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Coronavirus Vaccine: वैक्सीन के 100 फीसदी सही होने का क्या मतलब है? विशेषज्ञ से जानें सबकुछ

Tue, 15 Dec 2020 08:31 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : iStock
कोरोना की वैक्सीन को लेकर अब हर दिन कोई न कोई अच्छी खबर सुनने को मिल ही रही है। हाल ही में ब्रिटेन में टीकाकरण की शुरुआत हुई है जबकि सोमवार से अमेरिका में भी आम नागरिकों को टीका लगाना शुरू कर दिया गया। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के सीईओ अदार पूनावाला ने कहा है कि भारत में भी जनवरी से टीकाकरण शुरू हो सकता है। उन्होंने उम्मीद जताई है कि भारत में हर व्यक्ति को अक्तूबर 2021 तक ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका की वैक्सीन मिल जाएगी। ये वैक्सीन 70 फीसदी कारगर साबित हुई है। इसके अलावा और भी कई वैक्सीन हैं, जिन्हें 90 से 95 फीसदी तक प्रभावी पाया गया है। ऐसे में सवाल उठता है कि वैक्सीन के 100 फीसदी सही होने का आखिर क्या मतलब है? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं वैक्सीन से जुड़े ऐसे ही कुछ जरूरी सवालों के जवाब...
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन को लेकर अफवाहों के दौर में कैसे लोगों तक सही जानकारी पहुंचाएं? 
  • इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पूर्व सचिव डॉ. नरेंद्र सैनी कहते हैं, 'हम वैक्सीन का इंतजार कर रहे थे, लेकिन दो-चार घटनाएं ऐसी सामने आईं जिसमें लगा कि टीकाकरण में किन्हीं दो-तीन लोगों को रिएक्शन हुआ। इसके बाद वह इस तरह से प्रोजेक्ट हुआ, जैसे कि टीकाकरण खराब है। कुछ लोगों ने तो विरोध भी जताया। यह गलत है और ऐसा नहीं होना चाहिए। आम आदमी को पता होना चाहिए कि जब भी कोई टीकाकरण आता है तो वह बिना वैज्ञानिक सबूत के नहीं आ सकता।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
टीकाकरण के ट्रायल को समझने की जरूरत है या नहीं? 
  • डॉ. नरेंद्र सैनी बताते हैं, 'मीडिया और जनता ट्रायल वाले किसी भी केस में बिल्कुल ध्यान न दें। जब हम ट्रायल करते हैं तो उसमें फेज-3 ट्रायल में खासतौर पर दो तरह के व्यक्तियों को चुनते हैं। एक जिन्हें टीका लगाते हैं और दूसरे वे जिन्हें नहीं लगाया जाता। उनकी तुलना होती है। इसमें जिसको टीका लग रहा है या जो लगा रहा है, उसको भी नहीं मालूम होता कि इस व्यक्ति को मैंने इंजेक्शन लगाया है कि नहीं। जिसको लगाया है, उसे हम नाम देते हैं प्लेसिबो। इसके बारे में जो व्यक्ति रिसर्च कर रहा होता है, केवल उसे ही इस बारे में पता होता है।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
वैक्सीन के 100 फीसदी सही होने का क्या मतलब है? 
  • डॉ. नरेंद्र सैनी बताते हैं, 'हमें यह मालूम होना चाहिए कि कोई भी टीका कभी भी 100 फीसदी नहीं होता। आपने यह देखा होगा कि कोई टीका 90 फीसदी या कोई 80 फीसदी था, जिसके एफिकेसी भी कहते हैं। ऐसे में 10 फीसदी लोग तो फिर भी होंगे जिनके वैक्सीन के बावजूद भी बुखार हो सकता है या उनको कोविड हो सकता है। ऐसे में उस तरफ ध्यान मत दीजिए।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
देश के प्रधानमंत्री जब वैक्सीन को लेकर वैज्ञानिकों से सीधे बात करते हैं तो लोगों का कितना मनोबल बढ़ता है? 
  • डॉ. नरेंद्र सैनी बताते हैं, 'विज्ञान में वैक्सीन को लेकर आपको ये मालूम नहीं होता कि आप सफल होंगे या नहीं। कई बार आप प्रयोग करते हैं और असफल हो जाते हैं। ऐसे समय में आपको उत्साह की जरूरत होती है, क्योंकि आप एक ऐसे दौर से गुजर रहे होते हैं जहां ये नहीं मालूम होता कि कल क्या होने वाला है। ऐसे समय में देश के सबसे बड़े सर्वप्रिय नेता आपकी पीठ पर हाथ रखते हैं तो उससे बड़ा उत्साह कुछ और नहीं हो सकता। प्रधानमंत्री आपकी पीठ पर हाथ रखते हैं तो उसका मतलब होता है कि पूरा देश आपके साथ है।' 
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