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Covaxin Update: कोरोना की देसी वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल को लेकर क्या है अपडेट जानकारी?

Thu, 09 Jul 2020 01:49 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Covaxin Latest Updates - फोटो : ICMR
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर के लोगों को इंतजार है तो बस इसकी वैक्सीन का। आईसीएमआर यानी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद और भारत बायोटेक ने मिलकर कोरोना की वैक्सीन तैयार कर ली है, जिसे 15 अगस्त तक लॉन्च किए जाने का दावा किया जा रहा है। इस देसी वैक्सीन Covaxin का ह्यूमन ट्रायल देश के 12 संस्थानों में शुरू हो रहा है। वैक्सीन का कोड नेम BBV152 रखा गया है। अगर यह वैक्सीन 15 अगस्त तक लॉन्च हो जाती है तो यह संभवत: विश्व की पहली कोरोना वैक्सीन होगी। आइए जानते हैं इस वैक्सीन को लेकर अपडेट जानकारी क्या है: 
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कोवाक्सिन वैक्सीन - फोटो : ट्विटर
  • भारत बायोटेक कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. कृष्णा एल्ला का कहना है कि यह देश में तैयार होने वाली कोरोना की पहली वैक्सीन है। इसे आईसीएमआर और राष्ट्रीय विषाणुविज्ञान संस्थान (NIV) के साथ मिलकर तैयार किया गया है। कंपनी की ओर से जारी बयान के मुताबिक, वैक्सीन को हैदराबाद के जीनोम वैली के बायो-सेफ्टी लेवल 3 हाई कंटेनमेंट फैसिलिटी में तैयार किया गया है। 
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : social media
  • भारत बायोटेक कंपनी को ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI), सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (CDSCO) और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने पहले और दूसरे चरण का ह्यूमन ट्रायल शुरू करने की मंजूरी दे दी है। डॉ. एल्ला के मुताबिक, सीडीएससीओ के सपोर्ट और गाइडेंस के कारण इस प्रोजेक्ट को कम समय में अप्रूवल मिला। हमारी रिसर्च टीम ने बिना थके, बिना रुके काम किया है। 

एम्स, पटना में 10 जुलाई से ट्रायल
  • ट्रायल के लिए आईसीएमआर ने उन्हीं संस्थानों को चुना है, जहां पर क्लिनिकल फार्माकॉलोजी विंग है और ह्यूमन ट्रायल में अनुभवी हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स हैं। 10 जुलाई से एम्स पटना में वैक्सीन का ट्रायल शुरू होगा। वहीं, दूसरी ओर हैदराबाद के निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (NIMS) में ट्रायल की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social media
  • चयनित 12 संस्थानों में ट्रायल के लिए प्रतिभागियों ने एनरोलमेंट करना शुरू कर दिया है। वहीं, वैक्सीन के सैंपल को भी एक केंद्र पर गुणवत्ता और सुरक्षा जांच से गुजारा जा रहा है। बीते शुक्रवार से शुरू हुए ये जांच अगले हफ्ते तक पूरा होने की उम्मीद हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इसमें जल्दबाजी नहीं की जा सकती। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
पहले 375 फिर 750 लोगों पर ट्रायल
  • Covaxin को फेज 1 और फेज 2 ट्रायल के लिए ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया से मंजूरी मिल चुकी है। जानकारी के अनुसार, पहले फेज में कुल 375 लोगों पर ट्रायल होगा जबकि दूसरे में 750 लोगों पर। हैदराबाद के ही निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज(NIMS) में मंगलवार से इसके क्लिनिकल ट्रायल की प्रक्रिया शुरू हो गई। कंपनी की ओर से फाइनल एनरोलमेंट के लिए 13 जुलाई की तारीख तय की गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
किस तरह होगा वैक्सीन का ट्रायल?
  • निजाम इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के निदेशक डॉ के. मनोहर ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बातचीत में कहा कि पहले कुछ स्वस्थ लोगों को चुना जाएगा और उनके ब्लड सैंपल नई दिल्ली की लैब में भेजे जाएंगे। वहां से हरी झंडी मिलने के बाद उन लोगों को वैक्सीन की पहली डोज दी जाएगी। डॉ. मनोहर ने कहा कि सारी डिटेल्स आईसीएमआर की निगरानी में रहेगी, जहां डाटा का विश्लेषण हो रहा है। डॉ. मनोहर ने कहा कि ह्यूमन ट्रायल के लिए कम से कम 30 लोगों की जरूरत पड़ेगी।

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कोविड-19 वैक्सीन - फोटो : ICMR
एम्स पटना में 100 लोगों पर ट्रायल
  • पटना स्थित एम्स में ह्यूमन ट्रायल के लिए चिकित्सकों की टीम बना दी गई है। टीओआई की एक खबर के मुताबिक, एम्स के अधीक्षक डॉ. सीएम सिंह ने बताया है कि वैक्सीन का जानवरों पर प्री-क्लिनिकल ट्रायल सफल रहा है। अब यहां 22 से 50 साल की उम्र के बीच के 100 स्वस्थ लोगों पर ट्रायल किया जाएगा। दूसरे फेज में संख्या बढ़ाई भी जा सकती है। 
 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ट्रायल में कितना समय लगेगा? 
  • वैक्सीन को लेकर भले ही 15 अगस्त तक लॉन्च करने का दावा किया जा रहा हो, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रायल में लंबा समय लग सकता है। पटना एम्स के अधीक्षक डॉ. सिंह का कहना है कि क्लिनिकल ट्रायल में 6 से 8 महीने का वक्त लग सकता है।
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI
  • वहीं, कुछ अन्य विशेषज्ञों का कहना है कि क्लिनिकल ट्रायल्स रजिस्ट्री पर मौजूद प्रोटोकॉल के अनुसार, पहले फेज में कम से कम एक महीना लग सकता है। इसके डाटा को डीजीसीआई के सामने प्रस्तुत करना होता है और फिर अगले चरण की अनुमति मिलती है। पहले और दूसरे फेज के क्लीनिकल ट्रायल में सवा साल यानी एक साल तीन महीने भी लग सकते हैं। 
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