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Coronavirus: क्या कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को वैक्सीन लेने की जरूरत है? जानिए इसके बारे में सबकुछ

Sun, 20 Dec 2020 09:39 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस वैक्सीन - फोटो : PTI
दुनिया के कई देशों में तो कोरोना का टीकाकरण चल रहा है, लेकिन भारत में अभी इसकी शुरुआत नहीं हुई है। हालांकि विशेषज्ञ ऐसा मान कर चल रहे हैं कि भारत इस महीने के अंत तक या अगले महीने की शुरुआत में टीकाकरण अभियान शुरू कर सकता है, लेकिन उससे पहले कई तरह के सवाल मन में पैदा हो रहे हैं। उन्हीं सवालों में से एक ये है कि जो लोग कोरोना से ठीक हो चुके हैं, क्या उन्हें भी वैक्सीन लेनी चाहिए? तो इसका जवाब है हां। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने दिशानिर्देशों में कहा है कि जो लोग कोविड-19 से उबर चुके हैं, उन्हें भी टीका लगवाना चाहिए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
हालांकि जो लोग टीकाकरण के समय कोरोना से संक्रमित होते हैं, उन्हें सलाह दी गई है कि वो कम से कम 14 दिनों तक के लिए टीके को टाल दें। लेकिन सवाल ये है कि उन लोगों को देखते हुए जो बीमारी से उबर चुके हैं, उन्होंने कोरोना वायरस के प्रति प्राकृतिक प्रतिरक्षा विकसित कर ली है, क्या टीकाकरण कार्यक्रम में उन्हें शामिल करना उचित है? इसके जवाब में विशेषज्ञ कहते हैं कि हां, क्योंकि प्राकृतिक प्रतिरक्षा कितने समय तक रहती है या वो कितनी मजबूत है, इसपर अभी भी स्पष्टता नहीं है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना के प्रति प्राकृतिक प्रतिरक्षा के बारे में तो वर्तमान सोच यही है कि एंटीबॉडी का स्तर कुछ महीनों के बाद गिरना शुरू हो जाता है, जिसके बाद हो सकता है कि कोरोना से ठीक हुआ व्यक्ति दोबारा से संक्रमित हो जाए। ऐसे कई मामले देखने को भी मिले हैं। हालांकि आमतौर पर ऐसा माना जा रहा है कि तीन-चार महीने तक तो शरीर में एंटीबॉडी रहती ही है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pixabay
स्वास्थ्य विशेषज्ञों कहते हैं कि हाल ही में जो लोग कोरोना से संक्रमित हुए हैं, वो कुछ महीनों तक टीका न भी लें तो कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन जो लोग कई महीने पहले ही संक्रमित हुए थे, उन्हें तो वैक्सीन उपलब्ध होते ही टीका लेने की योजना बनानी चाहिए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विशेषज्ञों के मुताबिक, कोरोना का टीका उन लोगों में एंटीबॉडी स्तर बढ़ा सकता है, जो पहले संक्रमित हो चुके हैं। उनमें वैक्सीन बूस्टर शॉट की तरह काम कर सकता है, लेकिन इस बात की भी संभावना है कि प्राकृतिक प्रतिरक्षा के साथ टीकाकरण कुछ लोगों में गंभीर प्रतिक्रिया का कारण बन सकता है। 
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