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विशेषज्ञ से जानें: क्या वैक्सीन की दूसरी डोज लेने में देरी से बढ़ रहा कोरोना का संक्रमण?

Mon, 23 Aug 2021 08:57 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
कोरोना महामारी के खिलाफ लड़ाई में भारत को एक के बाद एक नए वैक्सीन रूपी हथियार मिल रहे हैं। हाल ही में जाइडस कैडिला की वैक्सीन को ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (डीसीजीआई) से आपातकालीन उपयोग की मंजूरी मिली है। यह देश की छठवीं वैक्सीन है, जिसका नाम जायकोव-डी है। इस वैक्सीन को भारत के लिए बेहद ही खास माना जा रहा है, क्योंकि इसे 12-18 साल की उम्र के लोगों के लिए भी इस्तेमाल में लाया जा सकेगा। टीकाकरण अभियान की अगर बात करें तो देश में अब तक 58 करोड़ 14 लाख से अधिक कोविड टीके लगाए जा चुके हैं। हालांकि अभी भी देश में बहुत सारे ऐसे लोग हैं, जिन्होंने वैक्सीन की पहली डोज तो समय पर ले ली थी, लेकिन दूसरी डोज लेने में देरी कर दी है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस वजह से कुछ क्षेत्रों में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है? आइए विशेषज्ञ से जानते हैं कोरोना और वैक्सीन से जुड़े ऐसे ही कुछ जरूरी सवालों के जवाब... 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
जाइडस कैडिला का जो जायकोव-डी टीका आया है, वह अन्य वैक्सीन से किस तरह अलग है? 
  • लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज के डॉ. हरीश पेमडे कहते हैं, 'वैक्सीन बनाने के अलग-अलग तरीके होते हैं। कोविड वायरस को इनएक्टिव करके वैक्सीन बनाई जाती है, जैसे कोवाक्सिन, या वायरस के कुछ हिस्से को लेकर भी वैक्सीन बनाई जाती है, जैसे कोविशील्ड, वहीं कुछ वैक्सीन होती हैं जो पहली बार उपयोग में लाई जाती हैं, जैसे मॉडर्ना। जाइडस कैडिला डीएनए आधारित वैक्सीन है और ये पहली बार है जब ऐसी कोई वैक्सीन दुनिया में बनी है। इस वैक्सीन में एक जेनेटिक कोड होता है, जो हमारे शरीर में डाला जाता है, ये हमारे शरीर के जेनेटिक स्ट्रक्चर (आनुवंशिक संरचना) में जो डीएनए होता है, उसमें जाकर एक विशेष तरह के प्रोटीन का निर्माण करती है। हमारा शरीर उस प्रोटीन के विरुद्ध एंटीबॉडी बनाता है। उससे भविष्य में अगर कभी वायरस हमारे शरीर में प्रवेश करता है तो उससे लड़ने की क्षमता प्राप्त होती है। अगर बीमारी होती भी है, तो गंभीर नहीं होती है।' 
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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या जाइडस कैडिला की वैक्सीन अन्य वैक्सीन से ज्यादा सेफ (सुरक्षित) है? 
  • डॉ. हरीश पेमडे कहते हैं, 'वैक्सीन की सेफ्टी (सुरक्षा) इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह किस तरह दी जाती है। इसके साथ यह इस पर भी निर्भर करती है कि उसमें कौन-कौन से कंपोनेंट्स हैं। हां, ये कह सकते हैं कि अगर हम नीडल से बचाव कर लेते हैं, तो नीडल से जुड़ी हुई जो समस्याएं हैं, वह खत्म हो जाती हैं।' 

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कोरोना वैक्सीन पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
कहा  जा रहा है कि जाइडस कैडिला की वैक्सीन बिना नीडल वाली होगी, इसके बारे में थोड़ा बताइए? 
  • डॉ. हरीश पेमडे कहते हैं, 'बिना सुई वाली वैक्सीन तो पहले भी बहुत आती थी, जैसे ओरल पोलियो वैक्सीन या रोटावायरस वैक्सीन आदि। जाइडस कैडिला की वैक्सीन में एक स्पेशल जेट होता है, जिसे स्किन पर रखा जाता है। वैक्सीन इसके माध्यम से बहुत प्रेशर से आती है और फिर शरीर के अंदर चली जाती है। इसे हम इंट्राडर्मल वैक्सीन कहते हैं। इसके कई सारे फायदे होते हैं, जैसे इसे देना बेहद आसान है। नीडल का उपयोग करते हुए जो सावधानी बरतनी होती हैं, वह सब इसमें जरूरी नहीं होती।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
लोगों ने जो वैक्सीन की दूसरी डोज लेने में देरी की है, क्या उसकी वजह से कुछ क्षेत्रों में कोरोना का संक्रमण बढ़ रहा है? 

डॉ. हरीश पेमडे कहते हैं, 'हम जो वैक्सीन ले रहे हैं, यह केवल हमारी व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए नहीं है। ये पूरे समाज पर असर डालती है। जब बहुत सारे लोग वैक्सीन ले लेते हैं और दोनों डोज पूरी लगवा लेते हैं, तब जिनको वैक्सीन नहीं भी लगी है, वह भी सुरक्षित हो जाते हैं। अगर हम केवल एक ही डोज लेंगे और दूसरी डोज नहीं लेंगे, उससे सुरक्षा तो मिलेगी, लेकिन जितनी अपेक्षित होती है, उतनी नहीं मिलेगी। समय पर जो वैक्सीन दी जाती है, उसे लेना अत्यंत आवश्यक है। इससे वह व्यक्ति खुद भी सुरक्षित रहता है और समाज भी सुरक्षित रहता है। कोरोना को कम करने में वैक्सीन एक महत्वपूर्ण कारक है।' 
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