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Coronavirus: कोरोना के खिलाफ काफी प्रभावी हो सकती है यह दवा, नए शोध में हैरान करने वाला खुलासा

Mon, 14 Dec 2020 09:23 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus Drug Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
वैक्सीन के अलावा कोरोना वायरस के इलाज में काम आने वाली दवाओं की खोज लगातार जारी है। पहले हुए अध्ययनों में रेमडेसिविर दवा को कोरोना के इलाज में काफी कारगर बताया गया था, लेकिन बाद में कहा गया कि इस दवा का कोरोना के कारण मौत की दर पर कोई असर नहीं होता है। अब एक बार फिर से एक अध्ययन के मुताबिक कहा जा रहा है कि यह दवा काफी प्रभावी 'एंटी वायरल' हो सकती है। हालांकि यह अध्ययन एक ही मरीज पर आधारित है। यह नया अध्ययन 'नेचर कम्युनिकेशंस' पत्रिका में प्रकाशित हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक, रेमडेसिविर दवा का विकास वैसे तो हेपेटाइटिस-सी के लिए हुआ था, लेकिन बाद में इबोला और कोरोना वायरस के खिलाफ भी इसका परीक्षण किया गया।   
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन में कैंब्रिज विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने 'एक्सएलए' से पीड़ित 31 वर्षीय एक व्यक्ति पर इस दवा का परीक्षण किया। दरअसल, 'एक्सएलए' प्रतिरक्षा संबंधी एक दुर्लभ बीमारी है, जो रोग प्रतिरोधक क्षमता को प्रभावित करता है, जिसकी वजह से शरीर को संक्रमण से लड़ने में दिक्कत होती है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अध्ययन के मुताबिक, 31 वर्षीय व्यक्ति में पहले कोरोना के आम लक्षण (बुखार, कफ, चक्कर आना और उल्टी) देखने को मिले। जांच में उसे संक्रमित पाया गया, लेकिन कई दिनों तक उसमें ये लक्षण बने रहे, जिसके बाद 30वें दिन उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया और सांस लेने में परेशानी होने की वजह से उसे ऑक्सीजन भी दिया गया। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कैंब्रिज विश्वविद्यालय के जेम्स थावेनतिरन ने बताया कि पहले मरीज का इलाज हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन जैसी दवाइयों से किया गया, जिसका कुछ खास असर नहीं पड़ा, जिसके बाद 34वें दिन इलाज रोक दिया गया और फिर मरीज को दस दिनों के लिए रेमडेसिविर दवा दी गई। इस दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि महज 36 घंटे के अंदर मरीज के बुखार और सांस लेने में तकलीफ में कमी आई और साथ ही चक्कर और उल्टी जैसी शिकायतें भी खत्म हो गईं। इसके बाद 43वें दिन उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हालांकि अस्पताल से छुट्टी दिए जाने के एक हफ्ते बाद ही मरीज को फिर से बुखार, चक्कर आना और सांस लेने में परेशानी शुरू हो गई, जिसके बाद 54वें दिन उसे फिर से अस्पताल में भर्ती कराया गया और ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ गई। दरअसल, वह फिर से कोरोना से संक्रमित पाया गया था। 61वें दिन उसे फिर से दस दिनों के लिए रेमडेसिविर दवा देनी शुरू की गई। इस दौरान शोधकर्ताओं ने पाया कि उसके लक्षणों में एक बार फिर से तेजी से सुधार होने लगा और बाद में उसे ऑक्सीजन की भी जरूरत नहीं पड़ी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, 69वें और 70वें दिन 'कोनवालसेंट प्लाज्मा' के साथ अतिरिक्त इलाज के तीन दिन बाद उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। फिलहाल वह व्यक्ति ठीक है और उसमें कोरोना के कोई भी लक्षण नहीं हैं। 
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Coronavirus Drug Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
दरअसल, वैज्ञानिकों ने पहले रेमडेसिविर दवा पर उम्मीद जताई थी कि उससे कोरोना के कारण मृत्यु दर को कम किया जा सकता है, लेकिन कई क्लीनिकल परीक्षणों के परिणामस्वरूप विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अक्तूबर में यह घोषणा कर दी कि इस दवा से मृत्यु दर में कोई कमी नहीं आई। इसपर कैंब्रिज विश्वविद्यालय के जेम्स थावेनतिरन का कहना है, 'रेमडेसिविर के प्रभाव का समर्थन करने या उसपर सवाल उठाने के लिए अलग-अलग अध्ययन हैं, लेकिन संक्रमण के पहले चरण के दौरान किए गए कुछ परीक्षण इसके वायरल विरोधी गुणों का आकलन करने में उपयुक्त नहीं हैं।' 
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