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Corona Vaccine: रेस में आगे चल रहे रूस ने क्या सच में वैक्सीन रिसर्च चुराने की कोशिश की?

Fri, 17 Jul 2020 06:21 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रिसर्च (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण की चपेट में दुनिया के 200 से ज्यादा देश हैं। इनमें अमेरिका, ब्रिटेन, रूस, भारत और ब्राजील जैसे देश ज्यादा प्रभावित हुए हैं। बढ़ते संक्रमण के बीच कई देश इसकी वैक्सीन तैयार करने के नजदीक पहुंच गए है। दुनियाभर में 110 से ज्यादा वैक्सीन पर वैज्ञानिक शोधरत हैं, जिनमें 21 से ज्यादा वैक्सीन नैदानिक परीक्षण के स्टेज में हैं। भारत में दो वैक्सीन का ह्यूमन ट्रायल शुरू हो चुका है। वहीं चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, रूस जैसे देशों में भी वैक्सीन पर सफलता मिलने के आसार हैं। रूस की सेचेनोव यूनिवर्सिटी ने दावा किया है कि वह सितंबर तक वैक्सीन उपलब्ध करा देगी। वहां तीसरे चरण में बड़े पैमाने पर ट्रायल के लिए अगस्त में वैक्सीन लॉन्च करने का दावा किया जा रहा है। एक तरफ रूस वैक्सीन बनाने की रेस में आगे चल रहा है तो वहीं दूसरी ओर उस पर रिसर्च चोरी के आरोप भी लग रहे हैं। 
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Coronavirus Vaccine - फोटो : iStock/Amar Ujala
  • अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा ने रूस पर आरोप लगाया है कि वह दुनियाभर में फैली महामारी कोरोना वायरस के वैक्सीन के लिए हो रही रिसर्च चुराने की कोशिश कर रहा है। ब्रिटेन की खुफिया एजेंसी ने चेतावनी दी है कि रूस दूसरे देशों की रिसर्च को चोरी कर सकता है। मालूम हो कि रूस कोरोना वैक्सीन बनाने के काफी नजदीक है। उसका दावा है कि अबतक किए गए उसके सारे ट्रायल सही रहे हैं और जल्द ही वह वैक्सीन लॉन्च कर सकता है।
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साइबर धोखाधड़ी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : social media
  • खबरों के मुताबिक, ब्रिटिश नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (NCSC) ने कहा है कि रूस की सरकार या सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े हैकर्स अमेरिका, ब्रिटेन और कनाडा में वैक्सीन संबंधी अहम डाटा को निशाना बना सकते हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि रूस ने किन संस्थानों पर हैकिंग की कोशिश की है या अब तक किस तरह का डाटा चोरी हुआ है। इतना कहा जा रहा है कि हैकरों ने वैक्सीन रिसर्च में डाका डालने की कोशिश की। हालांकि रूस ने इन आरोपों से साफ इनकार किया गया है। 

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Cyber Crime - फोटो : Social Media
  • रूस के राष्ट्रपति पुतिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा है कि हमारे पास इस बात की कोई जानकारी नहीं कि ब्रिटेन में फॉर्मा कंपनियों और रिसर्च फैसिलिटी में किसने हैकिंग की कोशिश की। हालांकि, ब्रिटिश खुफिया एजेंसी के विशेषज्ञों का कहना है कि इन साइबर हमलों के पीछे कोजी बियर नाम के एक संगठन का हाथ है। इस ग्रुप को एपीटी-29 नाम से भी जाना जाता है और इसके रूस के रक्षा मंत्रालय से संबंध होने की बात भी सामने आती रही हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
  • मालूम हो कि कोजी बियर संगठन के नाम का खुलासा पहली बार साल 2014 में हुआ था। इस ग्रुप पर अमेरिका के 2016 चुनाव के दौरान हैकिंग का आरोप लगता रहा है। साल 2017 में कोजी बियर संगठन ने ही नॉर्वे की लेबर पार्टी, रक्षा और विदेश मंत्रालय पर साइबर हमला किया था। ब्रिटिश सरकार ने पिछले दिनों ये आरोप लगाया था कि रूस की तरफ से ब्रिटेन के 2019 के चुनाव में भी दखल की कोशिश की जा चुकी है।
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साइबर क्राइम(सांकेतिक) - फोटो : सोशल मीडिया
  • ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसी ने कहा है कि इतना तो तय है कि इन सब के पीछे रूसी इंटेलिजेंस एजेंसियों का हाथ  है। ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमिनिक राब ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि यह कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता कि रूस की कोई भी खुफिया एजेंसी कोरोना के खिलाफ लड़ाई में जुटे लोगों को निशाना बना रही है। 
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