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Coronavirus Vaccine: आखिर क्या होता है वैक्सीन का इमर्जेंसी अप्रूवल? विशेषज्ञ से जानें इसके बारे में सबकुछ

Mon, 07 Dec 2020 05:13 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में कोरोना वैक्सीन - फोटो : PTI
दुनियाभर में कोरोना से संक्रमण के मामले बढ़कर अब छह करोड़ 74 लाख से अधिक हो गए हैं जबकि मरने वालों की संख्या भी 15 लाख 43 हजार से अधिक है। भारत में भी संक्रमण के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। यहां भी अब तक 96 लाख 77 हजार से अधिक लोग संक्रमित हो चुके हैं जबकि एक लाख 40 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि भारत में वैक्सीन बनाने वाली दो कंपनियों ने वैक्सीन के इस्तेमाल के लिए इमर्जेंसी अप्रूवल यानी आपातकालीन मंजूरी मांगी है। आइए जानते हैं कि आखिर ये वैक्सीन का इमर्जेंसी अप्रूवल होता क्या है और साथ ही कोरोना से जुड़े अन्य सवालों के जवाब भी विशेषज्ञ से जानने की कोशिश करते हैं। 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
क्या कुछ ही लोगों को वैक्सीन देने से बाकी लोगों को संक्रमण से बचाया जा सकता है? 
  • दिल्ली स्थित लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज की डॉ. अपर्णा अग्रवाल बताती हैं, 'हर्ड इम्यूनिटी के बारे में आप शुरू से सुन रहे होंगे। किसी जनसमूह में जब एक निश्चित अनुपात में लोगों में इम्यूनिटी आ जाती है, तब वायरस की चेन टूट जाती है। जैसे कोरोना में हम कहते हैं कि इसमें एक व्यक्ति औसतन तीन लोगों को संक्रमित करता है, अगर उन तीन में इम्यूनिटी है तो वायरस आगे फैलने से रुक जाएगा। इसलिए हमारे देश में एक निश्चित संख्या में लोग वैक्सीन से इम्यून हो गए तो हम इस चेन को तोड़ सकते हैं। अगर हम इसमें सफल हो गए, तो हो सकता है सभी को वैक्सीन देने की जरूरत न पड़े।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
फाइजर कंपनी ने वैक्सीन का इमर्जेंसी अप्रूवल मांगा है, इमर्जेंसी अप्रूवल का क्या मतलब होता है? 
  • डॉ. अपर्णा अग्रवाल बताती हैं, 'आमतौर पर वैक्सीन बनने में 10 से 15 साल लग जाते हैं, लेकिन इस वक्त कोविड संक्रमण को रोकना हमारी प्राथमिकता है, तो इसकी वैक्सीन को आपात स्थिति में अप्रूवल दिया जाएगा, इसे ही इमर्जेंसी अप्रूवल कहते हैं। जरूरत को देखते हुए वैक्सीन बनाने की प्रक्रिया को छोटा कर दिया गया है, कुछ जगहों पर वैक्सीन के स्टेज-2 और स्टेज-3 को मिला दिया गया है। इमर्जेंसी अप्रूवल, अंतरिम अप्रूवल होता है, फाइनल नहीं। इसलिए लोग यह मान कर चलें कि वैक्सीन पूरी तरह कारगर नहीं भी हो सकती है और उसके कुछ साइड-इफेक्ट भी हो सकते हैं।' 

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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
ठीक होने के कितने दिन बाद बाकी लोगों के साथ उठ-बैठ सकते हैं? 
  • डॉ. अपर्णा अग्रवाल के मुताबिक, 'भारत सरकार के दिशा-निर्देश के अनुसार, जिस दिन आपका टेस्ट हुआ या जांच की रिपोर्ट पॉजिटिव आई और आप एसिम्प्टोमेटिक हैं, तो उस दिन से लेकर 17 दिन तक आपको बाकियों से अलग रहना है। कई लोग तो घर पर ही ठीक हो जाते हैं या दो-तीन दिन में अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाते हैं। डिस्चार्ज होने के 17 दिन बाद से आप बाकियों से मिल सकते हैं।' 
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कोरोना पर विशेषज्ञ की राय - फोटो : Twitter/Air
देश में कोरोना संक्रमण कम हो गया है या वायरस का प्रभाव कम हो गया है? 
  • डॉ. अपर्णा अग्रवाल बताती हैं, 'नए मामलों की गिरती संख्या को देखकर लोग ऐसा सोच रहे हैं, लेकिन अभी भी कुछ भी निश्चित तौर पर कहना मुमकिन नहीं है। हाल ही में मौतें अधिक हुई हैं, अभी भी बहुत गंभीर रूप से बीमार मरीज अस्पताल आ रहे हैं। जब मामलों की संख्या बढ़ी थी, तब मृत्यु की दर भी बढ़ी थी। इसलिए यह जरूरी नहीं है कि अब नंबर कम है, तो वायरस का प्रभाव कम हो गया है। ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि शादी में भीड़ के कारण एक-एक आयोजन में कई लोग संक्रमित हुए हैं।' 
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