण किया जा रहा है। वहीं, इंपीरियल कॉलेज लंदन के वैक्सीन को पहले प्रतिभागी को दिया गया है और अब तक उसमें कोई दुष्प्रभाव नहीं देखे गए हैं। 

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Corona Vaccine Update
  • वैज्ञानिकों के मुताबिक, म्यूकस मेमब्रेन ऊतकों का सुरक्षा कवच होता है, जो मानव शरीर के श्वसन तंत्र, फेफड़ों आदि सभी अंगों में मौजूद होता है। ये नाक और मुंह में भी मौजूद होता है और अंदर घुसने वाले वायरसों को जकड़ता है। दरअसल, ये एक शक्तिशाली और चिपचिपा पदार्थ बनाते हैं जो वायरस को जकड़ लेता है।
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : पिक्सा
  • वैज्ञानिकों का तर्क है कि नाक से वैक्सीन देने से वह म्यूकस मेमब्रेन को उत्प्रेरित करेगा ताकि वे तुरंत कोविड-19 वायरस को पहचान लें और उसे अंदन जाने से रोक दें। ऐसी वैक्सीन नाक के स्प्रे के रूप में दी जा सकती है। 
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कोरोना का टीका (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : PTI
बुजुर्गों के लिए ज्यादा कारगर 
  • शोधकर्ता प्रोफेसर रोबिन शेटॉक ने कहा, इनहेलर या स्प्रे से दी जाने वाली वैक्सीन बुजुर्गों के लिए ज्यादा कारगर हो सकती है। यह सीधे फेफड़ों में पहुंचेगा और उन ऊतकों में फैल जाएगा जिसे वायरस संक्रमित कर सकता है। 
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कोरोना का टीका (सांकेतिक तस्वीर)
  • प्रो. शेटॉक का तर्क है कि बुजुर्गों में उम्र के साथ प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर होती जाती है। ऐसे में इंजेक्शन यानी सुई से पारंपरिक तौर पर दी जाने वाली वैक्सीन प्रभावी साबित नहीं हो पाएगी। वैज्ञानिकों का कहना है कि नाक से दी जाने वाली वैक्सीन बुजुर्गों के फेफड़ों को मजबूत करेगी। 
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